Bihar DGP बिहार में स्थायी DGP की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गयी है. कार्यवाहक DGP प्रीता वर्मा को एक्सटेंशन मिलने के बाद उनके स्थायी DGP बनने की चर्चा भी तेज हो गयी है. प्रीता वर्मा बिहार पुलिस के इतिहास में DGP की जिम्मेदारी संभालने वाली पहली स्त्री IPS अधिकारी हैं. हालांकि, इस पद की दौड़ में 1992 बैच के बी. श्रीनिवासन, जितेंद्र कुमार और जेएस गंगवार समेत कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम भी चर्चा में हैं.
प्रीता वर्मा 1991 बैच की IPS अधिकारी हैं और मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली हैं. फिलहाल वह बिहार की कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. प्रशासन ने उन्हें अगले आदेश तक इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने की अनुमति दी है. इसके बाद माना जा रहा है कि स्थायी DGP के लिए उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
विनय कुमार के इस्तीफे के बाद बढ़ी हलचल
1991 बैच के IPS अधिकारी विनय कुमार के DGP पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार में नये DGP की नियुक्ति को लेकर कवायद शुरू हुई. बिहार कैडर के अधिकारी विनय कुमार ने IIT खड़गपुर से पढ़ाई की थी. उन्होंने दिसंबर 2024 में बिहार DGP की जिम्मेदारी संभाली थी. उनका दो साल का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा होना था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया.
विनय कुमार के इस्तीफे के बाद DGP पद के लिए कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नामों पर चर्चा शुरू हुई. इनमें प्रीता वर्मा के अलावा बी. श्रीनिवासन, जितेंद्र कुमार और जेएस गंगवार समेत अन्य अधिकारी भी शामिल हैं.
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प्रीता वर्मा के नाम के पीछे क्या है नेतृत्वक गणित?
IPS अधिकारी अरविंद पांडेय के मुताबिक, प्रीता वर्मा बिहार की वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं. उनकी वरिष्ठता को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी दी है. हालांकि, उनके मुताबिक इस फैसले के पीछे नेतृत्वक समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
अरविंद पांडेय का कहना है कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रीता वर्मा की पृष्ठभूमि को भी नेतृत्वक नजरिये से देखा जा रहा है. उनका दावा है कि प्रीता वर्मा जिस जाति और समुदाय से आती हैं, उसकी राजस्थान में करीब आठ प्रतिशत और झारखंड में करीब 36 प्रतिशत आबादी है.
उनके मुताबिक, इसी सामाजिक समीकरण को देखते हुए प्रशासन प्रीता वर्मा को बिहार का स्थायी DGP बनाने पर विचार कर सकती है. हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
बिहार की पहली स्त्री DGP बनने की राह में प्रीता वर्मा
अगर प्रीता वर्मा को स्थायी DGP बनाया जाता है, तो वह बिहार पुलिस की पहली स्त्री स्थायी DGP होंगी. वह राज्य की वरिष्ठ स्त्री पुलिस अधिकारियों में शामिल हैं. इससे पहले वह DG ट्रेनिंग के पद पर भी रह चुकी हैं.
केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान प्रीता वर्मा ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की CEO की जिम्मेदारी भी संभाली थी. वर्ष 2023 में उन्हें विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था.
2028 में रिटायर होंगी प्रीता वर्मा
प्रीता वर्मा की सेवा के अभी करीब दो वर्ष बाकी हैं. वह वर्ष 2028 में सेवानिवृत्त होंगी. ऐसे में स्थायी DGP के तौर पर उनकी नियुक्ति होने पर उन्हें करीब दो साल तक इस पद पर काम करने का मौका मिल सकता है.
बिहार में नए DGP की तलाश तेज, इन नामों पर चर्चा
| नाम | बैच | वर्तमान तैनाती |
| प्रीता वर्मा | 1991 | वर्तमान प्रभारी डीजीपी (सबसे वरिष्ठ अधिकारी) |
| बी. श्रीनिवासन | 1992 | डीजी, एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) |
| जितेंद्र सिंह गंगवार | 1993 | डीजी, विजिलेंस (निगरानी) |
| जितेंद्र कुमार | 1993 | डीजी रैंक के अधिकारी |
| कुंदन कृष्णन | 1994 | डीजी, एसटीएफ और स्पेशल ब्रांच |
| डॉ. परेश सक्सेना | 1994 | डीजी रैंक के अधिकारी |
| निर्मल कुमार आजाद | 1994 | डीजी रैंक के अधिकारी |
12 लाख रुपये बैंक में कैश जमा
वर्ष 2025 में दिये गये संपत्ति और देनदारी के विवरण के मुताबिक, प्रीता वर्मा के पास 35 हजार रुपये नकद थे. वहीं, बैंक और वित्तीय संस्थानों में करीब 12.08 लाख रुपये जमा होने की जानकारी दी गयी थी. घोषणा के अनुसार, उनके पास करीब 60 तोला सोने के आभूषण हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 35 लाख रुपये बतायी गयी है. इसके अलावा करीब तीन किलो चांदी के जेवरात और अन्य सामान भी दर्ज हैं, जिनकी कीमत करीब 1.80 लाख रुपये बतायी गयी है.
संपत्ति विवरण में LIC की कई पॉलिसियों और SBI की एक फिक्स्ड डिपॉजिट का भी उल्लेख है. अचल संपत्ति, मकान/अपार्टमेंट और जमीन से संबंधित कॉलम में कोई राशि दर्ज नहीं की गयी है. आयकर के तौर पर 9,32,788 रुपये की राशि का उल्लेख संपत्ति विवरण में किया गया है.
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