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रांची: शादियों की खुशियों पर ‘सिलेंडर का ग्रहण’! गैस की किल्लत से अब कोयला और इंडक्शन चूल्हा ही सहारा

Ranchi LPG Crisis, रांची (नया विचार टीम की रिपोर्ट): शादी का सीजन शुरु होने वाला है. 14 अप्रैल को खरमास खत्म होगा और 16 अप्रैल से शादियों का सिलसिला शुरु होगा. जिनके घरों में शादियां हैं, वे उत्साह से हर तैयारी कर रहे हैं. लेकिन, इन सबके बीच शादियों की खुशी में सिलेंडर का ग्रहण लग गया है. मेहमानों का खाना कैसे तैयार होगा, इसे लेकर रांची शहर के शादी वाले घरों के लोग परेशान हैं. सिलेंडर की कमी ने शादी वाले परिवारों और कैटरर्स दोनों की चिंता बढ़ा दी है. जबकि, कैटरर्स का बजट बढ़ गया है. लोग एजेंसियों का चक्कर लगा रहे हैं.

प्रशासन के आदेश पर गैस कंपनियों देगी कॉमर्शियल सिलेंडर

इधर, शादियों वाले घरों में कॉमर्शियल सिलेंडर तभी मिल पायेगा, जब प्रशासन की ओर से गैस कंपनियों को पत्र मिलेगा. पत्र के आधार पर गैस कंपनियां संबंधित क्षेत्र के गैस एजेंसी को आदेश देगी. इसी पत्र के आधार पर जरुरत के अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराया जायेगा. अस्पताल और संस्थानों और होटलों के नियमित ग्राहकों को कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है.

कैटरर्स के बजट पर असर

कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि शादी-ब्याह के सीजन में गैस सिलेंडर की खपत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से खाना बनाने की व्यवस्था बाधित हो सकती है. इसलिए विकल्प के तौर पर कोयला चूल्हा, इलेक्ट्रिक कढ़ाई सहित आदि की व्यवस्था कैटरर्स कर रहे है. कई कैटरर्स को मजबूरन बाजार से महंगे दर पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है. इसका सीधा असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कैटरिंग के दाम बढ़ने की संभावना है.

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शादी घर में बढ़ी परेशानी

मेरी बेटी की शादी 17 अप्रैल को है. शादी की तैयारियां तो चल रही है लेकिन दूसरी तरफ गैस सिलेंडर को लेकर चिंता बनी है. क्योंकि शादी घर में रोजाना मेहमानों के खाने की व्यवस्था से लेकर पार्टी के लिए व्यवस्था करना है. पहले तो एक दूसरे से मांग कर शादी घर में सिलेंडर का काम हो जाता था लेकिन अब तो काफी दिक्कत हो गयी है. कैटरर्स भी अपना बजट बढ़ा रहे है, जिसके कारण हमारा भी बजट बढ़ेगा.

सरिता मिश्रा, सिंह मोड़

मेरे देवर की शादी 20 अप्रैल को है. शादी को लेकर खरीदारी व तैयारियों से ज्यादा चिंता खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर है. क्योंकि सिलेंडर की मारामारी शादी घर की चिंता बढ़ा दी है. एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे है. कुक कोयला चूल्हा के अलावा चार सिलेंडर की मांग कर रहा है. घर के मेहमानों के लिए भी दो सिलेंडर चाहिए. सभी को गैस की दिक्कत है तो कोई देना नहीं चाह रहा है. अभी तक एक भी सिलेंडर की व्यवस्था नहीं हो पायी है.

संगीता हिंदुस्तानी, चुटिया

कैटरर्स की भी बढ़ी परेशानी

अप्रैल की शादी के लिए जनवरी में ही बुकिंग हो गयी है. इस बुकिंग को कैंसिल किया नहीं जा सकता. इसलिए इलेक्ट्रिक चूल्हा, इलेक्ट्रिक कढ़ाई जैसे सामान विकल्प के तौर पर मंगा कर रखें है. गैस सिलेंडर की परेशानी कस्टमर खुद गैस की परेशानी झेल रहे है. गैस सिलेंडर की दिक्कत से कैटरर्स पर 25-30 फीसदी का अतिरिक्त खर्च हो रहा है. हर तरीके से कैटरर को नुकसान है. नया काम को अभी लेना बंद कर दिये है.

