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शुभेंदु अधिकारी का ‘हिंदुत्व’ अवतार : श्रीखोल बजाकर संकीर्तन और 500 किमी का सफर, 35 साल तक नहीं देखी फिल्म

खास बातें

Suvendu Adhikari ‍Biography: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में पिछले 5 वर्षों में अगर कोई चेहरा ‘कट्टर हिंदुत्व’ का सबसे बड़ा पोस्टर ब्वॉय बनकर उभरा है, तो वह हैं शुभेंदु अधिकारी. कभी तृणमूल कांग्रेस के संकटमोचक रहे शुभेंदु आज बीजेपी के सबसे मारक हथियार हैं. नेतृत्वक गलियारों में भले ही उनके तीखे भाषणों की गूंज हो, लेकिन उनकी निजी जिंदगी अनुशासन, धार्मिक संस्कारों और एक अजीबोगरीब ‘सिनेमाई परहेज’ से भरी है. 55 साल के शुभेंदु के लिए नेतृत्व कोई पेशा नहीं, एक ‘चरैवेति’ (निरंतर चलते रहना) का संकल्प है.

ममता बनर्जी से अमित शाह तक : अब नहीं बदलेंगे ‘गुरु’

  • गुरु दीक्षा : एक समय था, जब ममता बनर्जी उनकी ‘नेतृत्वक गुरु’ हुआ करती थीं. वर्ष 2019 के बाद उनकी निष्ठा बदली और अब वह अमित शाह को अपना मार्गदर्शक मानते हैं. शुभेंदु का दावा है कि अब वह जीवन भर अपना ‘गुरु’ नहीं बदलेंगे.
  • आदर्श नायक : वह सतीश सामंत और सुशील धाड़ा जैसे क्रांतिकारियों को अपना आदर्श मानते हैं. उन्हीं की राह पर चलने का दावा करते हैं.
  • भक्ति भाव : शुभेंदु का हिंदुत्व केवल भाषणों तक सीमित नहीं है. पूर्व मेदिनीपुर के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों से उनका गहरा नाता है. अक्सर उन्हें गले में श्रीखोल (मृदंग) लटकाकर हरिनाम संकीर्तन करते देखा जा सकता है.
  • संस्कारों की जड़ें : शुभेंदु के करीबी बताते हैं कि यह बदलाव अचानक नहीं है, उनके भीतर बचपन से ही धार्मिक संस्कारों के बीज बोये गये थे. संकीर्तन के दौरान उन्हें भक्ति में डूबे हुए नृत्य करते देखना एक आम बात है.

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फिटनेस और डाइट : ‘शवासन’ के उस्ताद हैं शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी की फिटनेस का अपना एक अलग गणित है. देखने में भले वह स्लिम न हों, लेकिन उनकी डाइट बहुत सख्त है. वह ब्राउन राइस और सिंघाड़े के आटे की रोटी खाते हैं. रात में आधा घंटा टहलना उनके रूटीन का हिस्सा है. विश्व योग दिवस पर जब उन्होंने सूर्य नमस्कार करने की कोशिश की थी, तो वह थोड़ा असहज हो गये थे. उनके साथी मजाक में कहते हैं कि वह ‘शवासन’ करने में माहिर हैं.

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Suvendu Adhikari: सफर का साथी काली एसयूवी

शुभेंदु अधिकारी अपनी काली एसयूवी (SUV) में हर दिन 400 से 500 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. खास बात यह है कि वह ड्राइवर की बगल वाली सीट पर नहीं, बल्कि बीच की सीट पर बैठते हैं.

अनोखी बात : क्लास 7 के बाद 35 साल तक नहीं देखी फिल्म

शुभेंदु अधिकारी के बारे में एक ऐसी सच्चाई है, जो किसी को भी हैरान कर देगी. उन्होंने आखिरी बार सिने हॉल में तब फिल्म देखी थी, जब वह सातवीं कक्षा में पढ़ाई करते थे. बीजेपी में शामिल होने के बाद पिछले 5 वर्षों में उन्होंने केवल 3 फिल्में देखीं. वह भी पार्टी के निर्देश पर. शुभेंदु का कहना है कि नेतृत्व में चौबीस घंटे सक्रिय रहने वाले व्यक्ति के पास फिल्में देखने का वक्त नहीं होता.

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सियासत के मैदान में जीत के आदी शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के रण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. देखना होगा कि उनकी यह ‘चरैवेति’ उन्हें सत्ता के शिखर तक ले जाती है या नहीं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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