रूस के साथ हिंदुस्तान की दोस्ती को लेकर अमेरिका और यूरोप के कई देश सवाल उठाते रहे हैं. खासकर यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद हिंदुस्तान के रूस के साथ रिश्तों और वहां से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने कई बार अपनी नाराजगी जाहिर की है. इसको लेकर अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि हिंदुस्तान रूस के साथ अपने रिश्ते किसी दूसरे देश के कहने पर नहीं बदलेगा. जयशंकर ने कहा कि रूस ने मुश्किल समय में हिंदुस्तान का साथ दिया है, इसलिए हिंदुस्तान उस पुराने साथ को नहीं भूल सकता.
रूस के साथ हिंदुस्तान की दोस्ती पर जयशंकर ने क्या कहा?
- रविवार को म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने हिंदुस्तान और रूस के रिश्तों को लेकर अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने कहा कि People don’t forget good history or bad history (लोग पुराने अच्छे-बुरे अनुभवों को नहीं भुलते).
- जयशंकर ने यह भी कहा कि 1950 के दशक से ही रूस और हिंदुस्तान के बीच अच्छे संबंध रहे हैं. उस समय दुनिया के कई देश पाकिस्तान की सैन्य प्रशासन के साथ थे, लेकिन सोवियत संघ ने कई मौकों पर हिंदुस्तान का साथ दिया.
- विदेश मंत्री जयशंकर ने हिंदुस्तान और रूस की दोस्ती को समझने के लिए 1971 के हिंदुस्तान-पाकिस्तान युद्ध को बड़ा उदाहरण बताया. जयशंकर ने कहा कि उस समय हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था.
- अमेरिका पाकिस्तान के साथ खड़ा था और उसने अपनी नौसेना का एक बड़ा हिस्सा बंगाल की खाड़ी की तरफ भेजा था. लेकिन दूसरी तरफ सोवियत संघ ने हिंदुस्तान का समर्थन किया.
- यही वजह है कि हिंदुस्तान में रूस को लेकर एक पुराना भरोसा बना हुआ है. जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान अपने इसी पुराने अनुभव को ध्यान में रखकर रूस के साथ रिश्ते रखता है.
हिंदुस्तान रूस से दूरी क्यों नहीं बना रहा?
- यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं.
- पश्चिमी देश खासकर अमेरिका चाहता है कि रूस पर दबाव बढ़े और दूसरे देश भी रूस के साथ अपने कारोबार और संबंध कम करें. लेकिन हिंदुस्तान ने ऐसा नहीं किया, हिंदुस्तान का कहना है कि वह अपने फैसले खुद लेगा और सबसे पहले अपने देश के हित को देखेगा.
- जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान का रूस के साथ अनुभव अब तक अच्छा रहा है। उन्होंने इसे “positive and consistently positive” बताया. जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान को रूस के साथ लंबे समय से सहयोग मिला है और इसलिए वह सिर्फ दूसरे देशों के दबाव में आकर यह रिश्ता खत्म नहीं करना चाहता.
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रूस से तेल खरीदने पर हिंदुस्तान का क्या कहना है?
- हिंदुस्तान और पश्चिमी देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद रूस से तेल खरीदने को लेकर है. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर कई प्रतिबंध लगाए गए. इसके बावजूद हिंदुस्तान ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा.
- हिंदुस्तान का कहना है कि उसका काम अपने लोगों के लिए तेल की जरूरत पूरी करना है. अगर किसी देश से तेल बेहतर कीमत पर मिलता है, तो हिंदुस्तान वहां से तेल खरीद सकता है.
- विदेश मंत्रालय ने हिंदुस्तान और रूस के रिश्तों की आलोचना को अनुचित और तर्कहीन बताया है. हिंदुस्तान का कहना है कि अमेरिका ने भी शुरुआत में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को संभालने के लिए हिंदुस्तान को रूस से तेल खरीदने की बात कही थी. लेकिन अब दूसरी बात कर रहा.
- हिंदुस्तान का यह भी कहना है कि वह अपनी जरूरतों के लिए सिर्फ एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता. म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने कहा कि हिंदुस्तान अलग-अलग देशों से तेल और दूसरी जरूरी चीजें खरीदना चाहता है. ताकी अगर किसी एक देश से सप्लाई में दिक्कत आती है, तो हिंदुस्तान के पास दूसरे विकल्प भी मौजूद रहें.
क्या हिंदुस्तान यूक्रेन युद्ध का समर्थन करता है?
- नहीं, हिंदुस्तान ने लगातार कहा है कि युद्ध खत्म होना चाहिए और समस्या का समाधान बातचीत से होना चाहिए. हिंदुस्तान न तो रूस को खुलकर समर्थन दे रहा है और न ही यूक्रेन के साथ अपने संबंध खराब करना चाहता है. हिंदुस्तान का कहना है कि दोनों देशों को बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहिए.
- जयशंकर ने बताया कि हिंदुस्तान ने रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत की है. इन बातचीत में काला सागर में जहाजों पर हमले, अनाज की सप्लाई, ऊर्जा और जरूरी बुनियादी ढांचे पर हमले जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं.
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