जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट
पालकोट (गुमला). गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की बिलिंगबिरा पंचायत के पांच गांव आज भी सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं. गोइंधारा, लौखमहन, जमझरिया, चरखागोड़ी और बिलिंगबिरा रायटोली के करीब 150 घरों के ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड मुख्यालय पालकोट तक पहुंचने के लिए उनके पास एक ही रास्ता है, लेकिन रास्ते में चुटिया डूबा नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात में इन गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है.
ग्रामीणों के अनुसार केरालोटी मुख्य पथ से इन गांवों को जोड़ने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क कच्ची है. बारिश के दौरान सड़क की स्थिति खराब होने से दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है. ऐसे में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती स्त्रीओं को खाट के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाने की नौबत आती है.
बरसात में नदी बन जाती है सबसे बड़ी बाधा
ग्रामीणों का कहना है कि चुटिया डूबा नदी पर अब तक पुल नहीं बन सका है. गर्मी के दिनों में लोग किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पांचों गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है.
इसका असर बच्चों की पढ़ाई से लेकर किसानों की उपज तक पर पड़ता है. ग्रामीणों के मुताबिक बरसात में शिशु स्कूल नहीं जा पाते, किसान अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में परेशान होते हैं और प्रखंड कार्यालय से जुड़े जरूरी काम भी प्रभावित होते हैं. कई बार ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है.
कई बार लगायी गुहार के बाद भी नहीं हुआ समाधान
बलदेव सिंह, केशर सिंह, निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह, जयपाल सिंह, दीपनारायण सिंह, बालगोविंद सिंह, निरंजन सिंह, जय नारायण सिंह, परमेश्वर सिंह, दिलु खड़िया, श्याम सुंदर सिंह, बुद्धेश्वर सिंह, मोहन नाथ सिंह, प्रद्युम्न सिंह, नरेंद्र कुमार सिंह, रूकमणी देवी, कमला देवी, जानकी देवी, फुलमनी देवी, सरीता देवी और बालेश्वरी देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगायी गयी है.
ग्रामीणों के अनुसार पूर्व उपायुक्त को भी लिखित आवेदन दिया गया था. स्थानीय विधायक भूषण बड़ा के गांव का दौरा करने और सड़क-पुल निर्माण का आश्वासन देने की बात भी ग्रामीणों ने कही. हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ है.
सड़क-पुल नहीं बना तो आंदोलन की चेतावनी
लगातार समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क और पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा.
ग्रामीणों ने प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक सड़क जाम करने और उपायुक्त कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि जब तक सड़क और पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखा जायेगा.
रोड नहीं तो वोट नहीं
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क और पुल की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों, विधायक और मंत्री को आवेदन दिया गया, लेकिन अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के आश्वासन मिलते हैं, लेकिन चुनाव के बाद समस्या जस की तस रह जाती है.
ग्रामीणों ने दावा किया कि यदि जल्द सड़क और पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो 2029 के चुनाव में वोट बहिष्कार किया जायेगा. ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “रोड नहीं तो वोट नहीं.” अब देखना होगा कि पांच गांवों की इस समस्या को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से कब तक ठोस पहल की जाती है..
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