गर्मी का मौसम आते ही एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ जाती है. छोटे घरों में एक या दो एसी काफी होते हैं, लेकिन जिन घरों में कई कमरे होते हैं वहां हर कमरे में अलग-अलग स्प्लिट एसी लगवाना महंगा सौदा साबित हो सकता है. न सिर्फ खरीदारी का खर्च बढ़ता है, बल्कि बिजली कनेक्शन पर अतिरिक्त लोड और रखरखाव की परेशानी भी बढ़ जाती है. ऐसे में एक ऐसी तकनीक मौजूद है जो एक ही आउटडोर यूनिट के जरिए पूरे घर को ठंडा कर सकती है. इसे VRF AC सिस्टम कहा जाता है.
क्या है VRF AC और कैसे करता है काम?
VRF यानी वेरिएबल रेफ्रिजरेंट फ्लो एक एडवांस्ड एयर कंडीशनिंग सिस्टम है, जिसे बड़े घरों, विला, ऑफिस और कमर्शियल बिल्डिंग्स में तेजी से अपनाया जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक आउटडोर यूनिट के साथ कई इनडोर यूनिट जोड़ी जा सकती हैं.
यानी अगर आपके घर में पांच, छह या उससे ज्यादा कमरे हैं, तो हर कमरे के लिए अलग आउटडोर यूनिट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. एक केंद्रीय सिस्टम सभी कमरों में जरूरत के हिसाब से कूलिंग पहुंचाता है. इससे जगह की बचत भी होती है और पूरा सेटअप ज्यादा व्यवस्थित दिखाई देता है.
कई एसी की जगह एक सिस्टम, क्या है फायदा?
आमतौर पर हर कमरे में अलग स्प्लिट एसी लगाने पर बिजली की खपत और इंस्टॉलेशन लागत दोनों बढ़ जाती हैं. VRF तकनीक जरूरत के अनुसार रेफ्रिजरेंट फ्लो को नियंत्रित करती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी कम होती है.
इस सिस्टम का एक और फायदा यह है कि अलग-अलग कमरों का तापमान स्वतंत्र रूप से नियंत्रित किया जा सकता है. यानी एक कमरे में ज्यादा कूलिंग और दूसरे में कम कूलिंग की जरूरत हो तो सिस्टम उसी हिसाब से काम करता है.
बिजली खपत और लोड को लेकर क्या जानना जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार VRF सिस्टम आमतौर पर प्रति टन क्षमता के हिसाब से लगभग 0.6 से 0.9 किलोवाट बिजली की खपत कर सकता है. बाजार में 5 टन क्षमता से शुरू होने वाले VRF सिस्टम उपलब्ध हैं, जिनके लिए करीब 4.5 किलोवाट या उससे अधिक बिजली लोड की जरूरत पड़ सकती है.
हालांकि वास्तविक बिजली खपत इस बात पर निर्भर करती है कि कितने इनडोर यूनिट एक साथ चल रहे हैं और कूलिंग की मांग कितनी है.
कीमत कितनी और कौन-कौन से विकल्प मौजूद?
हिंदुस्तानीय बाजार में VRF और VRV तकनीक वाले कई विकल्प उपलब्ध हैं. प्रमुख एयर कंडीशनिंग कंपनियां इस सेगमेंट में उत्पाद बेच रही हैं. शुरुआती स्तर के सिस्टम की कीमत लगभग 75 हजार रुपये से शुरू हो सकती है, जबकि क्षमता और फीचर्स बढ़ने के साथ लागत कई लाख रुपये तक पहुंच सकती है. इसलिए खरीदारी से पहले घर के आकार, कमरों की संख्या और कूलिंग जरूरत का आकलन करना जरूरी है.
क्या मेंटेनेंस मुश्किल होता है?
कई लोग मानते हैं कि इतने बड़े सिस्टम का रखरखाव जटिल होगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित सर्विसिंग के मामले में यह काफी हद तक स्प्लिट एसी जैसा ही होता है. आउटडोर यूनिट को छत, बालकनी या घर के बाहरी हिस्से में लगाया जा सकता है, जिससे रखरखाव भी आसान रहता है.
अगर आपके घर में कई कमरे हैं और आप अलग-अलग एसी लगाने के बजाय एक स्मार्ट और व्यवस्थित समाधान चाहते हैं, तो VRF सिस्टम एक आकर्षक विकल्प बन सकता है. शुरुआती निवेश जरूर ज्यादा हो सकता है, लेकिन लंबे समय में सुविधा, जगह की बचत और बेहतर कूलिंग अनुभव इसे खास बनाते हैं.
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