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हर साल नया बवाल, डॉक्यूमेंट्री पर रोक से लेकर गोलीकांड तक, कब-कब जामिया बना ‘बवालिया’

Jamia University Controversies: NIRF रैंकिंग में ऑल टाइम टॉपर, IAS IPS की फैक्ट्री कहे जाने वाली दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है. यूनिवर्सिटी में ताजा विवाद छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग, कैंपस की दीवारों पर लिखे नारों और छात्रों-सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव को लेकर है.

जामिया में आखिरी छात्रसंघ चुनाव 2005 में हुए थे. 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया गया था. छात्रों ने 12 अक्टूबर से छात्रसंघ बहाल करने और चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. इससे पहले भी यूनिवर्सिटी में कई बार विवाद देखने को मिले हैं.

पिछले 6-7 सालों में जामिया के रिकॉर्ड को देखा जाए तो इस यूनिवर्सिटी में लगभग साल नया बवाल देखने को मिला है. हालांकि, इसी साल अप्रैल महीने में यूनिवर्सिटी के कुलपति मजहर आसिफ के एक बयान ने भी बवाल खड़ा किया था.

“हम हिंदुस्तानीय हैं, क्योंकि हमारे DNA में महादेव का DNA है.” — मजहर आसिफ, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति के वायरल वीडियो में कथित बयान

आइए जानते हैं जामिया से जुड़ी ऐसी पांच घटनाएं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी-

2019: CAA प्रदर्शन के दौरान कैंपस में घुसी पुलिस

जामिया से जुड़ा सबसे चर्चित विवाद 15 दिसंबर 2019 को सामने आया. उस समय नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे थे. दिल्ली में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया. जामिया के आसपास प्रदर्शन के दौरान बसों और दूसरी गाड़ियों में आगजनी तथा पथराव की घटनाएं हुईं.

इसके बाद पुलिस विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुई. छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ मारपीट की और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस घटना के वीडियो सामने आने के बाद देशभर में विरोध हुआ. पुलिस का कहना था कि हिंसा में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की गई थी.

जामिया की स्टूडेंट सफूरा जरगर (Image: PTI)

सफूरा जरगर उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक अलग मामले में भी आरोपी थीं. ऐसे में उनके कैंपस प्रवेश पर रोक के फैसले ने विश्वविद्यालय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र अधिकारों और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर बहस छेड़ दी.

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2022: छात्रों के बीच झड़प और गोलीकांड

29 सितंबर 2022 को जामिया की लाइब्रेरी में दो छात्र समूहों के बीच झड़प की समाचार सामने आई. पुलिस के मुताबिक, इस दौरान एक छात्र नोमान चौधरी के सिर में चोट लगी. उसे इलाज के लिए होली फैमिली अस्पताल ले जाया गया.

पुलिस के अनुसार, इसके बाद दूसरे समूह का एक छात्र अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचा और वहां नौमान अली पर गोली चला दी. नौमान अली के सिर में गोली लगने से चोट आई और उन्हें इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया. अस्पताल ने भी दो समूहों के बीच झड़प और इमरजेंसी वार्ड के पास गोली चलने की पुष्टि की थी.

इस घटना ने कैंपस में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया. मई 2023 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2022 की झड़प से जुड़े मामले में 15 छात्रों पर कार्रवाई की गई थी. इनमें तीन छात्रों को निष्कासित करने की कार्रवाई भी शामिल थी.

2023: डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर विवाद

25 जनवरी 2023 को जामिया में BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद हुआ. स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में डॉक्यूमेंट्री दिखाने की योजना बनाई थी.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि स्क्रीनिंग के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और बिना अनुमति कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी जाएगी. इसके बाद कैंपस के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई. दिल्ली पुलिस ने स्क्रीनिंग की कोशिश के दौरान कम से कम एक दर्जन विद्यार्थियों को हिरासत में लिया. इस घटनाक्रम के बीच विश्वविद्यालय में कक्षाएं भी प्रभावित हुईं.

जामिया कैंपस की तस्वीर (ANI)

यह डॉक्यूमेंट्री गुजरात में 2002 के दंगों और उस समय नरेंद्र मोदी की भूमिका से जुड़े सवालों पर आधारित थी. हिंदुस्तान प्रशासन ने इससे जुड़े ऑनलाइन कंटेंट को रोकने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था. डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दूसरे विश्वविद्यालयों में भी विवाद हुआ था.

2024: बाबरी मस्जिद को लेकर नारेबाजी

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन जामिया में कुछ छात्रों ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के विरोध में नारे लगाए. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को वहां से हटाया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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