“कोई हरा नहीं पाएगा…जनता मालिक है, हम संतुष्ट हैं कि हम जीतेंगे…1500% उम्मीद है कि हम जीतेंगे.” ये दावा है मोकामा से जेडीयू विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह का, जो पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के लिए मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं. अनंत सिंह खुद जेडीयू के विधायक होते हुए भी जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ हैं, और तो और, वो जिस जन सुराज पार्टी का समर्थन कर रहे हैं, महज एक साल पहले उसी के नेता दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ा था.
बिहार विधानसभा चुनाव को अभी एक साल भी नहीं बीते हैं और एमएलसी चुनाव में अनंत सिंह ने अलग राह पकड़ ली. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का ऐलान करते ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर देने वाले अनंत ने अब जेडीयू से बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है. विधानसभा चुनाव से एमएलसी चुनाव आते-आते ऐसा क्या हुआ. नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अनंत सिंह, उन्हीं के चहेते के खिलाफ कैसे हो गए?
नीरज कुमार और अनंत सिंह में अदावत क्यों
- मीडिया रिपोर्ट और नेतृत्वक जानकारों के मुताबिक, नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच सियासी टकराव की शुरुआत साल 2015 से है. जो वक्त के साथ और गहरे होते गए. यह वह दौर था, जब बिहार में महागठबंधन की प्रशासन थी. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री थे.
- इस दौरान 24 जून 2015 को बाढ़ के पुटूस हत्याकांड के मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई. उनकी गिरफ्तारी को लेकर उस समय खूब चर्चा हुई और नेतृत्वक हलकों में इस कार्रवाई के जरिए अनंत सिंह के खिलाफ माहौल तैयार किया गया. हालांकि, इस दावे की पुष्टि को लेकर अलग-अलग नेतृत्वक तर्क दी जाती है.
- इसके कुछ ही महीनों बाद, नवंबर 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए और मोकामा सीट से अनंत सिंह को जेडीयू का टिकट कट गया. इस सीट से जेडीयू ने नीरज कुमार को मैदान में उतारा. हालांकि टिकट कटने के बाद भी अनंत सिंह मैदान में उतरे और जेल से ही निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. उस चुनाव में अनंत सिंह ने नीरज कुमार को 18,348 वोटों के अंतर से हरा दिया.
- इस चुनाव का असली रंग और सियासी खींचतान दिखा चुनावी प्रचार के दौरान, जब दोनों नेताओं के बीच सियासी बयानबाजी काफी तीखी रही और नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर गंभीर नेतृत्वक और आपराधिक आरोप लगाते हुए उन्हें निशाने पर लिया था. चुनाव प्रचार के दौरान उनके नाम से यह बयान भी सामने आया था कि अनंत सिंह नेतृत्व के नासूर और आपराधिक गिरोह के सरगना हैं. कानून उनके दरवाजे पर दस्तक दे चुका है, अब वे अपने अंतिम दिन गिन रहे हैं.
इसके अलावा और भी दूसरे मुद्दों को लेकर दोनों के बीच तल्ख तेवर दिखे.जो अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच खटास की वजह है.
अब जन सुराज की जीत का दावा कर रहे अनंत
बिहार के आठ सीटों पर एमएलसी का चुनाव हो रहा है, वैसे तो हर सीट पर मुकाबले का अपना रंग है, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है पटना स्नातक सीट की है. जहां बगावत और सियासत दोनों कदमताल करती हुई दिखाई दे रही है. गुरुवार को नामांकन के दौरान की तस्वीर ही देख लिजिए. जेडीयू के विधायक अनंत सिंह पीले रंग का गमछा लहराते नजर आ रहे. ऐसा लग रहा था कि वे जेडीयू नहीं जन सुराज के नेता हैं.जबकि यहां मुकाबला जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार और जनसुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह के बीच है.
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