झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और जरूरी दवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई. इसमें राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों की संबंधित बिल्डिंग में जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी शुरू करने का निर्देश दिया गया. सभी सदर अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी 15 दिनों के भीतर जन औषधि केंद्र खोलने को कहा गया है. दवाओं और चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद तथा अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा का भी निर्देश सभी जिलों को दिया गया है. अधिकारियों को आवश्यक दवाओं की सूची तैयार कर पर्याप्त स्टॉक रखने और नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया.
15 दिनों में मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगे दवा केंद्र
राज्य के जिन मेडिकल कॉलेजों में जन औषधि केंद्र या अमृत फार्मेसी नहीं है, वहां 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी कर इसका संचालन शुरू करने का निर्देश दिया गया है. रिम्स में मुख्य अस्पताल के अलावा ट्रॉमा सेंटर, नेत्र संस्थान और दंत चिकित्सा संस्थान जैसी संबंधित बिल्डिंग में भी जरूरत के अनुसार ये सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है. दवा केंद्र ऐसे स्थानों पर खोलने को कहा गया है, जहां मरीज और उनके परिजन आसानी से पहुंच सकें. रिसेप्शन, मुख्य प्रवेश द्वार या निकास द्वार के आसपास के स्थान को प्राथमिकता देने को कहा गया है. अस्पतालों में जरूरी दवाओं के स्टॉक की लगातार निगरानी होगी. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मरीज को इलाज के दौरान जरूरी दवा उपलब्ध हो और प्रशासनी व्यवस्था के बाहर से महंगी दवा खरीदने की मजबूरी कम हो.
जनऔषधि दुकानों में दवाओं की निगरानी के लिए बनी कमेटी
राज्य के मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों में संचालित प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमेटी का गठन कर दिया है. कमेटी अभियान निदेशक की अध्यक्षता में इसकी पूरी रूपरेखा तैयार कर अपनी रिपोर्टस्वास्थ्य सचिव को सौंपेगी. कमेटी यह देखेगी कि जनऔषधि की दुकानों में दवाओं की उपलब्धता कितनी है, किन दवाओं की मांग सबसे अधिक है. उस हिसाब से दवाएं उपलब्ध करायी जायेगी.
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जनऔषधि केंद्रों पर एक माह में मिलने लगेगी कैंसर की दवा
झारखंड की जनऔषधि की दुकानों में एक से डेढ़ महीने में कैंसर की दवाएं उपलब्ध हो जायेंगी. इसके लिए केंद्र प्रशासन के मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स ने प्रयास शुरू कर दिया है. पहले चरण में जनऔषधि के मेडिसिन बास्केट में उपलब्ध 69 दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करायी जायेगी. इसके बाद आने वाले दिनों में 30 से 40 अन्य कैंसर की दवाओं को भी इसमें जोड़ा जायेगा. प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के सीइओ शांतनु कुमार अग्रहरि ने बताया कि ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से दवाओं में उपयोग होने वाले रसायनों की कमी हो गयी थी
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