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आलिया भट्ट जैसी सुपरस्टार बेटी, महेश भट्ट जैसा पति, फिर भी सोनी राजदान के हिस्से क्यों आया स्ट्रगल?

बॉलीवुड में जब किसी एक्ट्रेस का नाम आता है, तो अक्सर उसकी फिल्मों, कामयाबी और निजी जिंदगी की चर्चा होती है. लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी हैं, जिनकी अपनी पहचान उनके परिवार के बड़े नामों के पीछे छिप जाती है. सोनी राजदान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. वह महेश भट्ट की पत्नी हैं, आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट की मां हैं. उनके परिवार में शोहरत की कोई कमी नहीं है. इसके बावजूद सोनी राजदान को अपने करियर में उस तरह की कामयाबी और लगातार काम नहीं मिला, जिसकी उम्मीद एक कलाकार करता है.

25 अक्टूबर को सोनी राजदान अपना जन्मदिन मनाती हैं. इस मौके पर उनकी जिंदगी का एक ऐसा पहलू चर्चा के लायक है, जिसके बारे में उन्होंने खुद खुलकर बात की है. यह कहानी सिर्फ एक मशहूर फिल्मी परिवार की स्त्री की नहीं, बल्कि उस एक्ट्रेस की भी है, जिसने शादी के बाद काम कम होने, अपनी पहचान पीछे छूटने और लंबे समय तक अच्छे किरदारों का इंतजार करने जैसी मुश्किलों का सामना किया.

थिएटर से शुरू हुआ सफर, फिल्मों में बनाई अपनी जगह

सोनी राजदान का जन्म 25 अक्टूबर 1956 को इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुआ था. उनके पिता नरेंद्र नाथ राजदान कश्मीरी पंडित थे, जबकि उनकी मां जर्मन मूल की थीं. हालांकि, सोनी का बचपन और उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा हिंदुस्तान में बीता.

महेश भट्ट के साथ सोनी राजदान

सोचिए, एक स्त्री जिसने अपनी मेहनत से एक्टिंग की दुनिया में जगह बनाई हो, उसे सिर्फ शादी की वजह से काम की जरूरत से बाहर मान लिया जाए, तो यह कितना निराश करने वाला होगा. सोनी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

यहां दिलचस्प बात यह है कि उनके पति खुद फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम थे. इसके बावजूद शादी के बाद उनकी अपनी पहचान मजबूत होने के बजाय काम के मौके कम होने लगे.

सोनी ने इस मुश्किल दौर के बारे में बात करते हुए यह भी बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में शादी और मां बनने के बाद स्त्रीओं को काम देने का नजरिया आज से काफी अलग था. उनके मुताबिक, शादी के बाद उन्हें अपने करियर के लिए एक अलग लड़ाई लड़नी पड़ी.

जब पति की फिल्मों में भी मिलने लगे छोटे किरदार

महेश भट्ट फिल्म इंडस्ट्री के सफल निर्देशकों में गिने जाते हैं. उन्होंने ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘डैडी’, ‘आशिकी’ और ‘सड़क’ जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई. लेकिन सोनी राजदान के लिए पति का फिल्ममेकर होना भी लगातार काम मिलने की गारंटी नहीं बन सका.

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनी ने बताया था कि शादी के बाद उन्हें फिल्मों में ज्यादा काम नहीं मिल रहा था. इस दौरान वह महेश भट्ट की कुछ फिल्मों में छोटे किरदारों में नजर आईं. इनमें ‘डैडी’, ‘सड़क’, ‘सर’ और ‘गुमराह’ जैसी फिल्में शामिल थीं.

महेश भट्ट की फिल्मों में काम मिलने के बावजूद सोनी को उन मौकों का इंतजार था, जिनमें उन्हें अपनी एक्टिंग दिखाने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. वह सिर्फ किसी बड़े निर्देशक की पत्नी के तौर पर पर्दे पर नजर नहीं आना चाहती थीं. उनकी चाहत थी कि लोग उनके काम को देखें और उन्हें एक एक्टर के रूप में पहचानें.

यह उनके करियर का ऐसा दौर था, जब परिवार में फिल्मी दुनिया से जुड़ाव होने के बावजूद उन्हें अपने लिए मौके तलाशने पड़ रहे थे.

