Bangladesh China Teesta River Cooperation: तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग और मजबूत होने जा रहा है. बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने तीस्ता समेत अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन से जल संसाधन प्रबंधन और तीस्ता परियोजना में तकनीकी सहयोग की भी मांग की, जिस पर चीन ने पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया. यह समझौता हिंदुस्तान की टेंशन बढ़ाने वाला है, क्योंकि तीस्ता नदी पर चीन का सहयोग मिलने को मतलब होगा चिकेन नेक के पीस चीन की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी.
बांग्लादेश की प्रशासनी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) के मुताबिक, गुरुवार को चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने बीजिंग में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की. इसी बैठक में तीस्ता और अन्य नदियों के बेहतर प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. तारिक रहमान इसी सप्ताह चीन के दौरे पर पहुंचे हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका दूसरा विदेश दौरा है. इससे पहले उन्होंने अपना पहला विदेशी दौरा मलेशिया का किया था.
22 जून को वे कुआलालंपुर से चीन के डालियान पहुंचे थे, जहां उन्होंने वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इसके बाद बुधवार को वे हाई-स्पीड ट्रेन से डालियान से बीजिंग पहुंचे. इस दौरे के दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, प्रधानमंत्री ली च्यांग और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी होनी है.
Chinese Premier Li Qiang held a welcome ceremony for visiting Prime Minister of the People’s Republic of Bangladesh Tarique Rahman at the Great Hall of the People in Beijing on June 25. pic.twitter.com/8O32hqEmkY
— CCTV+ (@CCTV_Plus) June 25, 2026
बाढ़ रोकने और जल प्रबंधन के लिए मांगा सहयोग
जल संसाधन मंत्री के साथ बैठक के दौरान तारिक रहमान ने बताया कि उनकी प्रशासन देश में नदी खुदाई का बड़ा अभियान चला रही है. इसका मकसद बाढ़ के खतरे को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है. तारिक रहमान ने बैठक में चीन से नदी किनारों के कटाव को रोकने, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और देश के अंदरूनी जल परिवहन को मजबूत करने में भी सहयोग मांगा. इसी सिलसिले में उन्होंने चीन से जल संसाधन प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में सहयोग देने का अनुरोध किया. साथ ही तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता भी मांगी.
चीन ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा
चीनी जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने बांग्लादेश प्रशासन को भरोसा दिलाया कि जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े सभी प्रयासों में चीन पूरा सहयोग देगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) और पिछले साल बांग्लादेश का दौरा करने वाले चीनी जल विशेषज्ञों की टीम इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के बीच जल संसाधन प्रबंधन को लेकर सहयोग व्यावहारिक और शोध आधारित रहा है.
ली गुओयिंग ने यह भी कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में चीन के अनुभव का लाभ बांग्लादेश उठा सकता है. उन्होंने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए चीन आने का भी निमंत्रण दिया. यानी यह साफ हो रहा है कि बांग्लादेश अब हिंदुस्तान के बॉर्डर इलाके में चीन को मौका देने का फैसला कर चुका है.
हिंदुस्तान-बांग्लादेश संबंधों में संवेदनशील है तीस्ता परियोजना
तीस्ता परियोजना लंबे समय से हिंदुस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में एक संवेदनशील मुद्दा रही है. इस साल फरवरी में तारिक रहमान के सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिले थे. इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम प्रशासन के दौरान नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था.
इसी पृष्ठभूमि में हिंदुस्तान ने वर्ष 2024 में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी विकास के लिए बांग्लादेश को सहयोग देने की पेशकश की थी. इसके जरिए दोनों देशों के बीच साझा नदियों के प्रबंधन में सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश की गई थी. हालांकि, बांग्लादेश ने इस पर आगे बढ़ने से मना कर दिया. पिछले महीने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग दौरे के दौरान औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना में सहयोग और समर्थन का अनुरोध किया था. यानी तीस्ता के मुद्दे पर बांग्लादेश चीन के पाले में ही जा रहा है.
हिंदुस्तान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तीस्ता परियोजना?
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है. बांग्लादेश में यह लाखों लोगों की सिंचाई और आजीविका का प्रमुख स्रोत है. चीन कई वर्षों से तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट में रुचि दिखाता रहा है. यह परियोजना हिंदुस्तान के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है. इसी वजह से यह परियोजना हिंदुस्तान की रणनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम मानी जाती है.
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गंगा जल संधि भी बनी हुई है अहम मुद्दा
हिंदुस्तान और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारा हमेशा से महत्वपूर्ण विषय रहा है. इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि गंगा नदी के सूखे मौसम में जल बंटवारे को लेकर 1996 में हुई हिंदुस्तान-बांग्लादेश गंगा जल संधि इस वर्ष अपनी 30 वर्ष की अवधि पूरी कर रही है. अगर दोनों देश इसे आगे नहीं बढ़ाते हैं तो यह संधि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में आने वाले समय में जल साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों का एक प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है.
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