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नेतरहाट विद्यालय में अब बेटियां भी रचेंगी इतिहास! नई नियमावली लागू, छात्राओं के लिए 33% सीटें फिक्स

Netarhat School Jharkhand, लातेहार: झारखंड प्रशासन ने नेतरहाट आवासीय विद्यालय की पुरानी कार्यप्रणाली में परिवर्तन करते हुए नई “विद्यालय प्रबंधन और संचालन नियमावली, 2026” को लागू कर दिया है. इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी नया विचार ने पहले ही अपने पाठकों को दे दी थी, जिस पर आज आधिकारिक मुहर लग गई है. नई नियमावली के तहत अब पहली बार विद्यालय में छात्राओं को भी प्रवेश मिलेगा, जिनके लिए कुल सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है.

सीटों में भारी बढ़ोतरी का लक्ष्य

प्रशासन ने विद्यालय की क्षमता विस्तार के लिए एक समयसीमा तय की है. इसके तहत लक्ष्य रखा गया है कि अगले तीन वर्षों में विद्यालय की कुल सीटों को दोगुना और पांच वर्षों में इसे तिगुना कर दिया जाए. इससे पहले आखिरी बार वर्ष 1982 में सीटों में वृद्धि की गई थी.

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परीक्षा की जिम्मेदारी JAC और नियुक्तियां JPSC के पास

प्रवेश प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए अब परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) को सौंपी गई है. सत्र 2026-27 से जैक दो चरणों (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) में वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रश्न पूछेगा. वहीं, शिक्षकों और कर्मियों की स्थायी नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से की जाएगी ताकि योग्य शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके.

चार स्तरीय सुदृढ़ प्रबंधन ढांचा

विद्यालय के गिरते शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए चार स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है. इसके अनुसार एपेक्स बॉडी का गठन होगा. इसमें मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नीतिगत फैसले लिए जाएंगे. इसके अलावा सामान्य निकाय का भी गठन होगा. इसमें गठित टीम शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करेगी. साथ ही साथ कार्यकारिणी समिति का भी गठन किया जाएगा. इसकी कमान 10 वर्ष के अनुभवी पूर्व छात्र (Alumni) के पास होगी, जिनका चयन ऑनलाइन आवेदन के जरिए होगा. एक टीम विद्यालय प्रबंधन समिति की होगी जो प्राचार्य की अध्यक्षता में रोजमर्रा के कार्यों का संचालन करेगी.

क्यों अनिवार्य था बदलाव?

जानकारी के मुताबिक विद्यालय के बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धि में लगातार आ रही गिरावट, शिक्षकों के रिक्त पद (लगभग 50% से अधिक), और योग्य संविदा शिक्षकों की कमी के कारण यह सख्त कदम उठाना पड़ा. सीबीएसई (CBSE) के अनुरूप प्रबंध समिति का अभाव और मेधावी छात्रों का स्कूल के प्रति घटता आकर्षण भी चिंता का विषय था. चूंकि, शैक्षणिक सत्र 2025-26 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए यह नई व्यवस्था सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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