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27 हजार टोटो मालिकों को मिले गाड़ियों के नंबर

श्रीकांत शर्मा, हावड़ा

‘टोटो’ चालकों को कानून के दायरे में लाने के लिए पिछले वर्ष 13 अक्तूबर को राज्य में शुरू हुई टोटो पंजीकरण प्रक्रिया 31 जनवरी को समाप्त होने वाली है. जिले में अब तक 27 हजार से ज्यादा टोटो चालकों ने पंजीकरण करा लिया है उक्त जानकारी हावड़ा जिला के आरटीओ मानस हाल्दार ने दी. जिले में चल रहे टोटो पंजीकरण की पुरी जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जिले में पंजीकरण प्रक्रिया काफी सफल रही है. जिले में लगभग 30 हजार टोटो चल रहे थे जिनमें से हावड़ा नगर निगम इलाके में अब तक 18141 टोटो चालकों को अस्थायी टोटो नामांकन नंबर दिया जा चुका है. ग्रामीण हावड़ा की बात करें तो 8859 टोटो चालकों को अस्थायी टोटो पंजीकरण नंबर दिया गया है.

उन्होंने बताया कि हावड़ा नगर निगम एरिया के साथ ही उलबेड़िया सब डिविजन में टोटो का पंजीकरण प्रक्रिया चल रही है. यह प्रक्रिया ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से चल रही है. कोई भी टोटो चालक अपने मोबाइल फोन से परिवहन विभाग के पंजीकरण पोर्टल टीटीइएफ पोर्टल पर जाकर अपने टोटो का पंजीकरण करवा सकता है. साइबर कैफे या फिर जिले मुख्यालय स्थित आरटीओ कार्यालय में भी आकर पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है. श्री हालदार कहते हैं कि इसके लिए टोटो चालकों को आधार कार्ड जो मोबाइल नंबर से जुड़ा हो, लेकर आना होगा. पूरी पंजीकरण प्रक्रिया के लिए टोटो चालकों को 1645 रुपये ऑनलाइन माध्यम से पे करना होगा.

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 13 अक्तूबर को टोटो पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसकी अंतिम तिथि दिसंबर थी लेकिन टोटो चालकों की मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी गयी थी. श्री हालदार कहते हैं कि जिले में 30 हजार के लगभग टोटो चालक थे जिसमें से 27 हजार ने अपना पंजीकरण करवा लिया है. उन्हें उम्मीद है कि बाकी बचे टोटो चालक भी अपना पंजीकरण करा लेंगे. टोटो रजिस्ट्रेशन कराना भविष्य के लिए लाभप्रद है.

श्री हालदार बताते हैं कि टोटो चालकों को जारी किये गये रजिस्ट्रेशन नंबर में एरिया की पहचान दर्ज है. रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ एक क्यूआर पहचान कोड स्टिकर जारी किया गया है जो पंजीकृत टोटो चालक को अपने टोटो के आगे चिपकाना होगा. इस कोड में टोटो चालक की पूरी पहचान दर्ज है. ट्रैफिक पुलिस अधिकारी इसे स्कैन करके टोटो चालक की पूरी जानकारी तुरंत निकाल सकते हैं.

टोटो लास्ट माइल कनेक्टिविटी है, जो गली-मोहल्लों में चलने के लिए बना है. इसका परिचालन हाइवे पर नहीं किया जा सकता है. ऐसा करने पर जुर्माना किया जा सकता है.

परिवहन विभाग के एक अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता और उसके आसपास चलने वाले अधिकांश ई-रिक्शा पंजीकृत नहीं हैं, जिन्हें गुपचुप तरीके से गैरेजों में बनाया गया है और इसलिए उन्हें कानूनी रूप से चलने की अनुमति नहीं है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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