अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरव दास जो नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान जेन जी के हीरो बन गए थे, उन्हें डिटेन कर लिया गया है. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मेट्रो, ट्रेन और सड़क यातायात पर भी रोक लगाई गई ताकि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक ना पहुंच सकें. यहां सवाल यह उठता है कि अगर अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी को आंदोलन सफल बनाना था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना था, तो उन्होंने दिल्ली पुलिस को यह मौका ही क्यों दिया कि वह उनके खिलाफ घेराबंदी कर दे? यह स्थिति दीपके की मंशा पर सवाल खड़े करती है. आइए समझते हैं, वो कौन से संकेत हैं, जो यह बता रहे हैं कि दीपके नहीं चाहते थे कि यह आंदोलन सफल हो.
प्रदर्शन की इजाजत मांगने में देरी करना
सीजेपी ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को किया, जबकि वे इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि प्रशासन यह नहीं चाहती है कि प्रदर्शन हो. ऐसे में उन्हें नियमों का खास ख्याल रखते हुए समय पर इजाजत के लिए आवेदन करना चाहिए था, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. परिणाम यह हुआ कि दिल्ली पुलिस ने आवेदन देर से करने की बात कहकर प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी.
दिल्ली जाने की सूचना को किया वायरल
आमतौर पर प्रशासन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान नेताओं को इस बात की शंका रहती है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. इस वजह से वे अपने मूवमेंट को गुप्त रखते हैं. वे यह स्पष्ट नहीं करते हैं कि वे कैसे और कब प्रदर्शन स्थल तक पहुंच सकते हैं. अभिजीत दीपके और सीजेपी के नेताओं ने खुलकर बताया कि वे कैसे और कब दिल्ली पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम गिरफ्तार होने आ रहे हैं.
नहीं बनाया प्लान बी
किसी भी बड़े आंदोलन में जब नेताओं को पहले से गिरफ्तारी की आशंका होती है तो वे प्रदर्शनकारियों को एकजुट रखने और आंदोलन जारी रखने के लिए वैकल्पिक रणनीति तैयार रखते हैं. जिसे कहा जाता है कि अगर कोई योजना सफल ना हो तो प्लान बी रेडी रखना चाहिए. सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका ने गिरफ्तारी की आशंका पहले ही जताई थी. इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन को सफल बनाने के लिए कोई प्लान बी रेडी नहीं रखा. 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया, उसके बाद अभिजीत दीपके ने वीडियो जारी कर यह कहा कि आंदोलन की कमान अब अजिंक्य शिंदे संभालेंगे. अजिंक्य शिंदे एक नया नाम हैं, जिन्हें प्रदर्शनकारी जानते भी नहीं है, ऐसे में विश्वास की कमी होती है और आंदोलन कमजोर होता है.
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