UPSC Success Story: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रहने वाले बजरंग प्रसाद यादव ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल और दर्दनाक दौर से गुजरने के बाद भी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को हासिल करके दिखाया. पिता की हत्या के बाद टूटने के बजाय उन्होंने उस दुख को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और आज वे एक शानदार IPS अधिकारी हैं. आइए जानते हैं उनके संघर्ष और कामयाबी (UPSC Success Story) की पूरी कहानी.
UPSC Success Story: गांव के स्कूल से हुई शुरुआती पढ़ाई
बजरंग प्रसाद यादव उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक साधारण ग्रामीण परिवार के हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल से अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद बजरंग उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी गए, जहां से उन्होंने मैथमेटिक्स में अपनी BSc की डिग्री पूरी की. एक सामान्य परिवार से होने के बावजूद बजरंग के सपने हमेशा से बहुत बड़े थे और वे समाज के लिए कुछ अलग करना चाहते थे.
साल 2020 की वो दर्दनाक घटना जिसने बदल दी जिंदगी
बजरंग के पिता एक साधारण किसान थे जो खेती-बाड़ी के साथ-साथ हमेशा गांव के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे. लेकिन साल 2020 में उनकी निडरता और कर्तव्यनिष्ठा के कारण कुछ लोगों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी.
इस भयानक हादसे ने बजरंग के पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया. पिता के साए के अचानक उठ जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा. इसी बीच बजरंग ने फैसला किया कि वे इस अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे और प्रशासनिक सेवा में जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी और बेगुनाह के परिवार के साथ ऐसा हादसा न हो. यहीं से उनका UPSC का सफर शुरू हुआ.

फीस भरने के लिए बेचना पड़ा अनाज
पिता की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी. जब बजरंग यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली गए, तो उनके सामने कोचिंग की भारी-भरकम फीस चुकाने का बड़ा संकट था. पैसों का कोई और जरिया न होने के कारण उन्होंने अपने खेत की फसल और अनाज को बाजार में बेचा ताकि कोचिंग की फीस जमा की जा सके. इस मुश्किल दौर में बजरंग की मां ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया.
हिंदी मीडियम से तैयारी और लगातार दो असफलताओं का दर्द
बजरंग प्रसाद ने अपनी यूपीएससी की पूरी तैयारी हिंदी माध्यम से की थी. शुरुआत में बजरंग को भी लगातार दो बड़े झटके लगे. वे दो बार परीक्षा में असफल हुए. एक बार तो वे यूपीएससी मेन्स परीक्षा में सिर्फ 27 नंबरों से चूक गए थे. इस असफलता से वे काफी निराश हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय अपनी कमियों को सुधारा और हर बार पहले से अधिक मजबूती के साथ वापस खड़े हुए.

UPSC Success Story: तीसरे प्रयास में पूरा हुआ सपना, आज हैं IPS अधिकारी
कड़ी मेहनत, लगातार संघर्ष और कभी न टूटने वाले हौसले (UPSC Success Story) के दम पर बजरंग ने अपना तीसरा अटेंप्ट दिया. इस बार उनकी किस्मत और मेहनत दोनों रंग लाई और उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक क्रैक कर लिया. पूरे देश में 454वीं रैंक हासिल कर वे एक आईपीएस (IPS) ऑफिसर बने.
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