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Author name: Vinod Jha

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पीएम मोदी ने 6 महीने में किए 13 देशों के दौरे: 75 करोड़ रुपये हुए खर्च, नॉर्वे यात्रा रही सबसे महंगी

केंद्र प्रशासन ने संसद में बताया, 2021 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश यात्राओं पर कुल 557 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. AAP सांसद संजय सिंह और CPI सांसद ने प्रशासन से मांगा जवाब आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और सीपीआई (CPI) के सांसद वी शिवदासन ने राज्यसभा में पीएम मोदी की यात्रा पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी. जिसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने डेटा सामने रखे. इस साल अब तक 13 देशों की यात्रा कर चुके हैं पीएम मोदी मंत्रालय ने बताया कि इस साल जुलाई तक प्रधानमंत्री के विदेश यात्राओं पर कुल 74,58,93,797 रुपये (लगभग 74.59 करोड़ रुपये) खर्च हुए हैं. इस दौरान उन्होंने मलेशिया, इजरायल, यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली, फ्रांस, स्लोवाकिया, सेशेल्स, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित 13 देशों की यात्राएं कीं. नॉर्वे और इजराइल दौरे पर हुआ सबसे ज्यादा खर्च विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल सबसे अधिक 17.46 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री के नॉर्वे दौरे पर खर्च हुई. इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च फरवरी में उनके इजरायल दौरे पर आया, जिस पर 11.92 करोड़ रुपये खर्च हुए. 2021 से लेकर जुलाई 2026 तक पीएम मोदी की यात्राओं में खर्च हुए 557.51 करोड़ रुपये विदेश मंत्रालय ने बताया, 2021 से लेकर जुलाई 2026 तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल मिलाकर 5,57,51,34,018.56 रुपये (लगभग 557.51 करोड़ रुपये) खर्च किए गए हैं. पिछले साल सबसे ज्यादा 25.59 करोड़ रुपये फ्रांस दौरे पर खर्च हुई थी. यूपीए प्रशासन के दौरों से भी की गई तुलना मंत्रालय ने UPA प्रशासन के दौरान हुए विदेश दौरों के आंकड़े भी शेयर किए. अमेरिका (2011): 10.74 करोड़ रुपये रूस (2013): 9.95 करोड़ रुपये फ्रांस (2011): 8.33 करोड़ रुपये जर्मनी (2013): 6.02 करोड़ रुपये विदेश यात्राओं में पीएम मोदी का शेड्यूल प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों के मुख्य कार्यक्रमों में द्विपक्षीय बैठकें, हिंदुस्तानीय समुदाय (डायस्पोरा) के साथ बात, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी, स्मारक दौरे और स्टेट बैंक्वेट शामिल होते हैं. पीएम मोदी विशेष विमान ‘एयर इंडिया वन’ (बोइंग 777-300ER) से यात्रा करते हैं. उनकी यात्राओं में पीएमओ, विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का सुरक्षा दस्ता साथ रहता है. ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह को बताया डरपोक, कहा-गुंडे भेजकर छात्रों से मंगवा रहे हैं माफी The post पीएम मोदी ने 6 महीने में किए 13 देशों के दौरे: 75 करोड़ रुपये हुए खर्च, नॉर्वे यात्रा रही सबसे महंगी appeared first on Naya Vichar.

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CJP ने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा, अभिजीत दीपके की टीम में 3 महिलाओं को भी मिली जगह