‘बुनियाद’ ने बदली किस्मत, टीवी से फिर मिली पहचान

जब फिल्मों में काम के मौके कम हुए, तब सोनी राजदान ने टेलीविजन का रुख किया. साल 1986 में वह दूरदर्शन के लोकप्रिय सीरियल ‘बुनियाद’ में नजर आईं. इस सीरियल का निर्देशन रमेश सिप्पी और ज्योति स्वरूप ने किया था.

‘बुनियाद’ ने सोनी को दर्शकों के बीच पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. टेलीविजन पर काम मिलने से उन्हें लगातार एक्टिंग करने का मौका मिला. इसके बाद वह फिल्मों में भी अच्छे किरदारों के साथ नजर आईं.

सोनी ने अलग-अलग फिल्मों में काम करते हुए यह दिखाया कि उनकी ताकत सिर्फ किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं है. उन्होंने ‘मॉनसून वेडिंग’, ‘पेज 3’ और बाद में ‘राजी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया.

साल 2018 में रिलीज हुई ‘राजी’ में सोनी अपनी बेटी आलिया भट्ट के साथ नजर आईं. फिल्म में आलिया ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जबकि सोनी ने उनकी मां का किरदार निभाया. यह फिल्म उनके करियर की उन फिल्मों में शामिल है, जिन्हें दर्शकों ने काफी पसंद किया.

सोनी राजदान

उन्होंने यह भी माना कि अगर वह आज 25 साल की होतीं, तो शायद यही बात उनके लिए उतनी बड़ी परेशानी नहीं बनती. उनके इस बयान से उस दौर की फिल्म इंडस्ट्री की सोच का एक पहलू सामने आता है, जहां कलाकारों को उनके अभिनय के साथ-साथ उनके चेहरे और दिखने के तरीके के आधार पर भी देखा जाता था.

मां बनने के बाद भी आसान नहीं हुआ सफर

शादी के बाद सोनी राजदान की जिंदगी में दो बेटियां आईं. शाहीन भट्ट का जन्म 1988 में हुआ, जबकि आलिया भट्ट का जन्म 1993 में हुआ. परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने करियर को आगे बढ़ाना उनके लिए एक और चुनौती थी.

सितंबर 2026 में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू से जुड़ी रिपोर्ट में सोनी ने बताया कि शादी और मां बनने के बाद काम पाना उनके लिए काफी मुश्किल हो गया था. उस समय स्त्रीओं के करियर को लेकर इंडस्ट्री का नजरिया आज जैसा नहीं था.

उन्होंने अपनी बेटी आलिया के करियर को लेकर खुशी भी जाहिर की. उनके मुताबिक, आज की स्त्री कलाकारों के पास अपने काम को लेकर पहले के मुकाबले ज्यादा मौके हैं.

सोनी की इस बात में उनके अपने अनुभव की झलक दिखाई देती है. जिस तरह की मुश्किलों से उन्हें गुजरना पड़ा, वह नहीं चाहतीं कि आज की स्त्री कलाकारों को भी उसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़े.

आज भी एक्टिंग से प्यार, शोहरत के पीछे भागना नहीं

सोनी राजदान के करियर को देखें, तो उन्होंने थिएटर से शुरुआत की, फिल्मों में काम किया, टेलीविजन पर अपनी पहचान बनाई और फिर फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए. उन्होंने हमेशा ऐसे काम की तलाश की, जिसमें उन्हें एक्टिंग करने का मौका मिले.

जून 2026 में फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में सोनी ने कहा था कि अब वह सिर्फ सफलता के पीछे नहीं भागतीं, बल्कि अच्छे काम की तलाश में रहती हैं. उनके लिए यह ज्यादा मायने रखता है कि उन्हें ऐसा किरदार मिले, जिसे निभाने में उन्हें खुशी हो.

शायद यही वजह है कि सोनी राजदान की कहानी को केवल संघर्ष की कहानी कहना भी पूरी तरह सही नहीं होगा. यह एक ऐसी एक्टर का सफर है, जिसने काम कम मिलने के दौर को देखा, अपनी पहचान को परिवार के बड़े नामों के बीच पीछे जाते महसूस किया और फिर भी एक्टिंग से अपना रिश्ता बनाए रखा.

महेश भट्ट की पत्नी होना और आलिया भट्ट की मां होना उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है. लेकिन इन रिश्तों से अलग भी उनकी अपनी कहानी है. एक ऐसी कहानी, जिसमें कामयाबी के साथ इंतजार है, परिवार के साथ अपनी पहचान की तलाश है और शोहरत के बीच एक एक्टर बने रहने की जिद है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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