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हार के बाद TMC में महासंग्राम, ममता बनर्जी और अभिषेक को अपनों ने ही घेरा, कहा- भ्रष्ट सरकार को जनता ने दिया सही जवाब

TMC Internal Conflict: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है. पार्टी के भीतर ‘दीदी’ और ‘दादा’ यानी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावत के सुर उभरने लगे हैं.

टॉप लीडरशिप और भ्रष्टाचार की वजह से हारी टीएमसी : तिवारी

पश्चिम बंगाल प्रशासन के पूर्व मंत्री मनोज तिवारी से लेकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रवक्ता रीजू दत्ता और सांसद देव के अलावा कई दिग्गज नेताओं ने नेतृत्व की कार्यशैली, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता को हार की मुख्य वजह बताया है. अपनों के ही तीखे तीरों ने कालीघाट की चिंता बढ़ा दी है.

मनोज तिवारी बोले- मेरा काम सिर्फ चाय-बिस्कुट तक सीमित था

पूर्व क्रिकेटर और पूर्व स्पोर्ट्स राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने अपनी ही प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उन्होंने स्पोर्ट्स मंत्री अरूप विश्वास पर गंभीर आरोप लगाये. तिवारी ने कहा कि वे हावड़ा में जमैका के दिग्गज धावक योहान ब्लेक की मदद से एथलेटिक्स केंद्र बनाना चाहते थे, लेकिन अरूप विश्वास ने अपनी ‘असुरक्षा की भावना’ के कारण इसे रोक दिया.

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अपमान का घूंट और ममता बनर्जी से निराशा

मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रशासनी कार्यक्रमों में मंच तक पर नहीं बुलाया जाता था. उनका काम सिर्फ चाय-बिस्कुट तक सीमित कर दिया गया था. तिवारी ने दावा किया कि जब उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में मुख्यमंत्री से बात करनी चाही, तो ममता बनर्जी ने झिड़कते हुए कहा- क्या तुम्हारे पास और कोई काम नहीं है? उसी दिन उन्हें एहसास हो गया था कि यह प्रशासन गिरने वाली है.

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रीजू दत्ता का दर्द – टीएमसी ने नहीं, भाजपा नेताओं ने बचायी जान

टीएमसी प्रवक्ता रीजू दत्ता ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेताओं पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है. रीजू के मुताबिक, मतगणना के दिन जब उनके ससुराल पर हमला हुआ, तो टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने उनकी गुहार नहीं सुनी. उन्होंने दावा किया कि उस संकट की घड़ी में उनकी मदद भाजपा नेताओं ने की, जिससे स्थिति और बिगड़ने से बच गयी.

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अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर उठे सवाल

पार्टी के भीतर केवल मंत्रियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि ममता के उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी गुस्सा फूट पड़ा है. कोलकाता के उपमहापौर अतिन घोष और कृष्णेंदु नारायण चौधरी जैसे नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की रणनीति को पार्टी की कमजोरी का जिम्मेदार ठहराया है. बेहाला पश्चिम से चुनाव हारीं रत्ना चटर्जी ने अफसोस जताया कि जरूरत के वक्त उनका पार्टी नेतृत्व से संपर्क तक नहीं हो पाया.

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सांसद देव का बदला रुख- प्रतिबंधों की संस्कृति खत्म हो

टीएमसी सांसद और सुपरस्टार देव ने भाजपा को जीत की बधाई देते हुए नयी प्रशासन से खास अपील की है. उन्होंने कहा कि बांग्ला फिल्म उद्योग में अब ‘प्रतिबंध और विभाजन’ की नेतृत्व खत्म होनी चाहिए. देव ने यह भी उम्मीद जतायी कि नयी भाजपा प्रशासन ‘घाटाल मास्टर प्लान’ को पूरा करने में सहयोग करेगी.

TMC Internal Conflict: तृणमूल कांग्रेस की सफाई, ये नेताओं के निजी विचार

इन आरोपों के बीच तृणमूल कांग्रेस ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर इसे नेताओं के निजी विचार बताया है. हालांकि, नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि यह तो केवल शुरुआत है, आने वाले दिनों में टीएमसी के कई बड़े चेहरे पाला बदल सकते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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