पटना से कृष्ण कुमार की रिपोर्ट
गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव के बाद तटबंधों की सुरक्षा और आकस्मिक स्थिति से निपटने में लापरवाही बरतने के मामले में जल संसाधन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. विभाग ने कुल आठ अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है. इनमें सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, मुख्य अभियंता मुजफ्फरपुर के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है.
नए रिकॉर्ड पर पहुंचा था पानी
विभाग के अनुसार नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी में अभूतपूर्व जलस्राव हुआ. नेपाल के देवघाट में गंडक का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार कर गया और नया रिकॉर्ड बना. बिहार में भी बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में नदी का जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर को पार करते हुए नए रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. इस दौरान कई स्थानों पर गंडक के तटबंध क्षतिग्रस्त हुए.
खतरे के निशान से नीचे आने की संभावना
हालांकि अब नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है. सारण के रेवाघाट में जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से 177 सेमी घट चुका है और खतरे के निशान से 50 सेमी नीचे आकर सामान्य हो गया है. वैशाली के लालगंज में भी जलस्तर नए उच्चतम स्तर से 130 सेमी घटा है, लेकिन अभी यह खतरे के निशान से 52 सेमी ऊपर है. विभाग के मुताबिक लालगंज में भी जलस्तर तेजी से घट रहा है और अगले 24 घंटे पटनामें खतरे के निशान से नीचे आने की संभावना है.
तटबंधों पर अब दबाव नहीं
विभाग के अनुसार फिलहाल तटबंधों पर जलस्तर का दबाव नहीं है और सीपेज तथा पाइपिंग की समस्या भी नहीं है. क्षतिग्रस्त तटबंधों के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त फ्लड फाइटिंग मटेरियल का स्टॉक किया गया है. कट-एंड को सुरक्षित करने और टैगिंग का काम जारी है.
आकस्मिक कार्य तेजी से करने का निर्देश
विभाग ने बताया कि क्षतिग्रस्त तटबंधों का वरीय पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने तत्काल स्थल निरीक्षण कर आकलन किया था. इसके बाद आकस्मिक कार्य योजना के तहत तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया. लेकिन कुछ स्थानीय अभियंताओं द्वारा इसके क्रियान्वयन में शिथिलता और लापरवाही बरती गयी.
ब्रीच स्थल से हटने और संसाधन नहीं जुटाने का आरोप
जांच में सामने आया कि तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आकस्मिक परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया में देरी हुई. ब्रीच स्थल पर मौजूद रहकर मटेरियल और मैनपावर की मदद से कट-एंड को सुरक्षित करने के बजाय कुछ अभियंता स्थल से हट गये. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को तत्काल जुटाने में भी अक्षमता पायी गयी. मुख्यालय गोदाम पटना और अन्य जिलों से फ्लड फाइटिंग मटेरियल भेजने तथा अतिरिक्त अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति के बावजूद आकस्मिक कार्य योजना को जमीन पर लागू करने में शिथिलता बरती गयी.
भारी जनाक्रोश की स्थिति
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से समन्वय का भी अभाव विभागीय आकलन में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ आवश्यक समन्वय का अभाव भी सामने आया. इसको लेकर कुछ अभियंताओं के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भारी जनाक्रोश की स्थिति बनी. विभाग ने माना है कि आपदाजन्य आकस्मिक परिस्थिति में इस तरह की लापरवाही अक्षम्य है.
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इन सात अभियंताओं को किया गया निलंबित
- संतोष कुमार प्रभाकर, कार्यपालक अभियंता, छपरा
- मो. साजिद इकबाल, कार्यपालक अभियंता, गोपालगंज
- सुनील कुमार, सहायक अभियंता, छपरा
- विनोद कुमार, सहायक अभियंता, छपरा
- मो. जावेद अंसारी, सहायक अभियंता, गोपालगंज
- चंद्रशेखर कुमार, कनीय अभियंता, छपरा
- विकास कुमार, कनीय अभियंता, गोपालगंज
इन लोगों पर होगी विभागीय कार्रवाई
इसके अलावा कुमार मनोज गुप्ता, मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के विरुद्ध चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने और उसके बाद की जाने वाली आकस्मिक प्रतिक्रिया में शिथिलता एवं लापरवाही बरतने के आरोप में विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपदाजन्य आकस्मिक परिस्थिति में कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता और लापरवाही अक्षम्य होगी तथा इसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
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