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Author name: Vinod Jha

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550 रुपये में 84 दिन और 2000 में सालभर, Jio ने OTT लवर्स के लिए खोल दिया खजाना

अगर आप हर महीने अलग-अलग OTT सब्सक्रिप्शन लेने से परेशान हैं, तो Jio का नया OTT-Pass आपके लिए काम का साबित हो सकता है. कंपनी ने अपने ग्राहकों के लिए 550 रुपये का 84 दिन वाला और 2,000 रुपये का 365 दिन वाला नया OTT-Pass पेश किया है. खास बात यह है कि इन दोनों पास में 15 प्रीमियम OTT ऐप्स के साथ JioTV के 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स, हाई-स्पीड डेटा और पात्र ग्राहकों के लिए Unlimited 5G भी मिलता है. लंबे समय वाला पास लेने पर सीधे 50 रुपये से लेकर 400 रुपये तक की बचत भी हो सकती है. 550 रुपये में 84 दिन का OTT-Pass Jio का नया 550 रुपये वाला OTT-Pass 84 दिनों की वैधता के साथ आता है. इसमें ग्राहकों को 90GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है. इसके अलावा पात्र यूजर्स को Unlimited 5G का फायदा भी मिलेगा. यानी यह सिर्फ OTT सब्सक्रिप्शन वाला पैक नहीं है, बल्कि मोबाइल डेटा और एंटरटेनमेंट दोनों को एक साथ जोड़ता है. इस पास में 15 प्रीमियम OTT ऐप्स का ऐक्सेस दिया गया है. इनमें YouTube Premium, JioHotstar Mobile + Hollywood, Amazon Prime Lite, SonyLIV, ZEE5, Lionsgate Play, Discovery+, SunNXT, FanCode, Hoichoi, Chaupal, Planet Marathi, Kanchha Lannka, TimesPlay और Tarang Plus शामिल हैं. सालभर के लिए 2,000 रुपये में मनोरंजन Jio का 2,000 रुपये वाला OTT-Pass उन ग्राहकों के लिए है जो बार-बार रिचार्ज कराने की झंझट से बचना चाहते हैं. इसकी वैधता 365 दिन यानी पूरे एक साल की है. इस पास के साथ 365GB हाई-स्पीड डेटा दिया जाता है. पात्र ग्राहकों को Unlimited 5G भी मिलता है. इसमें भी 15 प्रीमियम OTT ऐप्स और JioTV के 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स का ऐक्सेस मिलता है. 550 रुपये वाले पास की तरह इसमें Amazon Prime Lite membership भी शामिल है. कंपनी के मुताबिक लंबे समय का यह पास मनोरंजन पसंद करने वाले यूजर्स के लिए ज्यादा किफायती विकल्प बनता है. 84 दिन वाले पास में 50 रुपये की बचत Jio ने नए OTT-Pass की कीमत इस तरह रखी है कि लंबी अवधि चुनने वाले ग्राहकों को सीधा फायदा मिले. अगर 28 दिन वाला 200 रुपये का OTT-Pass तीन बार लिया जाए, तो 84 दिनों के लिए कुल 600 रुपये खर्च होंगे. इसके मुकाबले नया 84 दिन वाला पास सिर्फ 550 रुपये में आता है. यानी ग्राहक को 50 रुपये की बचत होती है. इसी तरह 365 दिनों के लिए अगर 200 रुपये वाला पास बार-बार लिया जाए, तो कुल खर्च 2,400 रुपये तक पहुंच सकता है. Jio का नया सालाना पास 2,000 रुपये का है. ऐसे में सालभर में 400 रुपये की सीधी बचत हो सकती है. डेटा बेनिफिट भी अवधि के साथ बढ़ता है. 200 रुपये वाले पास में 30GB, 550 रुपये वाले में 90GB और 2,000 रुपये वाले सालाना पास में 365GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है. JioTV पर 1,000 से ज्यादा लाइव चैनल्स OTT ऐप्स के अलावा इन पास में JioTV का भी बड़ा फायदा दिया जा रहा है. ग्राहकों को 1,000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स देखने का ऐक्सेस मिलेगा. इसमें Star Plus HD, Colors HD, SET HD, Sun TV HD, Discovery और Cartoon Network जैसे लोकप्रिय चैनल शामिल हैं. इससे यूजर्स को फिल्मों और वेब सीरीज के साथ लाइव टीवी कंटेंट भी एक ही पैकेज में मिल जाता है. Jio का दावा है कि इस पैकेज के जरिये ग्राहकों को हर महीने 1,500 रुपये से ज्यादा मूल्य के मनोरंजन लाभ मिलते हैं. किन ग्राहकों के लिए हैं नये Jio OTT-Pass 550 रुपये और 2,000 रुपये वाले नए OTT-Pass ऐसे Jio ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं, जिनके पास एक साल की वैधता वाला सक्रिय बेस प्लान है. वॉयस-ओनली प्लान वाले ग्राहक इन नये पास के लिए पात्र नहीं हैं. दोनों नये पास 7 अगस्त से MyJio ऐप, Jio की वेबसाइट और अधिकृत रिटेल स्टोर्स के जरिये उपलब्ध हैं. इसलिए अगर आप पहले से Jio का एक्टिव बेस प्लान इस्तेमाल कर रहे हैं और OTT कंटेंट पर अलग से खर्च करते हैं, तो लंबी वैधता वाला यह विकल्प आपके मासिक खर्च को कम कर सकता है. Jio OTT-Pass की कीमत और फायदे एक नजर में Jio OTT-Pass वैधता हाई-स्पीड डेटा प्रमुख OTT फायदे ₹200 28 दिन 30GB 15 प्रीमियम OTT ऐप्स, JioTV, Amazon Prime Video Mobile Edition ₹550 84 दिन 90GB 15 प्रीमियम OTT ऐप्स, JioTV, Amazon Prime Lite ₹2,000 365 दिन 365GB 15 प्रीमियम OTT ऐप्स, JioTV, Amazon Prime Lite कौन प्लान फायदेमंद? Jio के नये 550 रुपये और 2,000 रुपये वाले OTT-Pass कंपनी की एंटरटेनमेंट रणनीति को और मजबूत करते हैं. 84 दिन वाले पास में 50 रुपये और सालाना पास में 400 रुपये की बचत के साथ यूजर्स को OTT ऐप्स, लाइव टीवी, डेटा और पात्र ग्राहकों के लिए Unlimited 5G एक साथ मिलता है. खासकर उन लोगों के लिए 2,000 रुपये वाला प्लान ज्यादा दिलचस्प है, जो पूरे साल OTT कंटेंट देखते हैं और बार-बार अलग-अलग सब्सक्रिप्शन पर खर्च नहीं करना चाहते. ये भी पढ़ें: Best Mobile Recharge Plans 2026: जियो, एयरटेल और बीएसएनएल के सबसे बेस्ट रिचार्ज प्लान, यहां देखें पूरी लिस्ट ये भी पढ़ें: Jio का यह प्लान दे रहा लंबी वैलिडिटी और कई एक्स्ट्रा बेनिफिट्स, अभी गिन लीजिए फायदे The post 550 रुपये में 84 दिन और 2000 में सालभर, Jio ने OTT लवर्स के लिए खोल दिया खजाना appeared first on Naya Vichar.

