Dhar Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 जुलाई) को मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर 29 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश प्रशासन ने नमाज के लिए धार के विवादित भोजशाला परिसर से काफी दूर वैकल्पिक जगह तय की है. मुस्लिम पक्ष की मांग है कि शुक्रवार की नमाज (जुमे की नमाज) के लिए भोजशाला परिसर के पास ही जगह मुहैया कराई जाए.
मुस्लिम पक्ष ने वैकल्पिक जगह पर उठाए सवाल
22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया था. हालांकि, शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने सुनवाई के अंत में इस मामले का जिक्र उल्लेख किया, क्योंकि याचिका सूची में शामिल नहीं थी.
अहमदी ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन के अधिकारी नमाज के लिए आसपास जगह उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और जुमे की नमाज दो बार छूट चुकी है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से दी गई जगह करीब 1.3 किलोमीटर दूर है.
प्रशासन ने दूरी को लेकर मुस्लिम पक्ष की दलील का किया विरोध
राज्य प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि वैकल्पिक स्थान करीब 900 मीटर दूर है. इस पर हुजेफा अहमदी ने कहा कि सड़क मार्ग से दूरी 1.3 किलोमीटर है और आरोप लगाया कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने की कोशिश की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को सुनवाई तय की
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की अंतरिम याचिका पर सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है.
भोजशाला मामले में पहले भी दिया गया था निर्देश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई करते हुए, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को राज्य प्रशासन को निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मामले में अंतिम फैसला आने तक दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज के लिए विवादित स्थल के पास कोई दूसरी खुली जगह उपलब्ध कराई जाए.
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