कोलकाता/नई दिल्ली : बंगाल की नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अभी नेतृत्वक में एक दूसरे कट्टर विरोधी रहे माकपा और तृणमूल नयी परिस्थिति में एक दूसरे के साथी बनते जा रहे हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व में तृणमूल आज सीपीएम के काफी करीब आ गई हैं. ममता बनर्जी ने सीपीएम महासचिव एमए बेबी से फोन पर बात की है. इतना ही नहीं, ममता चाहती हैं कि अगले हफ्ते दिल्ली में इंडिया अलायंस की बैठक हो. उन्होंने राहुल गांधी से भी फोन पर बात की और उनसे इस संबंध में पहल करने का अनुरोध किया.
बेबी और ममता के बीच हो रहा पत्राचार
जिस दिन आयोग से संबंधित समाचार एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित हुई, उसी दिन ममता बनर्जी ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे समेत कई विपक्षी नेताओं से फोन पर बात की. एम.ए. बेबी ने ज्ञानेश कुमार विवाद को लेकर देश के सभी विपक्षी नेताओं के साथ ममता को पत्र लिखा था. ममता ने सीपीएम महासचिव के पत्र के जवाब में एक प्रतिवाद पत्र भी लिखा.
अभिषेक ने पहले की बेबी से बात
पश्चिम बंगाल में सत्ता में रहते हुए ममता बनर्जी ने इंडिया अलायंस की बैठक में सीपीएम के साथ एक ही मेज पर बैठकर बैठक की, लेकिन उन्होंने कभी भी सीपीएम के महासचिव से अलग से बात नहीं की, राज्य में एकता की तो बात ही दूर है.
अभिषेक बनर्जी से की पहल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर सीपीएम महासचिव एमए बेबी से निजी बातचीत की. सूत्रों के अनुसार, बेबी और अभिषेक ने उस दौरान एसआईआर प्रक्रिया पर भी चर्चा की.
विपक्षी एकता पर जोर
सूत्रों का कहना है कि बेबी और ममता बनर्जी हिंदुस्तान गठबंधन से बाहर की नेतृत्वक पार्टियों – आम आदमी पार्टी, डीएमके, बीजद – को आयोग के मुद्दे पर साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. ममता-तृणमूल पर हमले की समाचार गणशक्ति अखबार में प्रकाशित हुई थी.
तृणमूल के पक्ष में माकपा
हाल ही में कोलकाता के मुकुंदपुर में ममता तृणमूल कांग्रेस के जुलूस पर हमले के आरोप लगे थे. इस घटना में कार्यकर्ता घायल हो गए थे. पूर्व विधायक हुमायूं कबीर भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. आरोप थे कि भाजपा ने उनकी पिटाई की थी. यह समाचार घटना के अगले दिन सीपीएम के मुखपत्र गणशक्ति में प्रकाशित हुई थी.
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क्या रहा है पुराना रिश्ता
ममता बनर्जी की नेतृत्वक दृष्टि से सबसे चर्चित मुद्दा वामपंथियों के खिलाफ उनका संघर्ष है. हिंदुस्तानीय नेतृत्व में ममता को वामपंथियों के 34 साल पुराने गढ़ को ध्वस्त करने वाली नेता के रूप में जाना जाता है. चाहे सड़कों पर प्रदर्शन हो, भूख हड़ताल हो या संसदीय नेतृत्व, सीपीएम को सत्ता से हटाने के लिए ममता का संघर्ष बंगाल के नेतृत्वक इतिहास में दर्ज होगा. हालांकि, अगर ममता बनर्जी भाजपा के विरोध में सीपीएम के साथ खड़ी होती हैं, तो यह एक नया इतिहास रचने जैसा होगा.
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