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तेजस्वी यादव रोहतास में चंदेश्वर चौधरी के परिवार से मिले, बोले-जनता वक्त आने पर फैसला करेगी

Jogiya Murder Case : रोहतास के जोगिया गांव में मजदूरी मांगने पर हत्या के मामले में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शनिवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने मृतक चंदेश्वर चौधरी की पत्नी और बच्चों से मुलाकात की. शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया और दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया. मामले में आरोपी अजीत तिवारी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. तेजस्वी यादव ने गिरफ्तारी के बाद भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की. The post तेजस्वी यादव रोहतास में चंदेश्वर चौधरी के परिवार से मिले, बोले-जनता वक्त आने पर फैसला करेगी appeared first on Naya Vichar.

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बुर्के वाली महिला को लेकर UP पुलिस-खुफिया एजेंसियां अलर्ट, क्या अबान के जनाजे में पहुंची थीं शाइस्ता परवीन

UP News: माफिया अतीक अहमद की पत्नी और उमेश पाल हत्याकांड में वांछित शाइस्ता परवीन एक बार फिर सुर्खियों में हैं. अतीक के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद के जनाजे के दौरान दावा किया गया कि शाइस्ता बुर्के में वहां पहुंचीं और भीड़ के बीच अपने बेटे का आखिरी दीदार कर चुपचाप निकल गईं. हालांकि, पुलिस ने अभी तक शाइस्ता की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस दावे की पड़ताल में जुटी हैं. बुर्के वाली स्त्री ने बढ़ाया रहस्य अबान के अंतिम संस्कार के दौरान हटवा गांव में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे. इसी बीच बुर्का पहने स्त्रीओं के बीच शाइस्ता परवीन के होने की चर्चा तेजी से फैल गई. दावा किया गया कि वह बेटे का अंतिम दीदार करने के बाद वहां से निकल गईं. लेकिन यह दावा अभी सिर्फ चर्चा और अपुष्ट सूचना तक सीमित है. पुलिस की ओर से शाइस्ता के वहां पहुंचने की पुष्टि नहीं की गई है. पुलिस-खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर शाइस्ता लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. ऐसे में बेटे की मौत के बाद उनके जनाजे में पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस पहले से ही अलर्ट थी. हटवा गांव, कसारी-मसारी कब्रिस्तान और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई थी. स्त्री पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गयी थी और खुफिया एजेंसियां गतिविधियों पर नजर रख रही थीं. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बुर्के में पहुंचने वाली स्त्री वास्तव में शाइस्ता थीं या फिर यह सिर्फ अफवाह थी. अतीक-अशरफ की कब्र के पास दफन हुआ अबान अबान अहमद की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में किया गया. परिवार के अन्य सदस्यों और करीबियों की मौजूदगी के बीच उसे अतीक अहमद और अशरफ की कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक किया गया. अबान की मौत झांसी में सड़क हादसे के बाद हुई थी. शव पोस्टमार्टम के बाद प्रयागराज लाया गया, जिसके बाद परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी की. तीन साल से फरार हैं शाइस्ता उमेश पाल हत्याकांड के बाद से शाइस्ता परवीन फरार चल रही हैं. उनके साथ अतीक की बहन आयशा नूरी और अशरफ की पत्नी जैनब भी पुलिस की तलाश में हैं. अबान की मौत के बाद शाइस्ता के संभावित रूप से सामने आने की चर्चा ने एक बार फिर पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी है. यह भी पढ़ें: ‘ढाई किलो का हाथ’ लेकर लखनऊ पहुंचे सनी देओल, प्रीति जिंटा भी साथ: योगी से हुई खास मुलाकात The post बुर्के वाली स्त्री को लेकर UP पुलिस-खुफिया एजेंसियां अलर्ट, क्या अबान के जनाजे में पहुंची थीं शाइस्ता परवीन appeared first on Naya Vichar.

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‘आओ बच्चू, मैं तुम्हें दंगा कराना सिखा देता हूं-कैसे दंगा होता है…’ सीएम योगी का बयान सोशल मीडिया पर वायरल

UP Politics: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अंबेडकरनगर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने संभल और बरेली में दंगे को लेकर सपा पर निशाना साधा. सीएम योगी ने कहा कि संभल में सपा के एक गुंडे ने दंगा कराया, जिसे प्रशासन घुटनों पर लाकर नाक रगड़वा रही है. उन्होंने बरेली के एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि वह दंगे कराता था और एक बार प्रशासन उसके आगे सहम गया था. मैंने कहा कि जरा रुक जाओ, उसको आने दो, फिर बताते हैं. आज वह गुंडा जेल में कष्ट उठा रहा है. कह रहा है कि छोड़ दो, गलती हो गई. अब ऐसा नहीं होगा. आज जब कोई धमकी देता है कि दंगा करवा देंगे तो मैं कहता हूं- आओ बच्चू, मैं तुम्हें दंगा कराना सिखा देता हूं कि कैसे दंगा होता है… सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यूपी में अब नो कर्फ्यू, नो दंगा का माहौल सीएम योगी ने कहा कि यूपी में दंगा कराने की धमकी देने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. उत्तर प्रदेश में अब “नो कर्फ्यू, नो दंगा” का माहौल है. उन्होंने सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली प्रशासनों में दंगाइयों को संरक्षण और सम्मान मिलता था, जबकि मौजूदा प्रशासन में कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. सीएम योगी के इस बयान पर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. सीमए योगी का बयान सोशल मीडिया पर वायरल सीएम योगी आदित्यनाथ के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह बरेली में दंगा कराने की धमकी देने वाले एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए सख्त कार्रवाई की बात कहते नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले दंगा करने वालों को मुख्यमंत्री आवास बुलाकर सम्मानित किया जाता था, जबकि अब धमकी देने वालों को कानून का सामना करना पड़ता है. यह भी पढ़ें: यूपी में बाढ़ का कहर! नदी में समा गया पूरा गांव, बलिया में 200 से अधिक परिवार बेघर, जिम्मेदार कौन? The post ‘आओ बच्चू, मैं तुम्हें दंगा कराना सिखा देता हूं-कैसे दंगा होता है…’ सीएम योगी का बयान सोशल मीडिया पर वायरल appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Controversy: सुप्रीम कोर्ट में 14वीं JPSC परीक्षा में धांधली पर याचिका दायर, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग

