‘बालिका वधू’ की वो मासूम सी ‘आनंदी’ तो आपको याद ही होगी? जी हां, वही प्रत्युषा बनर्जी… जिसकी एक मुस्कान पर टीवी इंडस्ट्री फिदा थी.
एक कॉल रिकॉर्डिंग से बेकसूर साबित हुए राहुल राज
न्यायमूर्ति शिवकुमार डिगे की पीठ ने इस मामले में 1 अप्रैल 2016 को प्रत्युषा और राहुल के बीच हुई आखिरी फोन कॉल को सबसे अहम सबूत माना. कॉल की रिकॉर्डिंग से यह साफ हुआ कि राहुल राज, दिवंगत एक्ट्रेस को कोई भी आत्मघाती कदम उठाने से लगातार रोक रहे थे. उन्होंने कॉल पर यह भी कहा था कि वह अपनी गाड़ी मोड़ चुके हैं और तुरंत उनके पास वापस आ रहे हैं.
राहुल के वकीलों ने दी थी ये दलील
आखिरी बातचीत के अनुसार, प्रत्युषा काफी स्ट्रेस में थीं और उन्होंने अपनी इस हालत के लिए अपने माता-पिता समेत कई अन्य लोगों को भी जिम्मेदार ठहराया था. राहुल के वकीलों (आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे) ने भी दलील दी कि जब उनका मुवक्किल प्रत्युषा को बचाने की कोशिश कर रहा था, तो इसे आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता.
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि बिना किसी सुसाइड नोट के पुलिस ने बहुत जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज की थी. ऐसे में ट्रायल जारी रखना केवल न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
प्रत्युषा केस में कुछ ऐसे फंसे थे राहुल
The post 10 साल, अनगिनत सवाल और एक आखिरी कॉल रिकॉर्डिंग से बेकसूर साबित हुए राहुल राज, जमशेदपुर की ‘आनंदी’ केस में बड़ा ट्विस्ट appeared first on Naya Vichar.