CJP National Committee : नई नेतृत्वक पहल के तौर पर सामने आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है. पार्टी ने 12 सदस्यीय राष्ट्रीय नेतृत्व टीम बनाई है, जिसमें तीन स्त्रीओं को जगह दी गई है. कार्यकारिणी में आफरीन नवाज को राष्ट्रीय सचिव और वैष्णवी गौर को रिसर्च एवं पॉलिसी प्रमुख बनाया गया है. वहीं रत्ना सिंह को लीगल अफेयर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी ने साथ ही आने वाले छह महीनों में देशभर में संगठन विस्तार का रोडमैप भी जारी किया है. बीते महीने 37 दिन के आंदोलन के दौरान देश भर के अलावा विदेशों में भी सीजेपी चर्चा का विषय बनी हुई थी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ आंदोलन को सफलता भी मिली. जिसके बाद सीजेपी नेतृत्व को देश भर में लोग जानने लग गए. संस्थापक से लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारियों तक जिम्मेदारियां तय पार्टी की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, अभिजीत दिपके (30) को संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया गया है. आशुतोष रंका (30) और सौरव दास (27) को सह-संयोजक बनाया गया है. वहीं अजिंक्य शिंदे को राष्ट्रीय संगठन प्रभारी, दीपक बलियान को संगठन सह-प्रभारी, विजय रेड्डी मल्लांगी को मीडिया प्रमुख, रत्ना सिंह को लीगल अफेयर्स प्रमुख, रोहन देशपांडे को टेक्नोलॉजी प्रमुख और योगेश इंगले को फाइनेंस प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है. CJP कार्यकारिणी में सदस्यों की लिस्ट स्त्रीओं को सीमित प्रतिनिधित्व, दो को मिली अहम जिम्मेदारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्त्रीओं की भागीदारी सीमित रही है. 12 सदस्यीय टीम में केवल तीन स्त्री पदाधिकारी शामिल हैं. इनमें आफरीन नवाज संगठन की राष्ट्रीय सचिव होंगी, वैष्णवी गौर रिसर्च एवं पॉलिसी से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी और रत्ना सिंह लीगल मामले संभाला करेंगी. बाकी सभी प्रमुख पद पुरुषों को दिए गए हैं. चार जोन में संगठन, छह महीने में विस्तार का लक्ष्य पार्टी ने देश को चार जोन में बांटते हुए जोनल नेतृत्व की भी घोषणा की है. उत्तर जोन की जिम्मेदारी दीपक बलियान, दक्षिण जोन की विजय रेड्डी मल्लांगी, पूर्व एवं उत्तर-पूर्व जोन की अंकित भारद्वाज और पश्चिम जोन की योगेश इंगले को सौंपी गई है. दस्तावेज में कहा गया है कि अगले छह महीनों में सभी राज्यों, लोकसभा क्षेत्रों और शहर स्तर पर संगठन का विस्तार किया जाएगा. साथ ही स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल केवल घोषित पदाधिकारी ही पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि माने जाएंगे. Also read : कोच्चि जा रही फ्लाइट में यात्री ने की इमरजेंसी डोर खोलने की कोशिश, अन्य यात्रियों को भी धमकाया The post CJP ने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा, अभिजीत दीपके की टीम में 3 स्त्रीओं को भी मिली जगह appeared first on Naya Vichar.

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गाड़ी सं.11401/11402 पुणे-सुपौल-पुणे एक्सप्रेस का भुसावल मंडल के रावेर स्टेशन पर ठहराव

नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर: यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर मध्य रेलवे के भुसावल मंडल के भुसावल-खंडवा रेलखंड पर स्थित रावेर स्टेशन पर गाड़ी सं. 11401/11402 पुणे-सुपौल-पुणे एक्सप्रेस का तत्काल प्रभाव से अस्थायी ठहराव प्रदान किया गया है । गाड़ी सं. 11401 पुणे-सुपौल एक्सप्रेस 05.22 बजे रावेर स्टेशन पहुंचेगी और 05.23 बजे आगे के लिए प्रस्थान करेगी । इसी तरह गाड़ी सं. 11402 सुपौल-पुणे एक्सप्रेस 17.44 बजे रावेर स्टेशन पहुंचेगी और 17.45 बजे आगे के लिए प्रस्थान करेगी ।