JPSC Controversy: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा 14वीं JPSC परीक्षा में धांधली पर याचिका दायर, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग JPSC Controversy: झारखंड हुए 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित तौर पर हुई धांधली का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सर्वोच्च अदालत में परीक्षा में हुई गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग पर याचिका दायर की गई है. याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है. रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग याचिका में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है. इस समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है, ताकि अभ्यर्थियों के बीच विश्वास बहाल किया जा सके. याचिका में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न चरणों की भी स्वतंत्र तरीके से जांच कराने की मांग की गई है. इसमें प्रश्नपत्र से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं के प्रसंस्करण और परिणाम तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में लाने की बात कही गई है. ओएमआर स्कैनिंग के ऑडिट की मांग याचिका में ओएमआर स्कैनिंग, कोडिंग और मूल्यांकन की प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग प्रमुख रूप से की गई है. इसके साथ ही परिणाम तैयार करने वाली प्रणाली का भी स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की गई है. याचिका के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली तकनीकी प्रणालियों की स्वतंत्र जांच से कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों का निष्पक्ष तरीके से परीक्षण किया जा सकेगा. परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजन की मांग सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि परीक्षा को लेकर सामने आए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अभ्यर्थियों के हित में निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करना जरूरी है. झारखंड सिविल सेवा परीक्षा राज्य की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है. ऐसे में परीक्षा की प्रक्रिया और परिणाम की विश्वसनीयता अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्रों से बातचीत करने के लिए कैसे तैयार हुई प्रशासन? जानें 14वें दिन कैसे खुला रास्ता प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के जरिए अब कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, परीक्षा प्रक्रिया के तकनीकी ऑडिट और जरूरत पड़ने पर प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराने की मांग उठाई गई है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत के समक्ष होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत खत्म, नहीं बनी सहमति, जारी रहेगा आंदोलन The post JPSC Controversy: सुप्रीम कोर्ट में 14वीं JPSC परीक्षा में धांधली पर याचिका दायर, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग appeared first on Naya Vichar.

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भारत छोड़ो आंदोलन -4: जब नेता जेल गए… लेकिन ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन सड़कों पर उतर आया!

9 अगस्त की सुबह… कांग्रेस के प्रस्ताव के अगले ही दिन ब्रिटिश प्रशासन ने कार्रवाई कर दी. 9 अगस्त 1942 की सुबह गांधी और कांग्रेस कार्यसमिति के दूसरे प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. अखिल हिंदुस्तानीय कांग्रेस समिति और प्रांतीय कांग्रेस समितियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया. ब्रिटिश प्रशासन की रणनीति साफ थी- अगर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेता जेल में होंगे, तो आंदोलन को नियंत्रित करना आसान होगा. लेकिन ब्रिटिश प्रशासन ने शायद जनता की प्रतिक्रिया का पूरा अनुमान नहीं लगाया था. नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन खत्म होने के बजाय कई जगह और तेज हो गया. हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन – 1: इसी बीच मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को आगे बढ़ाया हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन के दौरान हिंदुस्तानीय नेतृत्व का एक दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष भी सामने आ रहा था. कांग्रेस के नेताओं की गिरफ्तारी और ब्रिटिश प्रशासन के साथ उसके टकराव के बीच मुस्लिम लीग ने अपनी अलग नेतृत्वक दिशा बनाए रखी. स्रोत सामग्री के अनुसार, 23 मार्च 1943 को मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान दिवस मनाया. मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिम आबादी के लिए पाकिस्तान की मांग को अंतिम राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया. 26 अप्रैल को लीग के एक प्रस्ताव में भी इस दृष्टिकोण का समर्थन किया गया. इस तरह 1942-43 का दौर केवल अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का दौर नहीं था. यह हिंदुस्तानीय नेतृत्व के भीतर अलग-अलग नेतृत्वक कल्पनाओं के मजबूत होने का समय भी था. एक तरफ कांग्रेस तत्काल ब्रिटिश शासन की समाप्ति चाहती थी. दूसरी तरफ मुस्लिम लीग पाकिस्तान को अपने नेतृत्वक भविष्य के केंद्र में रख रही थी. अगस्त क्रांति ने क्या बदला? हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन तत्काल स्वतंत्रता नहीं दिला सका. ब्रिटिश प्रशासन ने इसे कठोर दमन से दबा दिया और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व लंबे समय तक जेल में रहा. लेकिन आंदोलन ने एक नेतृत्वक संदेश जरूर स्पष्ट कर दिया- ब्रिटिश शासन अब हिंदुस्तानीय जनता की स्थायी स्वीकृति पर नहीं चल सकता था. 1942 के बाद स्वतंत्रता का सवाल केवल भविष्य की संवैधानिक योजना नहीं रहा. वह तत्काल नेतृत्वक मांग बन चुका था. और शायद यही अगस्त क्रांति की सबसे बड़ी ऐतिहासिक विरासत थी. 8 अगस्त को प्रस्ताव पारित हुआ. 9 अगस्त को नेता गिरफ्तार हुए. लेकिन आंदोलन जेल की सलाखों के पीछे नहीं रुका- वह सड़कों पर फैल गया. इसीलिए हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन की कहानी केवल एक प्रस्ताव, एक नारे या कुछ दिनों के विरोध की कहानी नहीं है. यह उस क्षण की कहानी है जब नेतृत्व को गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन स्वतंत्रता की मांग को नहीं. Read more: प्रतिबंधों के बाद भी कैसे चल रही है Russia की War Machine? The post हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -4: जब नेता जेल गए… लेकिन ‘हिंदुस्तान छोड़ो’ आंदोलन सड़कों पर उतर आया! appeared first on Naya Vichar.

