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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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बिहार के 15 जिले बाढ़ प्रभावित, 2 हजार गांव हाई रिस्क जोन में, CM सम्राट ने नदियों को लेकर बताया प्लान

Samrat Chaudhary: बिहार के कई हिस्सों में हर साल बाढ़ की वजह से परेशानी लोगों को झेलनी पड़ती है. नेपाल में होने वाली मूसलाधार बारिश की वजह से बिहार में खतरा बढ़ जाता है. हर साल की तरह इस साल भी पहले ही प्रशासन की तरफ से रोकथाम की तैयारी कर ली गई. ऐसे में आज एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बाढ़ का जिक्र किया. सीएम बोले- चार नदियां कर रहीं बिहार को बर्बाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार दुनिया की सबसे घनी आबादी वाला राज्य है. बिहार एक ओर जहां सुखाड़ से परेशान रहता है तो दूसरी ओर बाढ़ भी बिहार को बर्बाद करती है. नेपाल के पानी से सबसे ज्यादा परेशानी होती है. चार बड़ी नदियां बिहार को बर्बाद कर रहीं हैं. सीएम सम्राट चौधरी ‘ईस्टर्न जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-कंसल्टेशन ऑन मिसिंग एंड ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए. नदियों को लेकर बताई प्लानिंग इस दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि साउथ बिहार से डेढ़ गुनी आबादी नॉर्थ बिहार में रहती है. 22 में 15 जिले के बाढ़ प्रभावित हैं. लेकिन, अब दो हजार गांव ही हाई रिस्क जोन में हैं. कहा कि बिहार में पहले 22 लाख हेक्टेयर ही खेती की जमीन थी. अब सिर्फ नॉर्थ बिहार में 32 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की व्यवस्था है. गंगा, गंडक और कोसी नदी को पूरी तरह से व्यवस्थित किया जायेगा. गंगा और कोसी के जलस्तर में बढ़ोतरी गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से नवगछिया पुलिस जिला के तटवर्ती इलाकों में तटबंधों पर दबाव बढ़ने लगा है. शनिवार सुबह 6 बजे जारी जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस्माईलपुर-बिंद टोली, राघोपुर, मदरौनी और जेबी चोरहर चारों प्रमुख जगहों पर नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन मुद्दों पर भी की चर्चा कार्यक्रम के दौरान सीएम ने अन्य मुद्दों पर भी बातचीत की. उन्होंने कहा, पूरे बिहार में छह महीने में स्टील, न्यूक्लियर प्लांट लगाने की निवेशकों ने सहमति दी है. 51 लाख करोड़ रुपये का निवेश बिहार में होगा. कहा कि बिहार में इंडस्ट्री आयेगी, तभी लोग स्थिर होंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोटा में पढ़ने वाला और पढ़ाने वाले दोनों बिहारी हैं. देश में एक तिहाई अधिकारी बिहार और यूपी से हैं. हमारे पास टॉप और बॉटम दोनों हमारे पास हैं. इनके लिए बिहार में ही इंतजाम किया जा रहा है. Also Read:‘कुछ लोगों का लक्षण सुधरने वाला नहीं’, RJD विधायक भाई वीरेंद्र फिर भड़के, प्रशासन को भी निशाने पर लिया The post बिहार के 15 जिले बाढ़ प्रभावित, 2 हजार गांव हाई रिस्क जोन में, CM सम्राट ने नदियों को लेकर बताया प्लान appeared first on Naya Vichar.

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दूसरे दौर की वार्ता में भी नहीं बनी सहमति, छात्रों का विधानसभा घेराव 10 अगस्त को