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बंगाल बकाया DA मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी से 2 दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के प्रशासनी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी (Monitoring Committee) को अगले 2 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मामले से जुड़े सभी पक्षों को सौंपने का आदेश दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी, जहां राज्य प्रशासन के रुख और डीए समस्या के समाधान पर अंतिम रूप से विचार किया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने बनायी थी मॉनिटरिंग कमेटी पश्चिम बंगाल डीए मामले के मूल फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य प्रशासन को कर्मचारियों का पूरा बकाया डीए चुकता करना होगा. अदालत ने बकाया डीए का 25 प्रतिशत हिस्सा तुरंत भुगतान करने का निर्देश दिया था. साथ ही कहा था कि शेष 75 प्रतिशत बकाया राशि का भुगतान किश्तों में किस प्रकार किया जाये, ताकि राज्य के खजाने पर अचानक अत्यधिक वित्तीय बोझ न पड़े, इसका खाका तैयार करने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की थी. ये भी पढ़ें: बंगाल के प्रशासनी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, शुभेंदु अधिकारी का ऐलान- केंद्र के बराबर मिलेगा महंगाई भत्ता सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल फॉर्मेट में मांगी रिपोर्ट न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट को डिजिटल प्रारूप (Digital Format) में 2 दिन के भीतर सभी पक्षों को उपलब्ध कराये. इस रिपोर्ट में जो जानकारी देने के लिए कहा गया है, वे इस प्रकार हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कितना पालन हुआ है. डीए भुगतान की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है. अब तक कितना बकाया चुकाया गया है और कितना बाकी है. शेष राशि चुकाने के लिए राज्य प्रशासन की क्या योजना है. 85 फीसदी डीए देने को तैयार बंगाल प्रशासन पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर उसे अपनी वित्तीय स्थिति से अवगत कराया है. राज्य का तर्क है कि भारी वित्तीय बोझ के कारण 100 प्रतिशत डीए का एकमुश्त भुगतान संभव नहीं है. प्रशासन ने अदालत से 85 प्रतिशत बकाया डीए चुकाने की अनुमति मांगी है और बाकी 15 प्रतिशत की छूट की प्रार्थना की है. ये भी पढ़ें: बंगाल में बकाया डीए देने की प्रक्रिया शुरू, इस पोर्टल पर मिलेगी राशि की जानकारी 11 साल का 11,983 करोड़ रुपए का होना है भुगतान पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी प्रशासन ने बताया है कि वर्ष 2008 से 2019 तक के कर्मचारियों के बकाया डीए के रूप में कुल 11,983 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है. प्रशासन ने पहली किस्त जारी कर दी है. इसमें कर्मचारियों को 7,771 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है. किस्तों का टाइमलाइन पहली किस्त के रूप में 7,771 करोड़ रुपए जारी किये जा चुके हैं. दूसरी किस्त जनवरी 2027 में दी जायेगी. तीसरी किस्त जुलाई 2027 में दी जायेगी. चौथी किस्त जनवरी 2028 में देकर पूरा भुगतान समाप्त करने की योजना है. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल का बजट : प्रशासनी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ाने का ऐलान कर्मचारी संगठन का दावा- अभी तक नहीं मिला एक पैसा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्मचारी संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पीठ के समक्ष दावा किया कि प्रशासन द्वारा डीए भुगतान की बातें किये जाने के बावजूद उनके मुवक्किलों को अब तक एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ है. ये भी पढ़ें: बकाया डीए पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य प्रशासन ने दी अर्जी केंद्रीय डीए से अभी भी 22 प्रतिशत का अंतर वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है. पश्चिम बंगाल प्रशासन ने हालिया बजट में डीए की दर में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे अगस्त महीने से राज्य के कर्मचारियों को 38 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है. हालांकि, इस बढ़ोतरी के बावजूद राज्य और केंद्र के डीए में अभी भी 22 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है. The post बंगाल बकाया DA मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी से 2 दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट appeared first on Naya Vichar.