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श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ीं, साई सुदर्शन हुए टेस्ट सीरीज से बाहर

Ind vs Sl Test Series: श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. जसप्रीत बुमराह के बाद अब युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन भी चोट के कारण पूरी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं. साई को पैर के अंगूठे में चोट लगी थी और इसी वजह से वह टीम के साथ श्रीलंका रवाना नहीं हो पाए थे. दोनों टेस्ट नहीं स्पोर्ट्स पाएंगे साई सुदर्शन फिलहाल बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैबिलिटेशन कर रहे थे. उम्मीद थी कि वह फिट होकर 8 अगस्त के आसपास टीम से जुड़ सकते हैं और 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध रहेंगे. हालांकि, ताजा रिपोर्ट के मुताबिक उनकी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हुई है और अब वह दोनों टेस्ट मैचों में नहीं स्पोर्ट्स पाएंगे. नंबर-3 का खोजना होगा विकल्प साई सुदर्शन का बाहर होना हिंदुस्तान के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि टीम मैनेजमेंट ने उन्हें नंबर-3 की जिम्मेदारी के लिए तैयार किया था. इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी उन्हें इस नंबर पर मौका मिला था. चेतेश्वर पुजारा के टेस्ट टीम से बाहर होने के बाद से नंबर-3 पर हिंदुस्तान लगातार विकल्प तलाश रहा है. Also Read: 15 साल की उम्र में ये हिम्मत होना बड़ी बात… वैभव सूर्यवंशी की तारीफ में बोले शिखर धवन पडिक्कल को मिल सकता है मौका अब साई सुदर्शन की गैरमौजूदगी में देवदत्त पडिक्कल को प्लेइंग-11 में जगह मिलने की संभावना बढ़ गई है. टीम इंडिया पहले ही बुमराह के बाहर होने से परेशान है और अब साई के रूप में एक और अहम खिलाड़ी का नुकसान हुआ है. हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में स्पोर्ट्सा जाएगा. ऐसे में सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया को अपनी रणनीति में एक बार फिर बदलाव करना पड़ सकता है. Also Read: श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में सबसे ज्यादा रन और विकेट लेने वाले हिंदुस्तान के ‘टॉप-3’ दिग्गज, देखें लिस्ट में कौन-कौन है शामिल The post श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ीं, साई सुदर्शन हुए टेस्ट सीरीज से बाहर appeared first on Naya Vichar.

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Thalapathy Vijay-Sangeetha का तलाक टला, तो वायरल हुआ त्रिशा कृष्णन का पुराना पोस्ट, बोलीं- बेफिक्र रहना एक चॉइस है

