सुप्रीम कोर्ट ने नए गाड़ी खरीदने वालों के लिए थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस को लेकर अहम फैसला दिया है. अब नई कार खरीदने पर 4 साल और नया टू-व्हीलर खरीदने पर 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस एक साथ लेना होगा.
कोर्ट का कहना है कि इससे बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम होगी और सड़क हादसों के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में आने वाली परेशानियां भी घटेंगी.
कोर्ट ने बीमा नियामक IRDAI को इस फैसले के अनुसार तुरंत जरूरी निर्देश जारी करने को भी कहा है.
क्या बदला है नया नियम?
पहले नए गाड़ियों के लिए यह व्यवस्था थी:
| वाहन | पहले | अब |
| नई कार | 3 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस | 4 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस |
| नया टू-व्हीलर | 5 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस | 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस |
यह आदेश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिया. कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक बीमा अनिवार्य रहने से नियमों का पालन बेहतर होगा और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी.
कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2018 में दिए गए पुराने आदेश के बावजूद बड़ी संख्या में गाड़ियों आज भी बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं. कोर्ट ने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश में करीब 56% वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कुल 30.48 करोड़ गाड़ियों में से लगभग 16.54 करोड़ गाड़ियों के पास वैध इंश्योरेंस नहीं है. कोर्ट ने माना कि जब किसी दुर्घटना में शामिल गाड़ी का बीमा नहीं होता, तब पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे में अनिवार्य बीमा अवधि बढ़ाना जरूरी है.
बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर कैसे होगी नजर?
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ बीमा अवधि बढ़ाने तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि निगरानी मजबूत करने के लिए भी कई सुझाव दिए हैं.
- हाईवे और सड़कों पर लगे Automatic Number Plate Recognition (ANPR) कैमरों को Insurance Information Bureau और VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाए.
- इससे बिना इंश्योरेंस वाले गाड़ियों की पहचान कर ई-चालान जारी किया जा सकेगा.
- पुलिसकर्मियों को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या ऐप दिए जाएं, जिनसे वे मौके पर ही गाड़ी का इंश्योरेंस स्टेटस जांच सकें.
- कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में पेट्रोल पंपों को बीमा डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जाए. इससे वैध इंश्योरेंस नहीं होने पर वाहन को फ्यूल देने पर रोक लगाने जैसी व्यवस्था भी बनाई जा सकती है.
यह फैसला किस मामले में आया?
यह निर्देश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए. अपील खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मोटर इंश्योरेंस से जुड़े बड़े मुद्दे पर भी चिंता जताई और कहा कि सड़क सुरक्षा तथा दुर्घटना पीड़ितों के हित में बीमा नियमों का सख्ती से पालन होना जरूरी है.
कोर्ट ने प्रशासनी आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके अनुसार 2024 में हिंदुस्तान में 4.87 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई. इसी को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के नियमों का बेहतर पालन कराना समय की जरूरत है.
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