US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण जंग को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान आया है. फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब लगभग खत्म होने की कगार पर है, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अमेरिकी सेना का काम अभी पूरा नहीं हुआ है. ट्रंप ने कहा कि अगर वो अभी पीछे हट जाते हैं, तो ईरान को दोबारा खड़े होने में 20 साल लग जाएंगे. उनका मानना है कि तेहरान (ईरान की राजधानी) अब बहुत जल्द समझौता करना चाहता है.
न्यूक्लियर हथियारों को खत्म करने के लिए किए हमले
राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स बिजनेस से बातचीत में ईरान पर सीधे सैन्य हमले के फैसले को सही ठहराया. ट्रंप ने कहा कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकने के लिए यह कदम उठाना बहुत जरूरी था. उन्होंने कहा कि अगर ईरान के पास न्यूक्लियर बम होता, तो पूरी दुनिया के लिए खतरा पैदा हो जाता.
NEW: Trump says the war with Iran is “close to over” pic.twitter.com/FF54F9mBdr
— Resist Wire (@ResistWire) April 15, 2026
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए थे और ईरान के ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था.
पाकिस्तान में हो सकती है दूसरे दौर की बातचीत
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत पर विचार कर रहा है. इसके लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को चुना जा सकता है. इस बातचीत की भी कमान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभाल सकते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप के खास सलाहकार स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं. हालांकि, अभी तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में कुछ बड़ा हो सकता है.
समुद्र में अमेरिका की घेराबंदी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को एलान किया कि उन्होंने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह से नाकेबंदी कर दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) और आसपास के समुद्री रास्तों पर अब अमेरिकी सेना का कब्जा है. एडमिरल ब्रैड कूपर के बयान के मुताबिक, नाकेबंदी शुरू होने के महज 36 घंटों के भीतर ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप कर दिया गया है. चूंकि ईरान की 90% वित्तीय स्थिति समुद्री व्यापार पर टिकी है, इसलिए यह उसके लिए बड़ा झटका है.
Statement from Adm. Brad Cooper, CENTCOM commander: pic.twitter.com/dJxKJcEcmO
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10 हजार जवान और युद्धपोतों का पहरा
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि इस मिशन में 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, दर्जनों युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात हैं. अमेरिकी नेवी के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर हर आने-जाने वाले जहाज पर नजर रख रहे हैं. यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) अमेरिकी रक्षा विभाग का एक प्रमुख सैन्य कमांड है, जो मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया), मध्य और दक्षिण एशिया के देशों में अमेरिकी सैन्य अभियानों और सुरक्षा हितों की जिम्मेदारी संभालता है.
शुरुआती 24 घंटों में किसी भी जहाज ने इस घेराबंदी को तोड़ने की हिम्मत नहीं की, जबकि 6 व्यापारिक जहाजों को अमेरिकी सेना ने वापस लौटने पर मजबूर कर दिया. अमेरिका ने साफ किया है कि यह पाबंदी सिर्फ ईरानी बंदरगाहों के लिए है, अन्य देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की आजादी रहेगी.
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