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Ajit Pawar : कांग्रेस के साथ सरकार बनाने से NCP के बंटवारे तक चाचा–भतीजा रहे आमने–सामने, लेकिन प्यार नहीं हुआ कम

Ajit Pawar news : अजित पवार और शरद पवार दोनों ही हिंदुस्तानीय नेतृत्व के दिग्गज नेता हैं और इन दोनों की ही खासियत यह है कि इन्होंने अपने बूते अपनी जगह बनाई. अजित पवार, शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं, इस लिहाज से इन दोनों का पारिवारिक रिश्ता है, जो चाचा–भतीजे का है. अजित पवार ने जब करियर की शुरुआत की, तो शरद पवार उनके गुरु बने, लेकिन धीरे–धीरे नेतृत्व के मैदान में अजित पवार ने गुरु को पीछे कर दिया.

शुरुआत में मधुर था शरद पवार और अजित पवार का रिश्ता

नेतृत्व के मैदान में अजित पवार ने जब एंट्री की, उसक वक्त शरद पवार अपनी जगह बना चुके थे. इस वजह से शरद पवार ने एक तरह से अजित पवार को संवारने का काम किया. उन्होंने अपने भतीजे को पार्टी की जिम्मेदारियां सौंपी, ताकि उनका व्यक्तित्व निखरे. गौर करने वाली बात यह है कि अजित पवार सिर्फ पिछलग्गू नेता नहीं बने, बल्कि उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम किया और अपनी पहचान बनाई. अजित के कद से शरद पवार को परेशानी भी नहीं थी, दिक्कत तब हुई जब अजित ने शरद पवार से अलग रास्ता चुना.

पार्टी में बढ़ी उत्तराधिकार की जंग

अजित पवार और शरद पवार के बीच पारिवारिक रिश्ते तो हमेशा ही अच्छे रहे, लेकिन नेतृत्व में विरोध शुरू हो गया. अजित पवार को शरद पवार के कई फैसले पसंद नहीं थे, उनमें से एक था 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में प्रशासन बनाना . कारण यह था कि 2004 के चुनाव में एनसीपी बड़ी पार्टी थी और कांग्रेस को उससे कम सीटें मिली थीं. शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और रोहित पवार की नेतृत्व में एंट्री से पवार परिवार में उत्तराधिकार की जंग बढ़ी. इस वजह से भी अजित पवार ने अपने लिए अलग रास्ता चुना. रोहित पवार अजित पवार के भतीजे हैं और शरद पवार के बड़े भाई के पोते हैं. इस वजह से भी पार्टी में उनकी पैठ है और वे मजबूती के साथ शरद पवार के साथ खड़े हैं.

2023 में अजित पवार ने शरद पवार को दिया बड़ा झटका

ajit-pawar
अजित पवार

2023 में अजित पवार ने एनसीपी के 41 विधायकों के साथ अपना अलग रास्ता चुना और बीजेपी के साथ प्रशासन बनाई. अजित पवार के इस कदम से परिवार में दूरियां बढ़ी और असली एनसीपी का मसला कोर्ट तक पहुंचा. उससे पहले नवंबर 2019 में, अजित पवार ने अपना सबसे अप्रत्याशित कदम उठाया था, जब उन्होंने पार्टी से अलग होकर बीजेपी के साथ प्रशासन बना ली थी. सुबह-सुबह एकदम चौंकाने वाले अंदाज में देवेंद्र फडणवीस ने सीएम और अजित पवार ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली थी. अजित पवार के इन फैसलों से पार्टी दो गुट में बंट गई.

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पार्टी भले ही बंटी हो परिवार नहीं बिखरा

अजित पवार के फैसले से एनसीपी को बड़ा झटका लगा और पार्टी दो फाड़ हो गई, लेकिन अगर परिवार की बात करें, तो वह पूरी तरह एकजुट रहा. 2023 के बंटवारे के बाद भी अजित पवार और शरद पवार कई बार साथ में दिखे और अजित की मां आशा ताई ने तो खुले तौर पर परिवार की एकजुटता की बात भी कही थी. अजित पवार की दुर्घटना में मौत के बाद भी पूरा परिवार जिस तरह से एकजुट है, वह यह साबित करता है कि नेतृत्वक विरोध होने के बावजूद भी पवार परिवार एकजुट है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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