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खरमास और पंचक के पेंच में फंसा चैत्र नवरात्र की घटस्थापना? ज्योतिषाचार्य से जानिए पूजा की सही विधि और समय

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र 19 मार्च 2026 से आरंभ हो रहा है. महावीर पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार को सुबह 6 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 मार्च 2026 दिन शुक्रवार की सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए उदयातिथि के आधार पर 19 मार्च को ही प्रतिपदा तिथि मानी जाएगी और घटस्थापना (कलश स्थापना) होगी. इस वर्ष नवरात्र की शुरुआत कुछ विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच हो रही है. ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि इस समय खरमास और पंचक का अशुभ योग बना रहेगा. आमतौर पर इन स्थितियों में शुभ और मांगलिक कार्यों को लेकर लोगों के मन में संदेह रहता है, लेकिन शास्त्रों और विद्वानों के मत के अनुसार मां दुर्गा की पूजा, साधना और घट स्थापना पर इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.

खरमास और पंचक के बीच होगी घटस्थापना

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने कहा कि खरमास और पंचक के कारण भले ही विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में बाधा की आशंका मानी जाती हो, लेकिन देवी आराधना इन दोषों से मुक्त मानी गई है. इसलिए 19 मार्च को नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना बिना किसी बाधा के विधि-विधान से की जा सकेगी. हालांकि इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन डोली पर हो रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार डोली पर आगमन समाज में अस्थिरता, भय और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का संकेत देता है. ऐसे समय में संयम और धैर्य के साथ जीवन में आगे बढ़ना आवश्यक होता है. श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मां दुर्गा की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और आने वाली परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है

घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि पूजा की सफलता के लिए सही समय का चुनाव करना बहुत जरूरी है. 19 मार्च 2026 को घटस्थापना के लिए 2 विशेष मुहूर्त मिल रहे हैं.

प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह प्रातः 05 बजकर 55 मिनट से सुबह प्रात: 07 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे उपयुक्त है. इस समय पूजा शुरू करना घर में बरकत लेकर आता है.
अभिजीत मुहूर्त: यदि आप सुबह पूजा नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर 11 बजकर 33 से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट के बीच कलश स्थापित कर सकते हैं.

घटस्थापना की सही विधि

  • प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र पहनें.
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें.
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ.
  • उस पर मिट्टी का कलश रखें और उसमें जल भरें.
  • कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें.
  • कलश पर मौली बांधें और स्वस्तिक बनाएं.
  • माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए संकल्प लें.
  • दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें.

14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक

भले ही नवरात्र में घटस्थापना और देवी पूजन वर्जित नहीं है, लेकिन अन्य बड़े मांगलिक कार्यों पर 14 अप्रैल 2026 तक रोक रहेगी. खरमास के कारण विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य इस दौरान नहीं किए जा सकेंगे. यह समय नई शुरुआत के बजाय आत्म-चिंतन और भक्ति के लिए अधिक उत्तम है. यदि आप पिता की संपत्ति से जुड़ा कोई बड़ा सौदा या नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो 14 अप्रैल के बाद का समय अधिक अनुकूल होने की संभावना है, संयम के साथ इस समय का सदुपयोग करना ही समझदारी है.

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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