सुनील चौधरी /राजलक्ष्मी की रिपोर्ट रांची. प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य प्रशासन के बीच शनिवार को दूसरे दौर की वार्ता हुई. बैठक में भी छात्रों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी. छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी परीक्षा रद्द करने की उनकी मांग नहीं मानी जाती है, तब तक धरना जारी रहेगा. छात्रों ने 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को भी जारी रखने की घोषणा की है. मंत्रियों ने मांगें सुनीं, धरना स्थगित करने की अपील  प्रशासन की ओर से वार्ता में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा, संजय प्रसाद यादव और सुदिव्य कुमार शामिल हुए. मंत्रियों ने छात्रों की मांगों और उनके सुझावों को गंभीरता से सुना. प्रशासन की ओर से छात्रों से धरना स्थगित करने का आग्रह किया गया. साथ ही कहा गया कि छात्रों की ओर से दिये जाने वाले सुझावों पर प्रशासन विचार करेगी. पूरे राज्य के छात्रों से मांगा सुझाव मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि प्रशासन केवल आंदोलन कर रहे छात्रों से ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के छात्रों से प्रतियोगी परीक्षाओं को और अधिक पारदर्शी एवं सशक्त बनाने के लिए सुझाव मांग रही है. उन्होंने कहा कि राज्य के किसी भी हिस्से का छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से संबंधित अपना सुझाव प्रशासन तक पहुंचा सकता है. इसके लिए मंत्री ने अपना ईमेल आइडी भी जारी किया है. ये भी पढ़ें: स्थानांतरण आदेश पर झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल, प्रशासन से पुनर्विचार की मांग छात्रों की समस्याओं पर सुझाव लेकर प्रशासन करेगी जरूरी कार्रवाई  प्रशासन की ओर से कहा गया कि छात्रों की समस्याओं को समझने और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी पक्षों से सुझाव लिये जायेंगे. प्रशासन इन सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई करेगी. मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान वहीं, छात्रों ने कहा कि वे अपनी मुख्य मांग से पीछे हटने वाले नहीं हैं. छात्रों का कहना है कि जब तक पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग पर प्रशासन स्पष्ट निर्णय नहीं लेती है, तब तक उनका धरना जारी रहेगा. छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने की भी घोषणा की है. खत्म हुई वार्ता, आंदोलन रहेगा जारी वार्ता खत्म होने के बाद छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है. वहीं, प्रशासन अब 4 अन्य दलों से भी बातचीत करेगी. ये भी पढ़ें: RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर ब्रेक, 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र The post दूसरे दौर की वार्ता में भी नहीं बनी सहमति, छात्रों का विधानसभा घेराव 10 अगस्त को appeared first on Naya Vichar.

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सीआईडी ​​कार्यालय में पेश हुए सुमित रॉय, दो महीने से फरार थे अभिषेक बनर्जी के पीए

कोलकाता : सुमित रॉय आखिरकार सामने आ ही गए. करीब दो महीने तक छिपने के बाद अभिषेक बनर्जी के पीए को शनिवार सुबह देखा गया. शुक्रवार को सीआईडी ​​की टीम सुमित के घर गई और उन्हें नया नोटिस दिया. इसके बाद वह शनिवार सुबह 10:05 बजे सीआईडी ​​कार्यालय में हाजिर हुए. सुमित रॉय एक अदालत से दूसरी अदालत के चक्कर लगा रहे हैं, हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, यहां तक ​​कि बंद दरवाजों के पीछे भी. हाई कोर्ट में एक मामले में उन्हें अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन गिरफ्तारी के डर से वे सुप्रीम कोर्ट चले गए. सुमित के खिलाफ कई आरोप हैं जमीन से लेकर नौकरी तक – सुमित रॉय कई भ्रष्टाचार मामलों में नामजद हैं. अकेले डायमंड हार्बर में ही उनके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं. उन पर जमीन हड़पने और आश्रय देने से जुड़े मामले हैं. हालांकि, सुमित का नाम सबसे पहले जमीन भ्रष्टाचार के आरोप में सामने आया. पश्चिम मिदनापुर के शालबानी में जमीन भ्रष्टाचार में सुमित का नाम शामिल था. इसके बाद पुलिस अभिषेक बनर्जी के घर पर तलाशी लेने गई. देबोरा में नौकरी धोखाधड़ी का मामला भी उनके खिलाफ दर्ज है. एक मामले में अग्रिम जमानत सुमित ने अग्रिम जमानत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय में अर्जी दी. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. हालांकि, न्यायालय ने उन्हें दूसरे मामले में अग्रिम जमानत दे दी. न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने टिप्पणी की कि गिरफ्तार आरोपियों के बयानों और सूचनाओं के आधार पर न्यायालय को लगा कि उन्हें अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें राहत मिलने के बाद गये सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद सुमित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई. शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि सुमित को पूछताछ के लिए पेश होना होगा. उसे जांच में सहयोग करना होगा. वह अपने साथ वकील ला सकता है. सुमित को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. इसके बाद सुमित सीआईडी ​​कार्यालय में पेश हुआ. Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में The post सीआईडी ​​कार्यालय में पेश हुए सुमित रॉय, दो महीने से फरार थे अभिषेक बनर्जी के पीए appeared first on Naya Vichar.

