Pawanraje Nimbalkar Murder Case: महाराष्ट्र की नेतृत्व के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने एनसीपी नेता पद्मसिंह सहित 9 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. अदालत ने यह फैसला 20 जून 2026 को सुनाया.
कौन थे पवनराजे निंबालकर, जिनकी हत्या से कांप उठा था महाराष्ट्र
पवनराजे निंबालकर महाराष्ट्र के उस्मानाबाद (धाराशिव) क्षेत्र के प्रभावशाली नेता थे. उनका अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव था. उनका परिवार नेतृत्वक पृष्ठभूमि का था, जिनका अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव था. पद्मसिंह पाटिल का क्षेत्र भी उस्मानाबाद ही था. पवनराजे निंबालकर उनके कजिन थे. पवनराजे निंबालकर शुरुआत में पद्मसिंह पाटिल के काफी करीबी माने जाते थे. बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ और दोनों अलग-अलग हो गए. उस्मानाबाद क्षेत्र में इन दोनों परिवारों की प्रतिद्वंद्विता प्रसिद्ध है.
पवनराजे निंबालकर के साथ 3 जून 2006 को क्या हुआ था?
पवनराजे निंबालकर 3 जून 2006 की रात अपने ड्राइवर समद काजी के साथ कार से यात्रा कर रहे थे. नवी मुंबई के पास उनकी कार पर हमला हुआ. हमलावर बाइक और कार पर सवार थे. हमला इतना भयंकर था कि पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर दोनों की ही मौके पर मौत हो गई. इस हत्या को कॉन्ट्रैक्ट किलिंग यानी सुपारी देकर कराई गई हत्या माना गया था.
सीबीआई ने की हत्या के मामले की जांच
पवनराजे निंबालकर की हत्या के बाद केस की जांच महाराष्ट्र पुलिस ने की, लेकिन यह केस इतना चर्चित था और कई तरह के आरोप लग रहे थे, इसलिए प्रशासन ने जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी. सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसे सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या माना और इसे नेतृत्वक प्रतिस्पर्धा का परिणाम बताया था. इस मामले में सीबीआई ने 2009 में लगभग 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. एजेंसी ने पद्मसिंह पाटिल को हत्या का सूत्रधार बताया था, जिन्होंने नेतृत्वक प्रतिस्पर्धा की वजह से पवनराजे निंबालकर की हत्या करवाई. हत्या के लिए 30 लाख रुपए सुपारी देने की बात भी कही गई थी. सीबीआई ने पद्मसिंह पाटिल सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें शूटर और हत्या की योजना को अंजाम देने वाले लोग शामिल थे. एजेंसी ने 181 गवाहों के बयान और 200 से अधिक दस्तावेजों का हवाला दिया था.
पवनराजे निंबालकर केस का महत्व इतना अधिक क्यों?
पवनराजे निंबालकर महाराष्ट्र की नेतृत्व के उभरते हुए नेता थे, जबकि उनकी हत्या के आरोपी पद्मसिंह पाटिल उस क्षेत्र के जाने-माने नेतृत्वज्ञ थे. उनकी नेतृत्वक प्रतिस्पर्धा की खूब चर्चा भी होती थी, इसी वजह से इस हत्याकांड का बहुत महत्व था. पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र में मंत्री और सांसद भी रहे थे. 2019 में उन्होंने एनसीपी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. अब वे नेतृत्वक रूप से उतने सक्रिय नहीं हैं और उनके बेटे राणा जगजीत सिन्हा पाटिल उस्मानाबाद से विधायक है.
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