Trisha Krishnan-Vijay: थलपति विजय और संगीता के तलाक की समाचारों के बीच अब त्रिशा कृष्णन का एक पुराना पोस्ट इंटरनेट पर फिर से वायरल हो गया है. जैसे ही संगीता ने चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट से अपनी याचिका वापस ली, सोशल मीडिया पर लोगों ने त्रिशा के जुलाई वाले पोस्ट को खंगालना शुरू कर दिया. बस फिर क्या था, इंटरनेट ने दोनों चीजों को जोड़कर अपनी अलग ही कहानी बना ली. पहले समझिए विजय-संगीता के बीच क्या हुआ विजय और उनकी पत्नी संगीता के रिश्ते को लेकर काफी समय से समाचारें सामने आ रही थीं. दोनों का मामला चेंगलपट्टू की फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया था. अब संगीता ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है. इसके बाद उनके तलाक की चल रही चर्चा फिलहाल रुक गई है. लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई. इस समाचार के बाद सोशल मीडिया का फोकस अचानक त्रिशा कृष्णन पर चला गया. तलाक टला और त्रिशा का पुराना पोस्ट फिर से ट्रेंड करने लगा View on Instagram दरअसल, जुलाई के आखिर में त्रिशा ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की थीं. इन तस्वीरों में वह ब्राउन आउटफिट में नजर आई थीं. फोटोज के साथ उन्होंने लिखा था, “परेशानियों से बेफिक्र रहना भी एक चॉइस है, तो उसे चुनिए और बस मुस्कुराते रहिए.” उस वक्त त्रिशा का यह पोस्ट बिल्कुल नॉर्मल लगा था और किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन अब विजय-संगीता के तलाक की समाचारों के बीच यही पोस्ट अचानक फिर से वायरल हो गया है. सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट के कमेंट सेक्शन में पहुंचकर तरह-तरह के रिएक्शन देने शुरू कर दिए हैं. ‘कुछ तो है’ वाला मोमेंट बना रहे फैंस कुछ यूजर्स त्रिशा के पोस्ट पर क्रिप्टिक कमेंट कर रहे हैं, तो कुछ हंसने वाली इमोजी शेयर कर रहे हैं. कई लोगों को इस पोस्ट की टाइमिंग काफी इंटरेस्टिंग लग रही है. यानी इंटरनेट का मूड कुछ ऐसा है- ‘हम कुछ कह नहीं रहे, लेकिन समझ तो रहे हैं…’ हालांकि, यहां एक बात क्लियर है. त्रिशा ने अपने पोस्ट में विजय या संगीता का नाम नहीं लिया था. उन्होंने कहीं भी यह नहीं कहा कि उनका पोस्ट विजय-संगीता के रिश्ते से जुड़ा है. इसलिए सोशल मीडिया पर बन रही ये सारी थ्योरी फिलहाल सिर्फ फैंस की अटकलें हैं. त्रिशा और विजय का क्या है कनेक्शन? त्रिशा और विजय एक साथ कई फिल्मों में काम कर चुके हैं और उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी को फैंस काफी पसंद करते हैं. लेकिन दोनों का कनेक्शन सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहा है. दोनों को कई बार अलग-अलग इवेंट्स और पब्लिक अपीयरेंस में भी साथ देखा गया है. यही वजह है कि लंबे समय से दोनों के डेटिंग रूमर्स भी सोशल मीडिया पर उड़ते रहे हैं. हालांकि, त्रिशा और विजय दोनों ने कभी अपने रिश्ते को लेकर कोई ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं दिया है. इसके बावजूद जब भी दोनों साथ नजर आते हैं या एक-दूसरे से जुड़ी कोई पोस्ट सामने आती है, तो फैंस के बीच फिर से चर्चा शुरू हो जाती है. ये भी पढ़ें: थलपति विजय और पत्नी संगीता का नहीं होगा तलाक, फैमिली कोर्ट से वापस ली याचिका The post Thalapathy Vijay-Sangeetha का तलाक टला, तो वायरल हुआ त्रिशा कृष्णन का पुराना पोस्ट, बोलीं- बेफिक्र रहना एक चॉइस है appeared first on Naya Vichar.

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भारत छोड़ो आंदोलन -3: 8 अगस्त 1942 को क्या-क्या हुआ… Quit India Resolution की पूरी कहानी