कमल अग्रवाल, कमल कैटरर्स

गैस की परेशानी से बजट काफी बढ़ गया है. लेकिन पहले से बुकिंग लिया हुआ है, उसे पूरा करने के लिए पांच कोयला चूल्हा मंगाये है. मेन्यू को लिमिटेड कर दिये है. किसी कैटरर्स ने काम को 600 रुपया में बुक किया है और उसकी आज की परिस्थिति में लागत 700 रुपया आ रही है तो काम करना उनकी मजबूरी है. बाज़ार में स्थिति संघर्षपूर्ण बनी हुई है फिर भी अपने झारखंड के ग्राहक इस समस्या से के विपरीत अपने मेनू में कोई चेंज नही करना चाहता है.

राहुल कुमार कश्यप, शुभ पार्टी ऑर्गनाइजर

गैस किल्लत में ‘कोयला-इलेक्ट्रिक’ सहारा

शहर में जारी गैस किल्लत ने शादी-ब्याह के आयोजनों की रसोई व्यवस्था का पूरा ढांचा बदल दिया है. बैंक्वेट हॉल पहले से ही बुकिंग है. लेकिन एलपीजी की अनियमित आपूर्ति के कारण अब खाना बनाने के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. हॉल संचालक पारंपरिक गैस चूल्हों पर निर्भर रहने के बजाय कोयला और इलेक्ट्रिक चूल्हों की तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, ज्यादातर बैंक्वेट हॉल कुकिंग की सुविधा नहीं है.

खुद से करनी पड़ रही है कैटरर की व्यवस्था

पार्टी को खुद से कैटरर की व्यवस्था करनी है. वहीं, जिनके पास कैटरर उपलब्ध नहीं है, उनके लिए हॉल प्रबंधन कैटरर उपलब्ध करा रहा है. यही नहीं, कुछ बैंक्वेट हॉल में कोयला और इलेक्ट्रिक चूल्हे बैकअप नहीं, बल्कि मुख्य विकल्प बनते जा रहे हैं. बैंक्वेट के कर्मियों का कहना है कि गैस की किल्लत ने उन्हें यह नयी व्यवस्था अपनाने पर मजबूर किया है. शादी के इस सीजन में गैस संकट ने व्यवस्थाओं का पूरा गणित बदल दिया है. फिलहाल, गैस संकट के दौर में यही जुगाड़ व्यवस्था सहारा बनी हुई है. नया विचार ने इस मसले पर राजधानी के बैंक्वेट हॉल संचालकों व कर्मियों से बात की.

इलेक्ट्रिक चूल्हा और कोयले का जुगाड़ रखना होगा

शादी-ब्याह के सीजन में गैस सिलिंडर की किल्लत ने सुविधा बैंक्वेट जैसे आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है. बैंक्वेट के मैनेजर मणिकांत कुमार सिंह ने कहा कि 20 अप्रैल के बाद से शादी की बुकिंग है, लेकिन बाजार में कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं. इस समस्या से निपटने के लिए अब वैकल्पिक इंतजामों पर जोर दिया जा रहा है. वे कहते हैं कि गैस की कमी को पूरा करने के लिए बड़े इलेक्ट्रिक इंडक्शन और कोयले का भी जुगाड़ रखना होगा. मैनेजर का कहना है कि हॉल और कैटरिंग दोनों की जिम्मेदारी होने के कारण वे मेहमानों की सेवा में कोई कमी नहीं आने देना चाहते, इसलिए अब बैकअप प्लान ही एकमात्र रास्ता बचा है.

मान्या पैलेस: बुकिंग फुल, कैटरिंग की जिम्मेदारी पार्टियों पर

शादियों के आगामी सीजन को लेकर मान्या पैलेस में तैयारियां जोरों पर हैं. पैलेस के कर्मचारी प्रसाद ने कहा कि 19, 20, 21 और 28 अप्रैल के लिए शादियों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है. यहां कैटरिंग उपलब्ध नहीं कराया जाता है. यहां मुख्य रूप से केवल बैंक्वेट हॉल उपलब्ध कराया जाता है. खान-पान की व्यवस्था आमतौर पर पार्टी को खुद संभालनी होती है. यदि किसी पार्टी के पास अपना कैटरर नहीं है, तो संस्थान की ओर से उन्हें कैटरर उपलब्ध कराने में मदद की जाती है.