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Deepak Prakash MLC Oath: दीपक प्रकाश ने ली MLC पद की शपथ, मंत्री पद अब पूरी तरह सुरक्षित

Deepak Prakash MLC Oath: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अब विधान परिषद के सदस्य (MLC) बन गए हैं. एमएलसी पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने अपने पिता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. दीपक प्रकाश को बीजेपी नेता देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर मनोनीत किया गया है. वे अब तक बिहार विधानसभा या विधान परिषद में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे और बिना चुनाव जीते ही सम्राट चौधरी प्रशासन में मंत्री पद संभाल रहे थे. राज्यपाल से मंजूरी के बाद राजभवन से जारी हुआ फैसला बीजेपी नेता देवेश कुमार के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत करने का प्रस्ताव सम्राट चौधरी प्रशासन ने राजभवन भेजा था. राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी. इसके बाद आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई. एमएलसी बनते ही लंबे समय से चला आ रहा सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद लिया गया फैसला दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट का दबाव मुख्य कारण माना जा रहा है. दरअसल, बिना सदन का सदस्य बने मंत्री पद पर रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. पिछले हफ्ते कोर्ट ने बिहार प्रशासन से सवाल पूछते हुए पूछा था कि कोई व्यक्ति बिना विधायक या एमएलसी बने इतने लंबे समय तक मंत्री पद पर कैसे रह सकता है? बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें 27 अगस्त की अगली सुनवाई से पहले सुरक्षित हुई कुर्सी इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी तय है. लेकिन अदालत की अगली तारीख से पहले ही राज्य प्रशासन ने उन्हें एमएलसी बनाकर उनके मंत्री पद पर मंडरा रहे कानूनी संकट को खत्म कर दिया है. अब वे कानूनी रूप से सदन के सदस्य बन चुके हैं. इससे उनका मंत्री पद सुरक्षित हो गया है. इसे भी पढ़ें: पटना से गया तक चली तबादला एक्सप्रेस, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में 20 अफसरों का ट्रांसफर पहले नीतीश और फिर सम्राट प्रशासन में बने मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश सबसे पहले नवंबर 2025 में तत्कालीन नीतीश कुमार की प्रशासन में मंत्री बनाए गए थे. वे एनडीए प्रशासन में अपनी पार्टी (RLM) के कोटे से अकेले मंत्री थे. उस समय भी वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे और अप्रैल 2026 तक मंत्री रहे. इसके बाद 7 मई 2026 को जब सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने और नई कैबिनेट का विस्तार हुआ, तो दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया और वे लगातार बिना चुनाव जीते मंत्री पद पर बने हुए थे. इसे भी पढ़ें:  बिहार में इस उद्योग के लिए प्रशासन देगी 70 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी, एक क्लिक में होगा आवेदन The post Deepak Prakash MLC Oath: दीपक प्रकाश ने ली MLC पद की शपथ, मंत्री पद अब पूरी तरह सुरक्षित appeared first on Naya Vichar.

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गोबरधन योजना को कैबिनेट की हरी झंडी: 10 गुना बढ़ेगा CBG उत्पादन, 1.5 लाख को रोजगार

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, इस योजना के तहत कृषि अपशिष्ट, पशुओं के गोबर, गन्ने की खोई और शहरी जैविक कचरे का उपयोग करके स्वच्छ ईंधन व जैविक खाद तैयार की जाएगी. इससे ग्रामीण आय बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य में भी इजाफा होगा. प्रशासन का अनुमान है कि इस पहल से अगले एक दशक में सीबीजी उत्पादन में 10 गुना बढ़ोतरी होगी, जिससे राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 75,000 करोड़ रुपये का योगदान मिलेगा और करीब 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. योजना के छह पिलर पक्का ऑफटेक: उत्पादित सीबीजी की बिक्री की गारंटी दी जाएगी. मूल्य स्थिरता: वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बायोगैस क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थिर मूल्य प्रणाली बनाई गई है. कैपेक्स सहायता: बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आवश्यक पूंजीगत खर्च में वित्तीय मदद दी जाएगी. पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर: उत्पादित बायोगैस को प्लांट से ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क का विकास किया जाएगा. इसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. क्रेडिट गारंटी: एमएसएमई (MSME) और विशेष रूप से स्त्रीओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को आसान ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. इनोवेशन: बायोगैस क्षेत्र में नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा. ये भी पढ़ें: पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाने पर मेटा ने मांगी माफी, पैसा लेकर कंटेंट बूस्ट करने का खुलासा ये भी पढ़ें: 30 करोड़ से बदलेगा राजखरसावां रेलवे स्टेशन का स्वरूप, मिलेगी लिफ्ट-एस्केलेटर समेत आधुनिक सुविधाएं The post गोबरधन योजना को कैबिनेट की हरी झंडी: 10 गुना बढ़ेगा CBG उत्पादन, 1.5 लाख को रोजगार appeared first on Naya Vichar.

