शुक्रवार को हिंदुस्तानीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 75 अंक से अधिक नीचे फिसल गया. बाजार में बिकवाली का दबाव दिखा और निफ्टी 24,400 के स्तर से नीचे आ गया.
सुबह कारोबार के दौरान BSE Sensex 316.95 अंक यानी 0.41 फीसदी गिरकर 77,763.01 पर पहुंच गया. वहीं NSE Nifty 50 75.45 अंक यानी 0.31 फीसदी की गिरावट के साथ 24,320.40 पर कारोबार कर रहा था.
बाजार में गिरावट की वजह क्या है?
Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा है. निफ्टी 23,800 से 24,400 के बीच बना हुआ है और अभी ऐसा कोई मजबूत कारण नहीं दिख रहा, जिससे यह इस दायरे से ऊपर निकले या नीचे जाए. उनके मुताबिक, अभी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गतिविधि देखने को मिल रही है. वहीं लंबे समय के नजरिए से चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर बैंकों में खरीदारी का मौका बन सकता है.
कच्चे तेल का बाजार पर कितना असर?
बाजार में पहले तेजी की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच संभावित डील नहीं होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई. इससे निफ्टी की 24,400 के ऊपर जाने की उम्मीद को झटका लगा.
हालांकि अब कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, जो शेयर बाजार के लिए राहत की बात है.
- Brent crude: 87.14 डॉलर प्रति बैरल
- Crude oil: 81.42 डॉलर प्रति बैरल
वीके विजयकुमार ने कहा कि FPI की बिकवाली की रफ्तार कम हुई है और हाल में वे खरीदार भी बने हैं, लेकिन FII की गतिविधियों से बाजार में अभी कोई साफ ट्रेंड सामने नहीं आया है.
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अमेरिकी बाजार के संकेत कैसे रहे?
दिलचस्प बात यह है कि हिंदुस्तानीय बाजार की कमजोरी के बावजूद अमेरिकी बाजार से संकेत सकारात्मक रहे. शुक्रवार को Dow Jones Futures 0.09 फीसदी ऊपर 53,886.07 पर था. S&P 500 Futures 0.65 फीसदी चढ़कर 7,798.99 और Nasdaq Futures 0.81 फीसदी बढ़कर 26,803.03 पर पहुंच गया. यानी ग्लोबल संकेत पूरी तरह कमजोर नहीं थे, लेकिन घरेलू बाजार पर कच्चे तेल और सीमित दायरे में कारोबार का दबाव बना रहा.
सोने की कीमत भी क्यों फिसली?
सोने की कीमत में भी शुक्रवार को दबाव देखने को मिला. यह 10 हफ्ते के ऊंचे स्तर से नीचे आया, हालांकि लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की राह पर बना हुआ है. Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीद कम हुई है. जुलाई के PPI आंकड़े भी उम्मीद से नरम रहे.
फिलहाल सितंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब एक-तिहाई मानी जा रही है. आगे अमेरिका के रोजगार आंकड़े, फेड चेयर केविन वार्श के जैक्सन होल भाषण और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम सोने और कच्चे तेल की दिशा तय करने में अहम रहेंगे. रिपोर्टिंग के समय सोना 22.97 डॉलर यानी 0.53 फीसदी गिरकर 4,326.58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था.
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