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एक ऐसा रहस्यमयी राजा, जो हर महीने बदल लेता था अपना स्त्री और पुरुष रूप

कल्पना कीजिए एक ऐसे राजा की, जो एक महीने पुरुष रहता था और अगले महीने स्त्री बन जाता था. उसका जीवन किसी रहस्य से कम नहीं था. कभी वह राजकाज संभालता, तो कभी उसका पूरा अस्तित्व बदल जाता. यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित राजा सुद्युम्न की कथा है. इस कहानी में जन्म, श्राप, रूप परिवर्तन, प्रेम और एक ऐसे वरदान का वर्णन मिलता है, जिसने राजा का जीवन हमेशा के लिए बदल दिया.

जब इला बन गईं सुद्युम्न

श्रीमद्भागवत महापुराण के 9वें स्कंध के अध्याय एक में राजा सुद्युम्न की कहानी है. कथा के अनुसार, वैवस्वत मनु के घर पहले इला नाम की कन्या का जन्म हुआ था.

मनु पुत्र चाहते थे. ऐसे में महर्षि वशिष्ठ ने भगवान विष्णु की प्रार्थना की. इसके बाद इला पुरुष रूप में बदल गईं और उनका नाम सुद्युम्न रखा गया.

समय बीतने के साथ सुद्युम्न बड़े हुए. एक दिन वे अपने साथियों के साथ शिकार करने जंगल गए. उन्हें नहीं पता था कि इस यात्रा के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदलने वाला है.

राजा सुदुम्न और इला की सांकेतिक तस्वीर (फोटो- एआई)

जंगल में जाते ही बदल गया रूप

सुद्युम्न जिस जंगल में पहुंचे, वह भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा हुआ था. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने उस वन के लिए ऐसा विधान बनाया था कि वहां प्रवेश करने वाला पुरुष स्त्री बन जाता था.

जैसे ही सुद्युम्न और उनके साथी उस वन में पहुंचे, सभी का रूप बदल गया. सुद्युम्न भी पुरुष से स्त्री बन गए. उनके घोड़े तक घोड़ी बन गए. जो राजा कुछ समय पहले तक पुरुष रूप में शिकार करने निकले थे, अब उनका रूप पूरी तरह बदल चुका था.

बुध से हुआ विवाह, जन्मे पुरूरवा

स्त्री रूप में सुद्युम्न का नाम इला हो गया. इसी दौरान उनकी मुलाकात चंद्रमा के पुत्र बुध से हुई. आगे चलकर इला और बुध का विवाह हुआ. दोनों से पुरूरवा नाम के पुत्र का जन्म हुआ.

पुरूरवा आगे चलकर एक प्रसिद्ध राजा बने. उनका नाम चंद्रवंश की वंश परंपरा में भी मिलता है. लेकिन सुद्युम्न की कहानी में अभी एक और मोड़ आना बाकी था. वे अपने पुरुष रूप में वापस लौटना चाहते थे.

शिव के वरदान से बदला जीवन

सुद्युम्न की परेशानी देखकर महर्षि वशिष्ठ ने भगवान शिव से प्रार्थना की. वे चाहते थे कि सुद्युम्न को उनका पुरुष रूप वापस मिल जाए.

भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की. हालांकि, इसके साथ एक शर्त भी जुड़ी थी. शिव के वरदान के अनुसार, सुद्युम्न एक महीने पुरुष और अगले महीने स्त्री रूप में रह सकते थे.

इस तरह सुद्युम्न को पुरुष रूप वापस तो मिला, लेकिन उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया. अब उन्हें हर महीने अपने रूप में होने वाले इस बदलाव के साथ जीना पड़ा.

राजा सुद्युम्न से जुड़ी घटनाएं

स्थिति राजा सुद्युम्न / इला की स्थिति घटना / कारण परिणाम
पहली कन्या रूप (इला) वैवस्वत मनु के घर जन्म मनु द्वारा पुत्र प्राप्ति हेतु वशिष्ठ से प्रार्थना
दूसरी पुरुष रूप (सुद्युम्न) वशिष्ठ की विष्णु प्रार्थना से रूप परिवर्तन राजकाज संभालना और जंगल में शिकार स्पोर्ट्सने जाना
तीसरी स्त्री रूप (इला) शिव-पार्वती के शापयुक्त वन में प्रवेश घोड़े भी घोड़ी बने, बुध से विवाह और पुरूरवा का जन्म
चौथी एक महीने पुरुष, एक महीने स्त्री वशिष्ठ की शिव से प्रार्थना पर वरदान शिव की शर्त के अनुसार हर महीने रूप परिवर्तन का चक्र

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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