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श्रीलंका सीरीज से पहले मुश्किल में भारतीय टीम, कप्तान शुभमन गिल हुए चोटिल

श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले हिंदुस्तानीय टीम को एक और चोट का डर सताने लगा है. टेस्ट कप्तान शुभमन गिल अभ्यास सत्र के दौरान अंगूठे में चोटिल हो गए. जिसके बाद वो काफी दर्द में दिखें. हालांकि, अभी तक उनकी चोट को लेकर कोई आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका ए के खिलाफ अभ्यास मैच से एक दिन पहले नेट्स में बल्लेबाजी करते समय गेंद शुभमन गिल के अंगूठे पर लगी. इसके बाद मेडिकल स्टाफ ने तुरंत उनका इलाज किया. राहत की बात यह रही कि इलाज के बाद गिल फिर से नेट्स में लौटे और अभ्यास जारी रखा. अब देखना होगा कि उनकी चोट कितनी गहरी है. हिंदुस्तानीय टीम को सताने लगी चिंता हिंदुस्तान के लिए यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पिछले एक महीने में कई खिलाड़ी चोटिल होकर टीम से बाहर हो चुके हैं. नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा पहले ही बाहर हो चुके हैं. वहीं जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन और वॉशिंगटन सुंदर की चोटों ने भी टीम मैनेजमेंट की परेशानी बढ़ा दी है. ये भी पढ़ें: ’15 अगस्त को मैदान पर उतरते ही हर सवाल का देंगे जवाब’, श्रीलंका दौरे से पहले गौतम गंभीर ने भरी हुंकार बुमराह की जगह आकिब नबी को किया शामिल बुमराह के बाहर होने के बाद तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार हिंदुस्तानीय टेस्ट टीम में मौका मिला है. वहीं हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वॉशिंगटन सुंदर का पहले टेस्ट में स्पोर्ट्सना मुश्किल माना जा रहा है. साई सुदर्शन भी पैर के अंगूठे की चोट से उबर रहे हैं. वह अभी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैब कर रहे हैं और श्रीलंका गई हिंदुस्तानीय टीम के साथ नहीं हैं. 15 अगस्त से शुरू होगा मुकाबला हिंदुस्तानीय टीम शुक्रवार से कोलंबो के नॉनडिस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब मैदान पर श्रीलंका इलेवन के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मैच स्पोर्ट्सेगी. इसके बाद 15 अगस्त से गॉल में दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला स्पोर्ट्सा जाएगा. ये भी पढ़ें: BCCI का एक्शन, खिलाड़ियों का कद देखकर फिटनेस पर नहीं करें समझौता; फिजियो को मिले सख्त निर्देश The post श्रीलंका सीरीज से पहले मुश्किल में हिंदुस्तानीय टीम, कप्तान शुभमन गिल हुए चोटिल appeared first on Naya Vichar.