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PHOTOS: सावन स्पेशल : मीरगंज के औघड़दानी मंदिर में बाबा का अलौकिक श्रृंगार, तस्वीरों में देखें महादेव के कई मनमोहक स्वरूप

सावन के पावन महीने में औघड़दानी मंदिर में भगवान शिव का फूलों से मनमोहक श्रृंगार किया गया. सफेद फूलों से सजे शिवलिंग के साथ पीले और बैंगनी फूलों की सजावट ने पूरे स्वरूप को बेहद आकर्षक बना दिया है. चारों ओर बेलपत्र और फूलों से की गई सजावट भक्ति और प्रकृति के सुंदर संगम का एहसास करा रही है. The post PHOTOS: सावन स्पेशल : मीरगंज के औघड़दानी मंदिर में बाबा का अलौकिक श्रृंगार, तस्वीरों में देखें महादेव के कई मनमोहक स्वरूप appeared first on Naya Vichar.

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राखी की शॉपिंग में बचाने हैं पैसे? 500 रुपये में ऐसे करें गिफ्ट से डेकोरेशन तक इंतजाम

Raksha Bandhan Celebration under 500: रक्षाबंधन आते ही मन करता है कि भाई के लिए अच्छी राखी लें, घर को सजाएं और कुछ मीठा भी बनाएं. लेकिन इन सबके बीच बजट थोड़ा बिगड़ सकता है. अगर आप भी इस बार बिना ज्यादा पैसे खर्च किए रक्षाबंधन को खास बनाना चाहते हैं, तो 500 रुपये का छोटा सा बजट बनाकर काम चलाया जा सकता है. इसके लिए हर चीज बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद सामान और थोड़ी क्रिएटिविटी से आप राखी की तैयारी खूबसूरत भी रख सकते हैं और जेब पर बोझ भी नहीं पड़ेगा. राखी पर 50 रुपये तक खर्च करें राखी पर 500 भाई के लिए महंगी राखी लेने की जरूरत नहीं है. 30 से 50 रुपये तक में भी अच्छी राखी मिल जाएगी. भाई की पसंद देखकर सिंपल और प्यारी राखी चुनें. 200 रुपये का रखें गिफ्ट बजट महंगे गिफ्ट की जगह भाई के काम की चीज लें. चॉकलेट, मग, कीचेन, वॉलेट या कोई छोटी पसंदीदा चीज 200 के अंदर मिल सकती है. रक्षाबंधन पर भाई को देना है कुछ खास? इन आइडियाज पर डालें एक नजर 100 रुपये में करें सजावट घर में रखी लाइट्स और पुराने सजावटी सामान का इस्तेमाल करें. रंगीन कागज और रिबन से खुद छोटी सजावट बना सकती हैं. इससे नए सामान पर ज्यादा पैसे खर्च नहीं होंगे. 100 रुपये में बनाएं मिठाई बाजार से मिठाई का बड़ा डिब्बा लेने के बजाय घर पर सूजी का हलवा, सेवई या नारियल की मिठाई बना लें. स्वाद भी अच्छा रहेगा और पैसे भी बचेंगे. 50 रुपये में बनाएं खास याद भाई के लिए हाथ से छोटा सा कार्ड बनाएं या दोनों की कोई प्यारी फोटो लगाकर छोटा नोट दें. यह छोटा गिफ्ट भी काफी खास लगेगा. यह भी पढ़ें: राखी के लिए चाहिए परफेक्ट मेहंदी? ये लेटेस्ट डिजाइन जरूर करें ट्राई The post राखी की शॉपिंग में बचाने हैं पैसे? 500 रुपये में ऐसे करें गिफ्ट से डेकोरेशन तक इंतजाम appeared first on Naya Vichar.

