Israel on US Iran Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौता पूरा होने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल में इसका विरोध शुरू हो गया. इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुए किसी भी समझौते से इजरायल बाध्य नहीं है और देश अपनी सुरक्षा नीतियां खुद तय करेगा. ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते का ऐलान पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद किया. शरीफ ने दावा किया दोनों देश युद्ध समाप्त करने पर सहमत हैं और 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस डील पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे.
बेन-गवीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता. इजरायल अमेरिका के अधीन नहीं है. हम एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र हैं. हमारी जिम्मेदारी इजरायल के नागरिकों, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) और यहूदी समुदाय के प्रति है.’
उन्होंने कहा कि इतिहास में जब-जब इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुककर सुरक्षा संबंधी समझौते किए, तब उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी. बेन-गवीर ने ओस्लो समझौते, 2006 के लेबनान समझौते और गाजा में संघर्ष विराम की विभिन्न अवधियों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे फैसलों का नतीजा अक्सर हिंसा के रूप में सामने आया.
बेन-गवीर बोले- ‘इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं’
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने अमेरिका और ट्रंप के प्रति सम्मान जताते हुए भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय इजरायल के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हम अमेरिका से प्रेम करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं, लेकिन इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है. मैं यह बात प्रधानमंत्री को लगातार कहता रहा हूं और हर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मोड़ पर बंद कमरों में भी दोहराता हूं.’
ההסכם של טראמפ אינו מחייב אותנו. ישראל לא כפופה לארצות הברית ואנחנו מדינה עצמאית וריבונית!
חובתנו לאזרחי ישראל לחיילי צה״ל ולעם היהודי וחובתנו ההיסטורית לנרדפים ולנרצחים היהודים באלפי שנות גלות, להעניק ביטחון ליהודים בארץ ישראל.
בכל פעם שנכנענו ללחץ בינלאומי על חשבון ביטחון…
— איתמר בן גביר (@itamarbengvir) June 15, 2026
लेबनान और हिज्बुल्लाह पर सख्त रुख
बेन-गवीर ने कहा कि इजरायल किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बन सकता जो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता हो. उन्होंने मांग की कि हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म किया जाए और इजरायली सेना जिन इलाकों को आतंकवादी ढांचे से मुक्त करा चुकी है, वहां से पीछे नहीं हटना चाहिए.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘लेबनान से इजरायल की ओर छोड़ा गया हर ड्रोन, यूएवी या मिसाइल दाहिया में इजरायली जवाबी हमले का कारण बनेगा. कुछ महीने पहले तक यही हमारी प्रतिरोधक नीति थी और हमें इसे छोड़ना नहीं चाहिए.’ बेन-गवीर ने आगे कहा, ‘इजरायल 3,000 साल पुरानी सभ्यता वाला राष्ट्र है. हम लंबी लड़ाई से नहीं डरते. अब वह दौर खत्म हो चुका है जब यहूदी समुदाय हमले सहकर चुप रहता था.’
विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज ने भी उठाए सवाल
प्रशासन के भीतर विरोध के साथ-साथ विपक्ष ने भी समझौते को लेकर चिंता जताई है. पूर्व रक्षा मंत्री और प्रमुख विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज ने कहा कि किसी भी हालत में ऐसा समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए जो लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता को सीमित करे.
गैंट्ज ने एक्स पर लिखा, ‘लेबनान में इजरायल की कार्रवाई की स्वतंत्रता पर रोक लगाने या ऐसे किसी सैन्य पीछे हटने को मंजूरी नहीं दी जा सकती जिससे उत्तरी क्षेत्रों के नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़े.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ईरान के साथ उभरता हुआ समझौता एक रणनीतिक विफलता जैसा दिखता है. इसके कारण आने वाले वर्षों में इजरायल को कूटनीतिक, सैन्य और कानूनी मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ सकता है.’
नेतन्याहू ने लेबनान पर अटैक कर कुछ देर के लिए रोकी पीस डील
इससे पहले इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान पर हमला किया. उनका अटैक हिज्बुल्लाह के खिलाफ था. इस वजह से समझौते से पहले क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था. ट्रंप के मुताबिक, लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजरायल के हमले ने बातचीत की प्रक्रिया को झटका दिया और समझौते को अंतिम रूप देने में देरी हुई. उन्होंने संकेत दिया कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके थे.
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू को लेकर कहा, ‘वह बेहद मुश्किल व्यक्ति हैं.ट उन्होंने आगे कहा, ‘सच कहूं तो उन्हें हमारे प्रति आभारी होना चाहिए. अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता तो इजरायल दो घंटे भी नहीं टिक पाता.’
अमेरिका और ईरान दोनों ने घोषणा की है कि सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को ‘तत्काल और स्थायी रूप से’ समाप्त करने पर सहमति बन गई है. इस समझौते में लेबनान भी शामिल है. प्रस्तावित समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं. इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे.
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ट्रंप ने की थी समझौते की घोषणा
इजरायल की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता पूरा होने की घोषणा की है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है. सभी को बधाई.’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं होरमुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल हटाने की अनुमति देता हूं. दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें, तेल का प्रवाह फिर शुरू होने दें.’ ट्रंप की घोषणा से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी बताया था कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक चली बातचीत के बाद समझौता हो गया है.
Following intensive talks, we are pleased to announce that the Peace Deal between the United States of America and Islamic Republic of Iran has been REACHED. Both sides have declared the immediate and permanent termination of military operations on all fronts, including in…
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) June 14, 2026
शांति समझौते पर बनी हुई है अनिश्चितता
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इजरायल के भीतर उठ रहे विरोधी स्वर यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की राह अभी भी आसान नहीं होगी. अगर इजरायल समझौते के कुछ प्रावधानों को मानने से इनकार करता है, तो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है.
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