सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद की 4 साल की रेप पीड़िता की मौत के मामले में सख्त फैसला सुनाया है. अदालत ने गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों को बच्ची के पिता को कुल 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि बच्ची को समय पर इमरजेंसी इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई. अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि कानून में मौजूद सुरक्षा और जमीनी स्तर पर उसके पालन के बीच बड़ी खाई दिखाई देती है.
इलाज में देरी बनी मौत की वजह
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने SIT की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर चोट लगने के बाद भी बच्ची करीब 5 घंटे तक जीवित थी. इसके बावजूद उसे समय पर जरूरी इलाज नहीं मिला. कोर्ट ने सेंट जोसेफ (मरियम) हॉस्पिटल को 10 लाख रुपये और खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये 4 सप्ताह के भीतर बच्ची के पिता को देने का आदेश दिया है.
यह मामला बच्ची के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. दिहाड़ी मजदूर पिता ने 16 मार्च 2026 में हुई इस घटना की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की थी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई और निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार किए जाने पर गंभीर चिंता जताई थी. इसी के बाद अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.
अस्पतालों और एजेंसियों के लिए बनेगी गाइडलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अस्पतालों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए व्यापक गाइडलाइंस तैयार की जाएंगी. इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि गंभीर अपराधों के पीड़ितों को बिना किसी देरी के तत्काल चिकित्सा सहायता मिले.
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