Chandipura Virus : गुजरात और राजस्थान में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र प्रशासन ने NJORT (National Joint Outbreak Response Team) की टीम तैनात की है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि इस टीम में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), हिंदुस्तानीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के विशेषज्ञ शामिल हैं. यह टीम दोनों राज्यों में जाकर संक्रमण की स्थिति का आकलन करेगी और नियंत्रण उपायों को मजबूत करने में राज्य प्रशासनों की मदद करेगी.
गुजरात में चंडीपुरा वायरस के 35 मामलों की पुष्टि
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने बताया कि संदिग्ध मामलों समेत 184 मरीजों के सैंपल की जांच की गई, जिनमें 35 लोगों में चंडीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है. उन्होंने कहा कि अब तक इस संक्रमण से 22 मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं, 7 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं और वेंटिलेटर व ऑक्सीजन सपोर्ट पर सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह टीम वायरस के प्रसार, महामारी विज्ञान, मरीजों के उपचार, लैब जांच, संभावित वाहकों (वेक्टर) की निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की समीक्षा करेगी. जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें केंद्र प्रशासन को सौंपेगी. इसके साथ ही NCDC के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (PHEOC) को भी सक्रिय कर दिया गया है.
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वायरस के फैलने के तरीके की हो रही जांच
प्रशासन ने बताया कि देश के कई प्रमुख अनुसंधान संस्थान मिलकर चांदीपुरा वायरस पर व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं. ICMR-NIV पुणे, ICMR-NIE चेन्नई, ICMR-NIVCR पुडुचेरी, ICMR-NIPCR हैदराबाद और ICAR-NIVEDI बेंगलुरु समेत कई संस्थान इस जांच में शामिल हैं. वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वायरस केवल सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) से फैल रहा है या फिर मच्छर, किलनी (टिक) और माइट्स जैसे अन्य जीव भी इसके प्रसार में भूमिका निभा रहे हैं. फिलहाल बड़ी संख्या में वेक्टर सैंपलों की लैब में जांच की जा रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी.
पशुओं और वायरस के नए स्वरूप पर भी नजर
जांच के तहत मवेशियों, भैंसों और बकरियों के खून तथा दूध के नमूने भी लिए जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं ये जानवर वायरस के संभावित वाहक तो नहीं हैं. अब तक करीब 70 पशु रक्त नमूनों की जांच की जा रही है. वहीं, गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) में वायरस का जीनोम सीक्वेंसिंग भी किया जा रहा है. शुरुआती जांच में कुछ मामूली आनुवंशिक बदलाव मिले हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह तय करने के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी है कि वर्तमान वायरस पहले के स्ट्रेन से कितना अलग है.
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि केंद्र प्रशासन ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण के तहत मानव, पशु और संभावित वाहकों की संयुक्त निगरानी कर रही है, ताकि चांदीपुरा वायरस के प्रकोप को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जा सके.
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