अभिजीत दीपके को शुक्रवार (16 अक्टूबर) के मार्च में शामिल होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था. इसी वजह से उन्हें शनिवार (17 अक्टूबर) को कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया. रिहा होने के बाद दीपके ने CJP के दो अन्य नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. उन्होंने लिखा, “अब बस अपने भाइयों के रिहा होने का इंतजार है.”
इस हफ्ते की शुरुआत में सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन पर पुलिस के आदेशों के बावजूद जंतर-मंतर में घुसने और शांति भंग करने की कोशिश करने का आरोप है.
अभिजीत दीपके ने एक्स पर क्या लिखा?
दीपके की रिहाई की बड़ी वजह क्या थी?
दीपके को शनिवार को मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया. मजिस्ट्रेट ने उन्हें 50,000 रुपये का मुचलका भरने और शांति भंग नहीं करने का लिखित आश्वासन देने का आदेश दिया. सुनवाई के बाद दीपके मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से बाहर आ गए.
अधिकारियों ने NDTV को बताया कि दीपके की रिहाई की एक बड़ी वजह यह थी कि वह मार्च में शामिल होने के लिए मौके पर पहुंचे ही नहीं थे. वहीं, सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर पहुंचे थे. सूत्रों के मुताबिक, दोनों को वहां नहीं जाने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बावजूद वे कथित तौर पर चुपके से पहुंचे और अशांति फैलाने की कोशिश की. इसी अंतर को दोनों मामलों में अलग कार्रवाई की वजह बताया गया है.
CJP नेताओं पर एक ही कानून के तहत कार्रवाई
दोनों मामलों में एक ही कानून के तहत कार्रवाई की गई थी. पुलिस के मुताबिक, दीपके को शांति भंग करने की आशंका से जुड़े एक नए मामले में हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था. धारा 170 के तहत पुलिस किसी संज्ञेय अपराध (इसमें पुलिस कानून के तहत बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है) को रोकने के लिए व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है. वहीं, धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के लिए मुचलका भरने का आदेश दे सकता है. इन धाराओं के तहत कार्रवाई किसी अपराध में मुकदमा चलाने के समान नहीं है.
CJP के नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को भी 14 अक्टूबर को हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया था. इस दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को इस शर्त पर मुचलके पर रिहा कर दिया गया कि वह अगले छह महीने तक शांति भंग नहीं करेंगे.
सौरव दास, आशुतोष रांका की रिहाई क्यों नहीं हुई?
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे पर अतिक्रमण, मुचलके की शर्त तोड़ने और प्रशासनी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप लगे थे. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आशंका जताई कि रिहा होने पर वे दोबारा कानून तोड़ सकते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए उकसा सकते हैं. इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. वहीं, अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार की शर्त पर रिहा किया गया. उन्हें 6 महीने तक शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया. दास और रांका की हिरासत 18 अक्टूबर, रविवार को खत्म हो रही है.
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