देश में निष्पक्ष चुनाव की जिम्मेदारी जिस चुनाव आयोग के कंधों पर है, उसकी निष्पक्षता सवालों के घेरे में है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर संदेह जताए जा रहे हैं. विपक्षी कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के रोल पर सवाल उठाते हुए इसे देशद्रोह ठहरा रही है. वहीं, हालिया Gen-Z आंदोलन से सुर्खियों में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सीईसी को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग लिया है.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केस चलाने की मांग जोर पकड़ रही है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं, प्रोटेस्ट कर रहे हैं. विपक्षी पार्टियां संसद के शीतकालीन सत्र में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग लाने की तैयारी में हैं. वहीं, केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की अगुवाई कर रही हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) खुलकर सीईसी के बचाव में उतर आई है. बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने तो ज्ञानेश कुमार को पद्मश्री देने की मांग कर दी है.
समझते हैं यह पूरा विवाद क्या है, ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दल क्या आरोप लगा रहे हैं. विपक्षी पार्टियां अगर महाभियोग प्रस्ताव लेकर आती हैं, दोनों सदनों में किस पक्ष की ताकत कितनी है?
ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए हैं क्या आरोप?
एक अंग्रेजी अखबार की एक रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर, चुनाव आयोग के अंदर मतभेद और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर विवाद का दावा किया गया है. रिपोर्ट में CEC पर मुख्य रूप से दो गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर आरोप है. इस प्रक्रिया में मतदाता सूची को दोबारा जांचा और अपडेट किया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए.
- दूसरा आरोप यह है कि दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण, नाम हटाने और कुछ मतदाताओं के नाम जोड़ने से जुड़े मामलों पर आपत्ति जताई थी. इसके लिए पिछले 10 महीनों में आयोग की प्रक्रियाओं और फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां भी दर्ज कराई गई थीं, जिन्हें कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया.
- मामले को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’, ‘संस्था चोरी’ और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए इसे ‘देशद्रोह’ (Treason) करार दिया है.
हालांकि, चुनाव आयोग ने ये आरोप सिरे से नकार दिए हैं. चुनाव आयोग का दावा है कि फैसले सभी तीन आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए.
क्या मांग कर रहे हैं विपक्षी दल
CEC ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोप लेकर विपक्ष ने प्रशासन और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला है. कांग्रेस और इंडिया गठबंधन में शामिल कई दलों के नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने 24 सितंबर को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी. उन्होंने SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों में कथित आपराधिक आचरण की जांच और एफआईआर की मांग की है. हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को इम्युनिटी मिली हुई है और सीईसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता.
NDA के पक्ष में है नंबर गेम
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्ष एक बार फिर संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है.
- हालांकि यह उतना आसान भी नहीं है. क्योंकि इसमें सिर्फ NDA बनाम विपक्ष की संख्या देखना पर्याप्त नहीं होता है, हटाने के प्रस्ताव को दोनों सदनों में अलग-अलग बहुमत चाहिए होता है. इसलिए यह गणित काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.
- 543 सदस्यों वाली लोकसभा में मौजूदा नेतृत्वक गणित के अनुसार एनडीए के पास 318 सांसद हैं, जबकि इंडिया गठबंधन के पास 184 सांसद हैं. बाकी सीटें अन्य दलों के पास हैं.
- राज्यसभा की 242 सीटों में एनडीए के पास कम से कम 152 सदस्य हैं, जबकि विपक्षी दलों के पास 63 सदस्य हैं. डीएमके, बीजेडी, वाईएसआरसीपी और बीआरएस जैसे दलों के कुल 22 सदस्य हैं, जिनका रुख अलग-अलग मुद्दों पर महत्वपूर्ण हो सकता है.
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क्या इससे पहले किसी CEC को हटाया गया है?
- अब तक हिंदुस्तान में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस प्रक्रिया के जरिए पद से नहीं हटाया गया है. CEC को हटाने की प्रक्रिया को हिंदुस्तानीय संविधान में बेहद मजबूत सुरक्षा दी गई है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्वाचन आयोग पर नेतृत्वक दबाव के कारण उसके प्रमुख को आसानी से हटाया न जा सके.
- हालांकि मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव दिए थे. इन प्रस्तावों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे. लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया.
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