8 अगस्त 1942 की शाम बंबई में कांग्रेस की बैठक खत्म हुई. माहौल में बेचैनी थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा एक फैसले की दृढ़ता थी. Mahatma Gandhi ने ब्रिटिश हुकूमत के सामने अब तक का सबसे साफ संदेश रख दिया था- अब हिंदुस्तान में अंग्रेजी राज नहीं चल सकता. उस रात शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह क्या होने वाला है. 9 अगस्त की सुबह सूरज निकला तो… गांधी और कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता जेल पहुंच चुके थे. ब्रिटिश प्रशासन ने एक ही झटके में आंदोलन का पूरा नेतृत्व अपने कब्जे में ले लिया था. उसका अनुमान सीधा था- नेता नहीं होंगे, तो आंदोलन भी नहीं होगा. लेकिन इतिहास ने इस बार दूसरी राह चुनी. नेताओं को जेल में डालते ही आंदोलन जैसे किसी एक मंच से उतरकर सड़कों पर फैल गया. अब उसके पास कोई एक चेहरा नहीं था, कोई एक दफ्तर नहीं था, कोई एक आदेश नहीं था. लेकिन उसके पास हजारों-लाखों लोगों का गुस्सा था. कहीं जुलूस निकले, कहीं प्रशासनी दफ्तरों के सामने भीड़ जमा हुई, कहीं संचार व्यवस्था को बाधित किया गया. कई इलाकों में प्रशासनी मशीनरी की पकड़ ढीली पड़ने लगी. ब्रिटिश हुकूमत ने जिस गिरफ्तारी को आंदोलन का अंत समझा था, वही गिरफ्तारी उसके विस्तार की शुरुआत बन गई. यही वह दौर था, जिसे इतिहास ने बाद में अगस्त क्रांति के नाम से याद किया. लेकिन 9 अगस्त की सुबह अचानक नहीं आई थी. इसके पीछे महीनों से जमा हो रही बेचैनी थी… क्रिप्स मिशन की विफलता, युद्ध का बढ़ता खतरा, अंग्रेजी शासन से गहरी होती निराशा और यह सवाल कि आखिर हिंदुस्तान को अपनी स्वतंत्रता के लिए और कितना इंतजार करना होगा. Read More: हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -1: जब ब्रिटेन ने द्वितीय विश्व युद्ध में हिंदुस्तान को झोंक दिया गया, पर आजादी पर चुप रही Cripps Mission की नाकामी के बाद बढ़ी निराशा 1942 की शुरुआत तक हिंदुस्तान की नेतृत्व पर द्वितीय विश्वयुद्ध का गहरा असर पड़ चुका था. जापानी सेना तेजी से दक्षिण-पूर्व एशिया में आगे बढ़ रही थी और हिंदुस्तान की सीमाओं तक युद्ध का खतरा पहुंचने लगा था. ब्रिटिश प्रशासन ने हिंदुस्तानीय नेताओं का समर्थन हासिल करने के लिए क्रिप्स मिशन भेजा, लेकिन उसके प्रस्ताव कांग्रेस को स्वीकार नहीं हुए. मिशन की विफलता के बाद नेतृत्वक निराशा और गहरी हो गई. कांग्रेस के सामने भी अब यह सवाल था कि वह कितने समय तक केवल मांगों और प्रस्तावों तक सीमित रह सकती है. गांधी का रुख भी बदल रहा था. अब अंग्रेजों की ‘व्यवस्थित वापसी’ जरूरी है: गांधी अप्रैल 1942 के अंत में गांधी ने अंग्रेजों से हिंदुस्तान छोड़ने की मांग को अधिक स्पष्ट रूप से सामने रखना शुरू किया. उनका तर्क था कि हिंदुस्तान में ब्रिटिश सत्ता की मौजूदगी ही जापान के लिए हिंदुस्तान पर हमला करने का एक कारण बन रही है. गांधी के अनुसार, अगर अंग्रेज हिंदुस्तान से चले जाएं तो यह खतरा कम हो सकता है. मई 1942 में Harijan में उन्होंने लिखा कि हिंदुस्तान में ब्रिटिश उपस्थिति जापान को हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए आकर्षित करती है. गांधी की सोच केवल सत्ता हस्तांतरण