कोलकाता से बिकास कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. आयोग ने गुरुवार को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप से फ्रीज करते हुए ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किये हैं.
रीतब्रत बनर्जी को भी प्रतिवादी बनाया
आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसले की आलोचना की और पार्टी के नाम व ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न पर अपना दावा न छोड़ने की बात कही. इसके बाद शुक्रवार देर रात उन्होंने आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. याचिका में चुनाव आयोग के साथ रीतब्रत बनर्जी को भी प्रतिवादी बनाया गया है. मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है.
28 साल बाद बदली पार्टी की पहचान
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों को नये नाम और चुनाव चिह्न दिये गये हैं. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है. वहीं, रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है. यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए लागू की गयी है.
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सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती
ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गयी है. रिपोर्टों के अनुसार, याचिका में आयोग के साथ उसके सचिव और रीतब्रत बनर्जी को भी प्रतिवादी बनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई संभावित रूप से अगले सप्ताह होगी.
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