खास बातें
Annapurna Bhandar: पश्चिम बंगाल की हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रशासन की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा भंडार योजना पर नेतृत्वक युद्ध छिड़ गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिये प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाये हैं. गोखले ने दावा किया कि इस नयी योजना के तहत राज्य की लगभग 50 प्रतिशत स्त्री लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिये गये हैं. उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल की भाजपा प्रशासन का ‘पहला घोटाला’ करार दिया है.
2.4 करोड़ में 1.1 करोड़ ही लाभार्थी क्यों बचीं : गोखले
साकेत गोखले ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2026 में बंगाल में स्त्री मतदाताओं की कुल संख्या 3.1 करोड़ थी. ममता बनर्जी प्रशासन की लक्ष्मी भंडार (Lakshmir Bhandar) योजना के तहत 2.4 करोड़ स्त्रीओं को लाभ मिल रहा था. अब अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत केवल 1.3 करोड़ लाभार्थी ही क्यों बचीं?
ममता को वोट देने की सजा स्त्रीओं को दे रही भाजपा : तृणमूल
गोखले ने आरोप लगाया कि 1.1 करोड़ स्त्रीओं के नाम काटकर भाजपा प्रशासन उन स्त्रीओं को ‘सजा’ दे रही है, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया था. टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव डेरेक ओब्रायन ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के हक की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ती रहेगी.
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Annapurna Bhandar: शुभेंदु अधिकारी बोले- फर्जीवाड़ा रोकने के लिए रद्द हुए 27 लाख आवेदन
तृणमूल कांग्रेस के तीखे हमलों और आरोपों पर पलटवार करते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) ने स्थिति स्पष्ट कर दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत योग्य स्त्री लाभार्थियों के खातों में सीधे नकद हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) की पहली किस्त जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. लगभग 1.1 करोड़ खातों में राशि भेजी जा चुकी है.
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क्यों खारिज किये गये 27 लाख आवेदन
- प्रशासन को कुल 1.6 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे.
- गहन जांच के बाद विसंगतियों की वजह से 27 लाख आवेदन खारिज कर दिये गये.
- आवेदनों के खारिज होने के मुख्य कारणों में आवेदक की मृत्यु, नागरिकता और निवास संबंधी गंभीर संदेह, मतदाता सूची (Electoral Roll) से नाम का हटना और एक ही लाभार्थी के नाम पर एक से अधिक (डुप्लीकेट) बैंक खाते होना शामिल हैं.
लाभार्थियों की कुल संख्या 1.3 करोड़ : अधिकारी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पूरी तरह वैध और स्वीकृत लाभार्थियों की वास्तविक संख्या लगभग 1.3 करोड़ है. प्रशासन का लक्ष्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि राजस्व का दुरुपयोग न हो. केवल वास्तविक हिंदुस्तानीय नागरिकों व योग्य स्त्रीओं को ही योजना का सीधा लाभ मिल सके.
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