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रांची में प्रदर्शन कर रहे अनशनकारियों की बिगड़ने लगी तबीयत, सदर अस्पताल में एक और छात्र भर्ती

Jharkhand Students Protest, रांची : रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में अब अभ्यर्थियों की सेहत बिगड़ने लगी है. आमरण अनशन पर बैठे पलामू निवासी छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. शनिवार सुबह 10 बजे डॉक्टरों की टीम ने राहुल का मेडिकल चेकअप किया, जिसमें उन्हें वायरल फीवर (Viral Fever) होने की पुष्टि हुई है. सदर अस्पताल प्रशासन का बयान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने भर्ती अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल में एक ही मरीज (राहुल क्रांति) एडमिट हैं, जिनका इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है. इससे पहले अचानक बेहोश (फेंट) होने के कारण एक अन्य छात्र को अस्पताल लाया गया था. सामान्य इलाज और ड्रिप (फ्ल्यूड) चढ़ाने के बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गई थी. जब उन्होंने डॉक्टरों से डिस्चार्ज करने का आग्रह किया तो उसके स्वास्थ्य की जांच-पड़ताल के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी. ये भी पढ़ें: ओपेन सफारी को CM ने दिखाई हरी झंडी, कहा- हम हाथियों के घरों में चले गए, देखें तस्वीरें धरना स्थल पर संक्रामक बीमारियों का खतरा रांची में लगातार हो रही बारिश और उमस भरे मौसम के बीच जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों की भारी भीड़ उमड़ रही है. खुले आसमान के नीचे अनशन और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है. भीड़भाड़ और गीले-उमस भरे माहौल के कारण धरना स्थल पर मौजूद कई छात्रों में सिरदर्द, गले में खराश/दर्द और डिहाइड्रेशन की शिकायतें सामने आ रही हैं. आइसा (AISA) के झारखंड सचिव त्रिलोकीनाथ ने दावा किया है कि अनशन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और लगातार खुले में रहने के कारण प्रतियोगी छात्र वायरल फीवर, डिहाइड्रेशन और मौसमी बीमारियों से जूझ रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से तत्काल चिकित्सा व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है. ये भी पढ़ें: हेमंत प्रशासन के साथ अभ्यर्थियों की डेढ़ घंटे चली वार्ता, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव पर सस्पेंस The post रांची में प्रदर्शन कर रहे अनशनकारियों की बिगड़ने लगी तबीयत, सदर अस्पताल में एक और छात्र भर्ती appeared first on Naya Vichar.

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Photos: बाढ़ से बेहाल असम, अब तक 98 लोगों की मौत, हजारों परिवारों पर संकट

असम में बाढ़ ने एक बार फिर जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. राज्य के कई जिलों में पानी भरने से हजारों परिवार संकट में हैं और अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है. कछार, शिवसागर और करीमगंज सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं. राहत और बचाव कार्य जारी है, बेघर परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है. The post Photos: बाढ़ से बेहाल असम, अब तक 98 लोगों की मौत, हजारों परिवारों पर संकट appeared first on Naya Vichar.

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भारत छोड़ो आंदोलन -2: जब Cripps Mission नहीं सुलझा सका गतिरोध, बना भारत छोड़ो आंदोलन का कारण

हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन – 1: . इसलिए क्रिप्स मिशन, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौते का रास्ता नहीं बना सका. Read more: Pakistan में सोशल मीडिया की क्रांति, लेकिन Gen Z की बगावत क्यों नहीं? दूसरी आवाजें भी प्रस्ताव के खिलाफ थीं क्रिप्स प्रस्ताव की आलोचना केवल कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने नहीं की. हिंदू महासभा ने भी प्रांतों को अलग होने का विकल्प देने का विरोध किया. सिख नेताओं को आशंका थी कि पंजाब के भविष्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है. कुछ उदारवादी नेताओं ने भी हिंदुस्तान को एक से अधिक संघों में बांटने की संभावना को खतरनाक माना. दलित समुदायों की ओर से भी यह चिंता सामने आई कि उनके हितों की पर्याप्त सुरक्षा का स्पष्ट प्रावधान नहीं था. इस तरह प्रस्ताव के सामने नेतृत्वक असहमति का दायरा बहुत व्यापक था. असली समस्या थी भरोसे की कमी क्रिप्स मिशन की असफलता को केवल प्रस्ताव की कुछ शर्तों से समझना पर्याप्त नहीं है. इसके पीछे एक बड़ा सवाल विश्वास का था. हिंदुस्तानीय नेताओं को संदेह था कि ब्रिटिश प्रशासन वास्तव में सत्ता हस्तांतरण के लिए तैयार है या युद्ध के समय हिंदुस्तानीय समर्थन हासिल करने के लिए नेतृत्वक आश्वासन दे रही है. क्रिप्स मिशन ऐसे समय हिंदुस्तान आया था जब ब्रिटेन को तत्काल हिंदुस्तानीय सहयोग चाहिए था. इसलिए हिंदुस्तानीय नेताओं के एक हिस्से को लगा कि आजादी का वादा भविष्य के लिए टाल दिया गया है, जबकि युद्ध में सहयोग की मांग तत्काल की जा रही है. यही वजह थी कि मिशन की बातचीत करीब दो सप्ताह चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका. क्रिप्स मिशन की विफलता और हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन क्रिप्स मिशन मार्च-अप्रैल 1942 में आया और बिना किसी समझौते के वापस चला गया. लेकिन इसकी विफलता का असर बहुत दूर तक गया. कांग्रेस के भीतर यह भावना मजबूत हुई कि ब्रिटिश प्रशासन से केवल बातचीत और प्रस्तावों के जरिए तत्काल सत्ता हस्तांतरण की उम्मीद करना कठिन है. दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी. जापानी सेना हिंदुस्तान के पूर्वी हिस्से के करीब पहुंच रही थी. ऐसे माहौल में हिंदुस्तानीय नेतृत्व भी निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही थी. कुछ ही महीनों बाद, अगस्त 1942 में कांग्रेस ने हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया. महात्मा गांधी ने देश के सामने स्पष्ट संदेश रखा- करो या मरो. इस तरह क्रिप्स मिशन केवल एक असफल संवैधानिक बातचीत नहीं था. यह उस नेतृत्वक यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बना, जिसने हिंदुस्तान को हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन तक पहुंचाया. इतिहास में इसकी विडंबना यही रही कि जिस ब्रिटिश प्रशासन को युद्ध जीतने के लिए हिंदुस्तान का सहयोग चाहिए था, वह हिंदुस्तान के नेतृत्वक नेतृत्व को ऐसा भरोसा नहीं दे सकी कि युद्ध के बाद सत्ता वास्तव में हिंदुस्तानीयों के हाथ में होगी. और जब भरोसे की वह आखिरी कोशिश भी विफल हुई, तो कुछ महीनों बाद हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय आंदोलन ने बातचीत की मेज से उठकर सड़क का रास्ता पकड़ लिया. Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 1 Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 2 The post हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -2: जब Cripps Mission नहीं सुलझा सका गतिरोध, बना हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन का कारण appeared first on Naya Vichar.

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“मुझे मरने दो, गेट क्वालिफाई हूं”, JPSC प्रोटेस्ट में भूख हड़ताल पर बैठे युवक ने सुनाई आपबीती

