Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान लोग अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से किया गया श्राद्ध और तर्पण पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.
श्राद्ध के लिए कौन सा समय शुभ है?
पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध रविवार, 27 सितंबर 2026 को किया जाएगा. इस दिन प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात 10:18 बजे से शुरू होकर 27 सितंबर की रात 8:58 बजे तक रहेगी.
प्रतिपदा श्राद्ध के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:16 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:52 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 12:52 बजे से 3:16 बजे तक
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 26 सितंबर 2026, रात 10:18 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 27 सितंबर 2026, रात 8:58 बजे
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घर पर श्राद्ध और तर्पण की सरल विधि
- स्नान और स्थान की सफाई: सुबह स्नान करके पूजा और श्राद्ध करने वाली जगह को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद गंगाजल का छिड़काव करें.
- सात्विक भोजन बनाएं: पितरों के लिए सात्विक भोजन तैयार करें. इसमें खीर, पूरी, सब्जी और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य व्यंजन बनाए जा सकते हैं.
- देवताओं को भोग लगाएं: भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले देवताओं के लिए भोग निकालें. परंपरा के अनुसार अग्नि देव को भी भोजन अर्पित किया जाता है.
- पंचबली निकालें: श्राद्ध में पंचबली की परंपरा भी है. इसमें गाय, कुत्ते, कौए, चींटी और देवताओं के लिए भोजन का कुछ हिस्सा अलग निकाला जाता है.
- ब्राह्मण को भोजन कराएं: परंपरा के अनुसार किसी योग्य ब्राह्मण को सम्मान के साथ भोजन कराएं. इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें वस्त्र, अन्न या दक्षिणा दें.
- पितरों का तर्पण करें: जल में काला तिल मिलाकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें. इस दौरान मन में श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखें.
- गीता का पाठ करें: पितृ पक्ष में श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. आप अपनी सुविधा के अनुसार गीता के किसी अध्याय का पाठ कर सकते हैं.
तर्पण करते समय करें इन मंत्रों का जाप
सामान्य पितृ मंत्र:
ॐ पितृ देवतायै नमः।
पितृ गायत्री मंत्र:
ॐ पितृ गणाय विद्महे जगद्धारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।
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