आज रॉयल एनफील्ड को किसी पहचान की जरूरत नहीं है. हिंदुस्तान ही नहीं, दुनियाभर में इस बाइक के चाहने वालों की कमी नहीं है. हिंदुस्तानीय बाजार में भी कंपनी की बाइक्स को खूब पसंद किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रॉयल एनफील्ड का इतिहास काफी पुराना है? इस इंडो-ब्रिटिश बाइक ब्रांड ने सालों के दौरान एक लंबा सफर तय किया है. कभी इसकी बाइक्स ब्रिटेन में बनाई जाती थीं, लेकिन आज हिंदुस्तान में इनका बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन होता है. अब कंपनी के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए कुछ नए वीडियो में इसी बदलाव की कहानी दिखाई गई है, जो बताती है कि ब्रिटेन से शुरू हुआ यह सफर कैसे हिंदुस्तान तक पहुंचा.
ब्रिटेन की एक फैक्ट्री से शुरू हुआ था रॉयल एनफील्ड का सफर
इन वीडियो में दिखाई गई बातों को समझने से पहले रॉयल एनफील्ड के इतिहास पर एक नजर डालना जरूरी है. इस कंपनी की शुरुआत ब्रिटेन में हुई थी. साल 1901 में Redditch फैक्ट्री में रॉयल एनफील्ड की पहली मोटरसाइकिल तैयार की गई. इसे बॉब वॉकर स्मिथ और जूल्स गोबिएट ने डिजाइन किया था. इस बाइक में 1.75 hp का इंजन लगा था, जिसे स्टीयरिंग हेड के आगे फिट किया गया था. इसकी एक खास बात यह भी थी कि इंजन से पिछले पहिये को पावर मिलती थी.
शुरुआत में इस तरीके से मोटरसाइकिलों की असेंबलिंग करके हिंदुस्तान में कारोबार शुरू किया गया. हालांकि, कंपनी का टारगेट सिर्फ विदेश से आए पुर्जों को जोड़कर बाइक तैयार करना नहीं था, बल्कि मोटरसाइकिलों का पूरी तरह हिंदुस्तान में ही प्रोडक्शन करना था. इस टारगेट को हासिल करने के लिए कंपनी की टीम को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अगले कुछ सालों में इन मुश्किलों को दूर किया गया और हिंदुस्तान में ही मोटरसाइकिल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए. ऑनलाइन शेयर किए गए वीडियो में भी इन तकनीकी चुनौतियों से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताई गई हैं.
जब विमान के हिस्सों से तैयार हुई बाइक के पुर्जे बनाने वाली मशीन
उस दौर में मद्रास (अब चेन्नई) की फैक्ट्री में रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिलों के पुर्जे तैयार करना आसान नहीं था. दरअसल, कुछ जरूरी मशीनें हिंदुस्तान में उपलब्ध ही नहीं थीं. इनमें एक हाइड्रोलिक प्रेस भी शामिल थी, जिसकी मदद से स्टील को आकार देकर फ्यूल टैंक और मडगार्ड जैसे पार्ट्स बनाए जाते थे. ऐसे में इंजीनियर हैरी सैंडफोर्ड ने इस परेशानी का एक अनोखा हल निकाला. उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में क्रैश हुए डगलस DC-3 विमान के निचले हिस्से (अंडरकैरेज) का यूज करके एक हाइड्रोलिक प्रेस तैयार कर दी.
इसके बाद इसी मशीन की मदद से हिंदुस्तानीय स्टील को रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिलों के पुर्जों में ढाला जाने लगा. धीरे-धीरे कंपनी को विदेश से पुर्जे मंगाकर क्रेट में भरकर भेजने की जरूरत भी कम हो गई. साल 1967 तक मोटरसाइकिलों का पूरा प्रोडक्शन मद्रास फैक्ट्री में शिफ्ट कर दिया गया. बाद में ब्रिटेन की रेडडिच फैक्ट्री भी बंद हो गई और उसकी जमीन डेवलपर्स को बेच दी गई. कंपनी ने अपने सोशल मीडिया कैरोसेल में इस दिलचस्प इतिहास से जुड़ी जानकारी शेयर की है.
ये भी पढ़ें: Royal Enfield ने 2019 में उतारी थी ये बाइक, सिर्फ एक साल बाद ही बंद हो गई बिक्री, आखिर क्या थी वजह?
The post कभी विदेश से क्रेट में आते थे रॉयल एनफील्ड बुलेट के पुर्जे, आज हिंदुस्तान में बनती हैं, जानिए इस बदलाव की दिलचस्प कहानी appeared first on Naya Vichar.

