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International Plastic Bag Free Day: पुराने पर्दे और टी-शर्ट से बनाएं नया इको-बैग, स्टाइलिश के साथ टिकाऊ भी

International Plastic Bag Free Day: आज देश समेत पूरी दुनिया में प्लास्टिक फ्री एनवायरमेंट के लिए मुहिम चलता रहता है. प्लास्टिक बैग के उपयोग को कम करने और इससे होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता फैलने के लिए हर साल 3 जुलाई को इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे मनाया जाता है. ऐसे में इस खास दिन के मौके पर सिर्फ प्लास्टिक को ‘ना’ कहना ही काफी नहीं, बल्कि उसके लिए टिकाऊ और खूबसूरत विकल्प ढूंढना भी जरूरी है. आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपने पुराने कपड़े और यहां तक कि पुराने पर्दों से भी घर पर रीयूजेबल बैग बना सकते हैं, जो न सिर्फ आपकी खरीदारी में काम आएंगे, बल्कि इको-फ्रेंडली गिफ्ट पैकिंग के लिए भी शानदार विकल्प बन सकते हैं.

पुरानी साड़ी या दुपट्टे से बनाएं स्टाइलिश फोल्डेबल बैग

वैसी पुरानी कॉटन साड़ियां या दुपट्टे जिसका इस्तेमाल अब आप नहीं कर रहे हैं, उसका आप बेहद खूबसूरत फोल्डेबल बैग बना सकते हैं. इसके लिए आपको साड़ी के एक सॉफ्ट हिस्से को 18×18 इंच में काटना होगा. फिर उसे सिलकर दोनों तरफ से हैंडल जोड़ लें. आप चाहें तो ऊपर से ड्रॉस्ट्रिंग लगाकर उसे पाउच में भी बदल सकते हैं.

पुरानी टी-शर्ट को बनाएं रीयूजेबल ग्रॉसरी बैग

पुरानी टी-शर्ट जो अब पहनने लायक नहीं, वो आपके ग्रॉसरी शॉपिंग के लिए बैग बन सकता है. इसके लिए बस आपको टी-शर्ट की स्लीव्स काटना होगा और इसके बाद नेकलाइन को चौड़ा करना होगा. फिर नीचे से उसे अंदर की ओर मोड़कर उसकी सिलाई कर लें या फिर गांठ बांध लें. बस आपका बैग तैयार है.

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गिफ्ट पैकिंग के लिए फुरोशिकी स्टाइल

जापानी फुरोशिकी तकनीक कपड़े से गिफ्ट रैपिंग करने की एक कला है. इसके लिए बस आपको स्क्वायर कपड़े को गिफ्ट के चारों ओर लपेटना होगा फिर कोनों को ऊपर लाकर सुंदर गांठ बांध लें. यह गिफ्ट रिसीवर के लिए भी एक अतिरिक्त तोहफा हो सकता है.

जूट या कैनवास बैग्स को पर्सनलाइज करें

यदि आपके पास जूट या कैनवास बैग्स हैं, तो उनमें पेंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग या हैंड एम्ब्रॉयडरी करके उन्हें नया लुक दे सकते हैं. बहुत सारे दुकानों में तो ये काम अब महज कुछ रुपयों में होने लगा है. ये बैग्स इतने मजबूत होते कि इसे आप वर्षों तक चला सकते हैं. गिफ्ट बैग के तौर पर इसका दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

क्यों जरूरी है ये बदलाव?

  • हर साल हिंदुस्तान में करोड़ों टन प्लास्टिक बैग का उपयोग होता है, जिनमें से ज्यादातर नदियों में पहुंचते हैं, जिससे न सिर्फ जलीय प्रदूषण बढ़ता है बल्कि जलीय जीवों के लिए भी खतरनाक है. इसके अलावा प्लास्टिक नदियों के बहाव को रोकता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.
  • रीयूजेबल बैग्स से न सिर्फ प्लास्टिक वेस्ट घटता है, बल्कि फैशन और पर्यावरण दोनों का संतुलन भी बना रहता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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