की मांग तक सीमित नहीं थी. वह चाहते थे कि अंग्रेज हिंदुस्तान से व्यवस्थित और समय रहते वापस जाएं. इसी विचार के आसपास धीरे-धीरे एक नया नेतृत्वक नारा आकार लेने लगा— ‘Quit India’ यानी ‘हिंदुस्तान छोड़ो’. Read more: हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -2: जब Cripps Mission नहीं सुलझा सका गतिरोध, और बना हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन का कारण कांग्रेस ने भी तय कर लिया- अब पीछे नहीं हटेंगे 14 जुलाई 1942 को कांग्रेस कार्यसमिति ने ब्रिटिश शासन की समाप्ति की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. प्रस्ताव में कहा गया कि अगर ब्रिटिश प्रशासन इस अपील को स्वीकार नहीं करती, तो कांग्रेस नेतृत्वक अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए अपने अहिंसक आंदोलन की ताकत का इस्तेमाल करने को मजबूर होगी. यह महत्वपूर्ण था. 1920 के बाद से कांग्रेस ने कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया था, लेकिन 1942 में परिस्थितियां अलग थीं. विश्वयुद्ध चल रहा था, जापान हिंदुस्तान के करीब पहुंच चुका था और ब्रिटिश प्रशासन हिंदुस्तानीयों को सत्ता में निर्णायक हिस्सेदारी देने के लिए तैयार नहीं थी. अब कांग्रेस के सामने सवाल था- क्या अंग्रेजी शासन के खिलाफ अंतिम और निर्णायक संघर्ष शुरू किया जाए? जवाब जल्द मिलने वाला था. 8 अगस्त 1942: ‘Quit India Resolution’ 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल हिंदुस्तानीय कांग्रेस समिति (AICC) की बैठक हुई. कांग्रेस ने कार्यसमिति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. प्रस्ताव में कहा गया कि हिंदुस्तान में ब्रिटिश शासन का तत्काल अंत जरूरी है. यह केवल हिंदुस्तान के लिए नहीं, बल्कि मित्र राष्ट्रों (Allied Powers) के युद्ध प्रयास के लिए भी जरूरी बताया गया. यहीं से हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन ने औपचारिक नेतृत्वक रूप ले लिया. Mahatma Gandhi ने इसी अवसर पर वह संदेश दिया, जो आने वाले दिनों में पूरे देश में आंदोलन का प्रतीक बन गया- करो या मरो (Do or Die). यह केवल एक नारा नहीं था. यह उस समय की नेतृत्वक बेचैनी का संक्षिप्त रूप बन गया था. 8 अगस्त की शाम कांग्रेस ने फैसला सुनाया था. 9 अगस्त की सुबह जनता ने उसका जवाब देना शुरू कर दिया… 8 अगस्त 1942 को कांग्रेस ने हिंदुस्तान छोड़ो प्रस्ताव पारित किया और अगली ही सुबह गांधी समेत शीर्ष नेतृत्व गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन गिरफ्तारियों के साथ आंदोलन खत्म नहीं हुआ. कई इलाकों में जनता ने खुद प्रतिरोध की कमान संभाल ली. पढ़ें अगली स्टोरी में… Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 1 Read more: Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 2 The post हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन -3: 8 अगस्त 1942 को क्या-क्या हुआ… Quit India Resolution की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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साहेबगंज के अनुराग ने UPSC CAPF में हासिल की AIR 232 रैंक, बने असिस्टेंट कमांडेंट

