CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने गुरुवार को कहा कि NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं. उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने इनमें से कुछ मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और मुआवजे और FIR वापस लेने की मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया है. दास ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई बैठक में पार्टी ने अपनी मांगें मौखिक और लिखित दोनों रूप में रखीं.
CJP की प्रमुख मांगें
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: पार्टी ने कहा कि NEET विवाद की जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए या प्रशासन उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करे.
- मृत छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा: पार्टी ने मांग की कि NEET परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.
- प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग: CJP ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जाएं.
- भविष्य में FIR नहीं दर्ज करने की लिखित गारंटी: पार्टी ने प्रशासन से लिखित आश्वासन मांगा कि भविष्य में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.
मुआवजे और FIR वापसी पर प्रशासन का सकारात्मक रुख- CJP
CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने जंतर-मंतर पर कहा कि प्रशासन ने उनकी दूसरी और तीसरी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
प्रशासन ने सैद्धांतिक रूप से मुआवजे और FIR वापस लेने की मांगों को स्वीकार किया है. हमें उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में लिखित समझौता मिलेगा. CJP प्रवक्ता सौरभ दास
दास ने यह भी कहा कि प्रशासन ने भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की गारंटी देने की मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाया है.
CJP ने कहा- लिखित आश्वासन का इंतजार
CJP के मुख्य न्यायिक न्यायाधीश आशुतोष रांका ने कहा कि प्रशासन ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा-
प्रशासन ने 1 करोड़ रुपये मुआवजे और कानूनी मामलों से जुड़ी मांगों पर सैद्धांतिक सहमति दिखाई है. इसमें पहले से दर्ज FIR वापस लेने और भविष्य में नई FIR नहीं दर्ज करने की गारंटी भी शामिल है. आशुतोष रांका, CJP
रांका ने कहा कि पार्टी को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही लिखित आश्वासन देगी.
संसद मार्च के दौरान हुआ था पुलिस एक्शन
20 जुलाई को CJP और युवा संगठनों की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था. इस मामले में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के लिए सहमति जताई है. मामले पर 27 जुलाई को सुनवाई होगी.
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