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Mangal Pandey in Hindi: मारो फिरंगी को…कहने वाले आजादी के ‘महानायक’ मंगल पांडे, जानें क्यों दी गई थी फांसी?

Mangal Pandey in Hindi: हिंदुस्तान में क्रांति की अलख जगाने वालों में कई सेनानियों का नाम शामिल हैं. उन्हीं में से एक नाम मंगल पांडे का भी है जिन्होंने नारा दिया था मारो फिरंगी को.. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 19 जुलाई 1827 को हुआ था. बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 34वीं रेजिमेंट में सिपाही के रूप में सेवा देने वाले मंगल पांडे ‘सिपाही विद्रोह’ या ‘स्वतंत्रता के प्रथम युद्ध’ के सबसे प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे. उन्हें शहीद मंगल पांडे के नाम से भी जाना जाता है. उनकी शहादत ने क्रांति को जन्म दिया जिसने पूरे देश में लोगों की राष्ट्रवादी भावनाओं को जगा दिया और 8 अप्रैल को उनकी पुण्यतिथि होती है. इसलिए यहां आपको मंगल पांडे (Mangal Pandey in Hindi) के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है.

मंगल पांडे कौन थे? (Mangal Pandey in Hindi) 

मंगल पांडे का प्रारंभिक जीवन बहुत साधारण रहा. मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को हुआ था. हालांकि, उनके जन्मस्थान को लेकर अलग-अलग बातें कही जाती हैं. वे एक परंपरागत हिंदू ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे. उनके माता-पिता का नाम दिवाकर पांडे और अभय रानी था. बचपन से ही मंगल पांडे को सेना में जाने की इच्छा थी. 22 साल की उम्र में और 1849 में मंगल पांडे हिंदुस्तानीय सेना में भर्ती हो गए. उनकी पहली नियुक्ति बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 6वीं कंपनी में हुई थी.

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मंगल पांडे किस लिए प्रसिद्ध हैं? (Mangal Pandey Biography in Hindi)

प्रसिद्ध हिंदुस्तानी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक मंगल पांडे को ‘1857 के हिंदुस्तानीय विद्रोह’ का अग्रदूत माना जाता है. अंग्रेजों द्वारा जानवरों की चर्बी से बने कारतूसों की आपूर्ति करने के विवादास्पद निर्णय के बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू किया और उन पर हमला किया. इसके बाद उनका कोर्ट मार्शल किया गया और उन्हें फांसी दे दी गई. उन्हें उनकी बहादुरी और साहस के लिए हिंदुस्तान में एक नायक माना जाता है.

मंगल पांडे को क्यों फांसी दी गई? (Mangal Pandey in Hindi)

मंगल पांडे (Mangal Pandey in Hindi) को बैरकपुर में ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला करने और उनके खिलाफ विद्रोह करने के बाद 8 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई. 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही के रूप में सेवा करते हुए वे तब क्रोधित हो गए जब अंग्रेजों ने जानवरों की चर्बी से बने कारतूसों की आपूर्ति की, जिससे पैदल सेना के सैनिकों को ठेस पहुंची.

1857 के विद्रोह में मंगल पांडे की क्या भूमिका थी? (Mangal Pandey)

हिंदुस्तान प्रशासन ने 1984 में मंगल पांडे को सम्मान देने के लिए उनके नाम का एक डाक टिकट जारी किया था। उनके जीवन पर कई फिल्में और नाटक भी बनाए गए हैं. इसके अलावा, उनके बारे में कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं. मंगल पांडे को 1857 के हिंदुस्तानीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक माना जाता है. उन्होंने सिपाही विद्रोह का नेतृत्व किया और यह बाद में 1848 के विद्रोह में बदल गया था.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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