सक्सेस स्टोरी: मुजफ्फरपुर के साहेबगंज के रहने वाले अनुराग राज ने UPSC CAPF Assistant Commandant 2025 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 232 हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. इस सफलता के साथ अनुराग का चयन CAPF में असिस्टेंट कमांडेंट (राजपत्रित अधिकारी, ग्रेड-A) के पद पर हुआ है. अनुराग की सफलता की समाचार मिलते ही परिवार और आसपास के लोगों में खुशी का माहौल है. अनुराग समस्तीपुर में रहकर सेल्फ स्टडी करते थे. रिजल्ट आने के बाद आज वे अपने गांव पहुंचे, जहां ग्रामीणों और परिजनों ने उनका फूल-माले के साथ जोरदार स्वागत किया. JNV और BHU से की है पढ़ाई अनुराग मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड के वार्ड नंबर 8 के रहने वाले हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, मुजफ्फरपुर से पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का रुख किया. पढ़ाई के साथ ही अनुराग ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी और मेहनत के दम पर UPSC CAPF की परीक्षा में सफलता हासिल की. तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं अनुराग अनुराग अपने परिवार में तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं. उनके छोटे भाई अभिनव और आदित्या हैं. दोनों अभी पढ़ाई करते हैं. सबसे छोटे भाई आदित्या NEET की तैयारी कर रहे हैं. हमेशा से अनुराग को अपने दादा जी, अनिरूद्ध प्रसाद से अधिक लगाव रहा है. वे हमेशा अनुराग को मोटिवेट करते हैं. पिता करते हैं व्यवसाय, मां संभालती हैं घर अनुराग के पिता राकेश कुमार राज बिजनेस करते हैं, जबकि उनकी मां संध्या देवी हाउसवाइफ हैं. सीमित पारिवारिक पृष्ठभूमि के बीच अनुराग ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है. बेटे के असिस्टेंट कमांडेंट बनने की समाचार से परिवार में खुशी का माहौल है. मेहनत से हासिल किया मुकाम UPSC CAPF Assistant Commandant परीक्षा देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है. इसके माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर अधिकारियों का चयन किया जाता है. अनुराग ने इस परीक्षा में AIR 232 रैंक हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ मुजफ्फरपुर का भी नाम रोशन किया है. यह भी पढे़ं: शर्मनाक… स्ट्रेचर नहीं मिला तो बीमार पत्नी को पीठ पर लाद लिया पति, व्यवस्था पर उठे सवाल The post साहेबगंज के अनुराग ने UPSC CAPF में हासिल की AIR 232 रैंक, बने असिस्टेंट कमांडेंट appeared first on Naya Vichar.

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