Ravi Shastri Birthday: हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर खिलाड़ी और कोच रवि शास्त्री 27 मई 2026 को अपना 64वां जन्मदिन मना रहे हैं. रवि शास्त्री उन्हीं चुनिंदा चेहरों में शामिल हैं जिन्होंने खिलाड़ी, कोच और कमेंटेटर के तौर पर हिंदुस्तानीय क्रिकेट पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी है. मैदान पर उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से टीम को जीत दिलाई, जबकि बाद में कोच और कमेंट्री की दुनिया में भी एक अलग मुकाम हासिल किया.
टीम इंडिया के भरोसेमंद ऑलराउंडर रहे शास्त्री
27 मई 1962 को मुंबई में जन्मे रवि शास्त्री ने घरेलू क्रिकेट में मुंबई की ओर से स्पोर्ट्सते हुए अपनी पहचान बनाई और साल 1981 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया. दाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज शास्त्री अपने दौर के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर माने जाते थे. उन्होंने हिंदुस्तान के लिए 80 टेस्ट और 150 वनडे मुकाबले स्पोर्ट्से. टेस्ट में उनके नाम 3830 रन और 151 विकेट दर्ज हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 3108 रन और 129 विकेट हासिल किए. 1983 विश्व कप विजेता हिंदुस्तानीय टीम का हिस्सा होना भी उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा.
6 गेंदों पर 6 छक्के और सबसे तेज दोहरे शतक का रिकॉर्ड
रवि शास्त्री ने घरेलू क्रिकेट में कई यादगार रिकॉर्ड बनाए. 10 जनवरी 1985 को रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में उन्होंने एक ओवर की छह गेंदों पर लगातार छह छक्के जड़ दिए थे. इसी मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 113 मिनट में अपना दोहरा शतक भी पूरा किया था, जो लंबे समय तक एक विश्व रिकॉर्ड रहा.
शास्त्री को मिली थी ऑडी कार
साल 1985 रवि शास्त्री के करियर का सबसे यादगार दौर माना जाता है. ऑस्ट्रेलिया में स्पोर्ट्से गए ‘वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट’ टूर्नामेंट में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया था. पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 182 रन बनाए और 8 विकेट चटकाए. पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मैच में उन्होंने नाबाद 51 रन बनाए और 1 विकेट लेकर ‘मैन ऑफ द मैच’ बने, जिसके बाद उन्हें पूरे टूर्नामेंट का ‘चैंपियन ऑफ चैंपियंस’ चुना गया.
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें एक चमचमाती ‘ऑडी 100’ कार पुरस्कार में दी गई थी. उस समय मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर टीम के सभी खिलाड़ियों को कार पर बैठाकर शास्त्री द्वारा गाड़ी चलाने वाली तस्वीर काफी चर्चित हुई थी, जिसे आज भी हिंदुस्तानीय क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित तस्वीरों में गिना जाता है.
चोट की वजह से जल्दी खत्म हुआ शानदार सफर
रवि शास्त्री का अंतरराष्ट्रीय करियर और लंबा चल सकता था, लेकिन घुटने की लगातार समस्या (Knee Injury) के कारण उन्हें महज 31 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा. अपने करियर में उन्होंने हिंदुस्तान के लिए सिर्फ एक टेस्ट मैच में कप्तानी की थी.
कमेंट्री बॉक्स में गूंजी दमदार आवाज
1992 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच स्पोर्ट्सने के बाद रवि शास्त्री ने कमेंट्री की दुनिया की ओर रुख किया (हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर 1994 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लिया था). उनकी दमदार आवाज, अनोखे अंदाज और बेबाकी ने उन्हें जल्द ही दुनिया का सबसे लोकप्रिय कमेंटेटर बना दिया. 2011 विश्व कप फाइनल में महेंद्र सिंह धोनी के विजयी छक्के पर उनका मशहूर कमेंट, “Dhoni finishes off in style… a magnificent strike into the crowd!” आज भी करोड़ों हिंदुस्तानीय क्रिकेट फैंस के रोंगटे खड़े कर देता है.
कोच के तौर पर टीम इंडिया को दी ‘निडर’ सोच
रवि शास्त्री 2014 से 2016 तक हिंदुस्तानीय टीम के डायरेक्टर रहे और फिर 2017 से 2021 तक टीम इंडिया के मुख्य कोच बने. कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर उन्होंने हिंदुस्तानीय टीम को विदेशों में ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं. ऑस्ट्रेलिया की धरती पर लगातार दो टेस्ट सीरीज जीतना, टेस्ट क्रिकेट में हिंदुस्तान को लंबे समय तक दुनिया की नंबर-1 टीम बनाए रखना और खिलाड़ियों में ‘जीतने की जिद’ पैदा करना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियां हैं.
आज भी रवि शास्त्री क्रिकेट की दुनिया में अपनी बेखौफ और निष्पक्ष आवाज के लिए पहचाने जाते हैं. मैदान की 22 गज की पट्टी से लेकर हाथ में माइक थामने तक, उनका यह सफर हिंदुस्तानीय क्रिकेट के लिए हमेशा प्रेरणादायक रहेगा.
मृणाल कुमार पांडेय
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