केवल हॉल की बुकिंग, खान-पान का जिम्मा आयोजकों का

शादी-विवाह के व्यस्त सीजन के बीच अभिवादन बैंक्वेट ने अपनी बुकिंग सेवाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. संस्थान के ऑनर शिवराज ने बताया कि बैंक्वेट की ओर से कैटरिंग की सीधी सुविधा प्रदान नहीं की जाती है. शिवराज कहते हैं कि संस्थान मुख्य रूप से केवल बैंक्वेट हॉल भाड़े पर उपलब्ध कराता है. कार्यक्रम के लिए कैटरर का चयन और भोजन का प्रबंध पार्टी को खुद करना होता है. यदि पार्टी को आवश्यकता हो, तो संस्थान अनुभवी कैटरर्स के संपर्क नंबर साझा कर देता है, ताकि वे अपनी पसंद और बजट के अनुसार बात कर सकें.

धर्मशालाओं में तैयार किया गया कोयला चूल्हा

गैस की समस्या को देखते हुए रांची के विभिन्न धर्मशालाओं में कोयला चूल्हा तैयार किया जा रहा है. मारवाड़ी ब्राह्मण भवन में तीन कोयला चूल्हा बनाया गया है. मारवाड़ी ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष अशोक पुरोहित ने बताया कि गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. 20 अप्रैल से लगातार शादी समोरह हैं. ऐसे में विकल्प के तौर पर कोयला चूल्हा बनाया गया है. वहीं, हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन में भी पांच कोयला चूल्हा बनाया गया है. यहां भी इस माह चार से पांच शादी समारोह होने वाले हैं. शादी समारोह प्रभावित न हो, इसके लिए कोयला चूल्हा बनाया जा रहा है.

गैस सिलेंडर के लिए प्रशासन से गुहार, प्रशासन आदेश का कर रहा इंतजार

शादी समारोह में गैस सिलेंडर की किल्लत ने 25 परिवारों की परेशानी बढ़ा दी है. समारोह में खाने की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसको लेकर परिवार चिंतित है. इन परिवारों ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है. उनका कहना है कि समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हुआ तो मेहमानों के भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो जायेगा. परिवारों ने प्रशासन से अतिरिक्त सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग की है. इधर, जिला आपूर्ति पदाधिकारी रामगोपाल पांडेय ने बताया कि शादी समारोह में तीन गैस सिलिंडर देने की बात सामने आयी है, लेकिन कोई आधिकारिक सूचना अभी तक लिखित रूप में नहीं मिला है. आदेश की कॉपी आते ही आवेदकों को सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जायेगा. शादी समारोह के लिए अब तक लगभग 25 आवेदन आये हैं.

पड़ोसी राज्य बिहार ने व्यवस्था की

घरेलू गैस सिलेंडर की लगातार कमी के बीच बिहार प्रशासन ने शादी-विवाह जैसे आयोजनों के लिए कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की विशेष व्यवस्था करने का फैसला लिया है. अब वैवाहिक कार्यक्रमों में उपयोग के लिए कॉमर्शियल गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए संबंधित एसडीओ कार्यालय में आवेदन करना होगा. उसके बाद समीक्षा की जायेगी और एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जायेगा. विशेष सचिव उपेंद्र कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और तेल कंपनियों के महाप्रबंधकों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिये हैं. नये नियम के तहत आवेदक को शादी का कार्ड, कार्यक्रम में शामिल होने वाले मेहमानों की अनुमानित संख्या और आवश्यक सिलेंडरों की संख्या के साथ एसडीओ कार्यालय में आवेदन करना होगा. आवेदन की समीक्षा के बाद एसडीओ की ओर से सात दिनों के अंदर संबंधित गैस एजेंसी को एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति के निर्देश जारी किये जायेंगे.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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