Dularchand Yadav Murder Case जेडीयू के एमएलसी प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध मोकामा के विधायक अनंत सिंह के लिए मुश्किलें बढ़ाता दिख रहा है. जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की पहल की गयी है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है. इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की गयी है.
इस बीच, 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अहम सुनवाई होनी है. ऐसे में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं. गौरतलब है कि पिछले साल 30 अक्टूबर, 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गयी थी.
जेल में रहते अनंत सिंह ने जीता था विधानसभा चुनाव
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आये थे.
अनंत सिंह की जमानत को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने याचिका दायर कर अनंत सिंह की जमानत रद्द करने और उन्हें दोबारा जेल भेजने की मांग की है. नीरज कुमार को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उनके दादा को न्याय मिलेगा.
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बिहार प्रशासन के जवाबी हलफनामा से बढ़ी परेशानी
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने इस मामले में बिहार प्रशासन को पक्षकार संख्या एक और अनंत सिंह को पक्षकार संख्या दो बनाया है. सूत्रों के मुताबिक, राज्य प्रशासन ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया था.
हलफनामे में कहा गया है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड की पुलिस जांच में अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाये गये आरोप सही पाये गये हैं. इसमें जांच के दौरान एसडीपीओ और एसपी स्तर पर की गयी निगरानी का भी उल्लेख किया गया है. साथ ही, जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किये जाने की जानकारी दी गयी है.
अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण होगा. हालांकि, जमानत रद्द करने को लेकर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगा.
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