Babulal Marandi: झारखंड की नेतृत्व में इन दिनों हलचल तेज हो गई है. इन्वेस्टर समिट से लेकर प्रशासन के अंदरूनी मतभेदों तक, विपक्ष हमलावर है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नया विचार डिजिटल से खास बातचीत में हेमंत सोरेन प्रशासन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की सलाह दी है, तो वहीं नगड़ी में ‘रिम्स-2’ के निर्माण के लिए आदिवासियों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहण का कड़ा विरोध किया है.
औचित्य नहीं तो छोड़ दें पद : वित्त मंत्री को मरांडी की सलाह
प्रशासन के अंदर चल रही खींचतान पर कटाक्ष करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर प्रशासन के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं और पत्र लिखने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने स्पष्ट कहा, ‘मुख्यमंत्री को या तो उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर देना चाहिए और अगर मंत्री की कोई नहीं सुन रहा, तो उन्हें खुद त्यागपत्र देकर बाहर निकल जाना चाहिए.’
‘नगड़ी की जमीन आदिवासियों की, वहां नहीं बनेगा रिम्स-2’
नगड़ी में रिम्स-2 के निर्माण के प्रस्ताव पर मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि नगड़ी की जमीन आदिवासियों की खेती की उपजाऊ भूमि है और उस पर जबरन कब्जा करना गलत है. मरांडी ने भावुक होते हुए कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आत्मा भी यह देखकर छटपटा रही होगी कि उनके बेटे के शासन में आदिवासियों की उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि रांची के आसपास बहुत बंजर भूमि है, अस्पताल वहां बनाया जाना चाहिए न कि गरीब आदिवासियों को उजाड़कर.
इन्वेस्टर समिट पर उठाए सवाल, पूछा- “कहां हैं कल्पना सोरेन?”
हाल ही में दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेक होल्डर कंसल्टेंसी 2026 और 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश के दावों पर मरांडी ने संदेह जताया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहा है. उन्होंने एक नई बात उठाते हुए कहा कि अमूमन हर प्रशासनी कार्यक्रम और विदेश दौरों पर मुख्यमंत्री के साथ दिखने वाली श्रीमती कल्पना सोरेन इस बार दिल्ली समिट में क्यों नहीं दिखाई दीं? उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘थोड़ा पता करो यार, वो इस बार क्यों नहीं दिखीं.’
यह दलालों और माफिया की प्रशासन: मरांडी का गंभीर आरोप
मरांडी ने वर्तमान प्रशासन के चरित्र पर सवाल उठाते हुए इसे ‘जमीन दलालों, माफिया और अपराधियों की प्रशासन’ करार दिया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के नाम पर नेतृत्व करने वाली पार्टी अब उन्हीं को उजाड़ने में लगी है. उन्होंने मांग की कि राज्य प्रशासन को कृषि भूमि को बचाने के लिए कड़े नियम बनाने चाहिए और निर्माण कार्य केवल पथरीली या बंजर भूमि पर ही होने चाहिए.
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