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क्या भारत बनेगा UNSC का स्थायी सदस्य? मुस्लिम देश ने भी जताई बड़ी सहमति

UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को लेकर हिंदुस्तान को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. दशकों से सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे हिंदुस्तान को हाल ही में उस समय प्रोत्साहन मिला जब अंतरप्रशासनी वार्ता (IGN) के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत तारिक अलबनई ने हिंदुस्तान को संभावित प्रमुख दावेदार बताया. उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा परिषद के विस्तार का निर्णय लिया जाता है, तो हिंदुस्तान निश्चित रूप से स्थायी सदस्यता पाने वालों में अग्रणी होगा.

राजदूत अलबनई ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का उद्देश्य विश्व के सभी क्षेत्रों और देशों को प्रतिनिधित्व देना होना चाहिए, न कि केवल ताकतवर और प्रभावशाली देशों को. उन्होंने हिंदुस्तान को वैश्विक मंच पर एक “बड़ा और महत्वपूर्ण” देश बताया और यह भी स्पष्ट किया कि कुवैत हिंदुस्तान के स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन करता है.

अलबनई ने इस बात का उल्लेख भी किया कि यदि सुरक्षा परिषद की सदस्य संख्या 21 से बढ़ाकर 27 की जाती है, तो हिंदुस्तान की दावेदारी सबसे मजबूत होगी. उन्होंने याद किया कि बीते वर्ष उन्होंने और ऑस्ट्रिया के सह-अध्यक्ष राजदूत अलेक्जेंडर मार्शिक ने हिंदुस्तान का दौरा कर उच्च स्तर पर सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चा की थी. उन्होंने माना कि सुधार की प्रक्रिया जटिल है, लेकिन इसमें स्थिरता के साथ सार्थक प्रगति हो रही है.

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हिंदुस्तान, ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर G4 समूह के अंतर्गत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए वर्षों से अभियान चला रहा है. हाल ही में हिंदुस्तान ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के उस सुझाव को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने मुस्लिम देश को स्थायी सदस्यता देने की मांग की थी. हिंदुस्तान का रुख स्पष्ट है कि सुरक्षा परिषद में धर्म या क्षेत्र के आधार पर नहीं, बल्कि वैश्विक प्रभाव और योगदान के आधार पर सदस्यता दी जानी चाहिए.

जहां हिंदुस्तान के समर्थन में अमेरिका, फ्रांस और रूस जैसे वर्तमान स्थायी सदस्य देश हैं, वहीं चीन हिंदुस्तान की दावेदारी का विरोध करता आ रहा है. चीन को आशंका है कि यदि हिंदुस्तान को स्थायी सदस्यता मिलती है तो एशिया में उसका वर्चस्व कमजोर पड़ सकता है. दूसरी ओर पाकिस्तान भी सुरक्षा परिषद में विस्तार का विरोध कर रहा है ताकि हिंदुस्तान की सदस्यता की राह में अड़चन बनी रहे. फिलहाल हिंदुस्तान के लिए यह समाचार एक कूटनीतिक बढ़त है और यह संकेत देती है कि यदि वैश्विक सहमति बनती है तो हिंदुस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने के बेहद करीब हो सकता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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