Jharkhand JPSC JSSC Protest: आज इस भ्रष्ट सिस्टम के कारण गेट क्वालिफाई करने के बाद और इतनी सारी भर्ती परीक्षा के लिए अप्लाई करने के बाद भी मेरे पास नौकरी नहीं है. मैं भूख हड़ताल पर हूं, मुझे मरने दो. मेरे मरने से अगर झारखंड के स्टूडेंट्स का भला होता है तो मुझे मरने दो. पानी तक नहीं पीऊंगा, ये कहना है JPSC-JSSC प्रोटेस्ट में भूखहड़ताल पर बैठे युवक महेंद्र प्रसाद का. महेंद्र सालों से झारखंड प्रशासनी वैकेंसी (Jharkhand Sarkari Vacancy) के लिए अप्लाई कर रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी अभी तक पक्की नहीं हुई. बेरोजगारी और बढ़ती उम्र, परिवार वालों ने 2017 में करा दी शादी महेंद्र प्रसाद ने 2015 से कई सारी प्रशासनी वैकेंसी के लिए अप्लाई किया है. कुछ वैकेंसी का एग्जाम ही नहीं आयोजित किया गया तो कुछ के लिए सेलेक्शन नहीं हुआ. महेंद्र एक बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता राजमिस्त्री और मां हाउस वाइफ हैं. महेंद्र के पास रोजगार नहीं था लेकिन उम्र बढ़ती जा रही थी. ऐसे में 2017 में उनकी शादी करा दी गई. अब महेंद्र की दो बेटियां हैं. महेंद्र प्रसाद द्वारा दिखाए जाने वाले डॉक्यूमेंट्स (PC-सोशल मीडिया) JPSC-JSSC से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर चल रहे आंदोलन में भूख हड़ताल पर बैठे महेंद्र प्रसाद की आवाज में सालों से बेरोजगार होने का दर्द छुपा है. उन्होंने तो सिर्फ अपनी डिग्री और अपने संघर्ष की बात बताई. सिर्फ सिस्टम से सवाल किया. लेकिन उन सब सवालों में एक सवाल ये छुपा था कि “नौकरी कब मिलेगी?” शायद यही सवाल झारखंड के दूसरे युवा भी कर रहे हैं जो प्रशासनी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. View on Instagram पहले प्रयास में GATE क्वालिफाई किया महेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कई प्रशासनी भर्तियों के लिए आवेदन किया, GATE जैसी परीक्षा भी क्वालिफाई की. लेकिन अब तक उन्हें प्रशासनी नौकरी नहीं मिली. आंदोलन के दौरान महेंद्र ने व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की. यह भी पढ़ें- JPSC-JSSC प्रोटेस्ट वाले वायरल शिशु जैसी फर्राटेदार इंग्लिश कैसे बोलें, एक्सपर्ट ने दिए टिप्स 2014 में बीटेक की डिग्री पाई और प्रशासनी भर्तियों के लिए अप्लाई करना शुरू किया महेंद्र ने 2014 में BTech की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद प्रशासनी नौकरी पाने की उम्मीद में लगातार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के लिए आवेदन करते रहे. उन्होंने अपने पहले प्रयास में GATE क्वालिफाई किया. इसके बावजूद वर्षों की तैयारी और कई परीक्षाओं में शामिल होने के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल सका. 2015 में JPSC असिस्टेंट इंजीनियर का भरा था फॉर्म 2015 में JPSC असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती के लिए आवेदन किया था. उनका दावा है कि इस भर्ती के लिए अब तक परीक्षा आयोजित नहीं की गई है. इसके अलावा उन्होंने 2014-15 में सब इंस्पेक्टर भर्ती के लिए भी आवेदन किया था. View on Instagram महेंद्र के मुताबिक, वर्ष 2015 में झारखंड कक्षपाल और फॉरेस्ट गार्ड समेत कई भर्तियों के लिए आवेदन किया. उनका कहना है कि इन भर्तियों में भी प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो सकी है. उन्होंने झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की वर्ष 2017 की भर्ती और झारखंड ऊर्जा विभाग की JE भर्ती के लिए भी आवेदन किया था. कोचिंग में पढ़ाकर चलाया परिवार लंबे समय तक प्रशासनी नौकरी का इंतजार करने के दौरान महेंद्र ने कोचिंग में पढ़ाने का काम भी किया. उनका कहना है कि नौकरी की तलाश के बीच उम्र बढ़ती गई और आर्थिक स्थिति भी चुनौती बनी रही. फिर उनकी शादी भी हो गई थी तो परिवार की जिम्मेदारी भी थी. महेंद्र एक साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता राजमिस्त्री हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. रोजगार नहीं मिलने के बीच वर्ष 2017 में उनकी शादी हुई. अब उनकी दो बेटियां हैं. ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके ऊपर हैं. यह भी पढ़ें- JPSC और JSSC में क्या अंतर है? आसान भाषा में समझें पोस्ट से लेकर सेलेक्शन तक की डिटेल The post “मुझे मरने दो, गेट क्वालिफाई हूं”, JPSC प्रोटेस्ट में भूख हड़ताल पर बैठे युवक ने सुनाई आपबीती appeared first on Naya Vichar.

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हिमाचल के चंबा में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी बस, ड्राइवर-कंडक्टर समेत 7 की मौत

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार (8 अगस्त) की सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. बैरागढ़ से चंबा जा रही एक निजी बस चालुज मोड़ के पास सड़क से नीचे जा गिरी. बस में कुल 18 यात्री सवार थे. हादसे में ड्राइवर और कंडक्टर समेत सात लोगों की मौत हो गई है, जबकि 7 अन्य घायल हो गए. हादसे के बाद राहत बचाव घटना के बाद स्थानीय लोग और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे और बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू किया. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है. हादसे के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है. पुलिस घटना की जांच कर रही है. The post हिमाचल के चंबा में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी बस, ड्राइवर-कंडक्टर समेत 7 की मौत appeared first on Naya Vichar.

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