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कोच्चि जा रही फ्लाइट में यात्री ने की इमरजेंसी डोर खोलने की कोशिश, अन्य यात्रियों को भी धमकाया

Emergency Exit Attempt : कुआलालंपुर से केरल के कोच्चि आ रही बटिक एयर की एक फ्लाइट में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक यात्री ने उड़ान के दौरान विमान का इमरजेंसी एग्जिट खोलने की कथित तौर पर कोशिश की. इस दौरान उसने इमरजेंसी एग्जिट की खिड़की के पैनल को भी नुकसान पहुंचाया और अन्य यात्रियों को धमकाया. विमान के सुरक्षित कोच्चि पहुंचने के बाद आरोपी को सीआईएसएफ ने हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया. हवा में उड़ान के दौरान हुई घटना पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान केरल के पलक्कड़ जिले के कूटन्नाड निवासी हिंदुस्तानीय नागरिक जमशीर अथानिक्कल के रूप में हुई है. वह बुधवार को बटिक एयर की फ्लाइट OD231 से कुआलालंपुर से कोच्चि आ रहा था. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया एफआईआर के मुताबिक, रात करीब 9:30 बजे से 11:05 बजे के बीच, जब विमान हवा में था, उसने इमरजेंसी एग्जिट खोलने की कोशिश की. आरोप है कि उसने एग्जिट विंडो का पैनल को भी नुकसान पहुंचाया और यात्रियों को धमकाकर विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया. CISF ने हिरासत में लेकर पुलिस को सौंपा बटिक एयर के सुरक्षा प्रभारी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है. विमान के कोच्चि एयरपोर्ट पर उतरते ही सीआईएसएफ कर्मियों ने आरोपी को हिरासत में लिया और बाद में नेदुम्बास्सेरी पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया. पुलिस ने उसके खिलाफ हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) (आपराधिक धमकी), एयरक्राफ्ट एक्ट की धारा 11A (विमान की सुरक्षा संबंधी निर्देशों का उल्लंघन) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118(e) के तहत मामला दर्ज किया है. यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप पुलिस का कहना है कि आरोपी की हरकत से विमान में मौजूद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी. फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि उसने इमरजेंसी एग्जिट खोलने की कोशिश क्यों की. Also read : Tribalpedia Latin-America: Rosewood की लड़ाई ने दुनिया को क्या सिखाया? Also read : झारखंड छात्र आंदोलन पर खरगे बोले- छात्रों के मुद्दे जहां होंगे, कांग्रेस उनकी आवाज उठाएगी The post कोच्चि जा रही फ्लाइट में यात्री ने की इमरजेंसी डोर खोलने की कोशिश, अन्य यात्रियों को भी धमकाया appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: सरकार से वार्ता के लिए छात्रों ने बनाई 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की टीम, सार्वजनिक बातचीत पर अड़े

रांची से राजलक्ष्मी, अरविंद कुमार सिंह और नवीन शर्मा की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने प्रशासन के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल तय कर लिया है. आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे प्रशासन से बातचीत के लिए पूरी तैयारी के साथ जाएंगे, लेकिन वार्ता पारदर्शी और सार्वजनिक होनी चाहिए. इसके लिए प्रतिनिधिमंडल की सूची भी जारी कर दी गई है, जिसमें छात्र प्रतिनिधियों के अलावा पत्रकार और कानूनविद को केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में शामिल किया गया है. आठ छात्र होंगे प्रतिनिधिमंडल का मुख्य चेहरा छात्रों की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र शामिल किए गए हैं. इनमें रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, अंकित कुमार और शालू सिंह शामिल हैं. आंदोलनकारी छात्रों ने कहा है कि प्रशासन के समक्ष आंदोलन से जुड़ी सभी मांगें, तथ्य और सुझाव केवल यही छात्र प्रतिनिधि प्रस्तुत करेंगे. छात्रों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और इसकी आवाज भी छात्र ही बनेंगे. इसलिए प्रशासन के साथ होने वाली बातचीत में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से मांगें या पक्ष नहीं रखा जाएगा. पत्रकार और कानूनविद होंगे केवल अभिभावक प्रतिनिधिमंडल में दो वरिष्ठ पत्रकार और द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा को अभिभावक एवं मार्गदर्शक के रूप में शामिल किया गया है. वहीं कानूनविद अजीत कुमार भी प्रतिनिधिमंडल के साथ अभिभावक की भूमिका में मौजूद रहेंगे. छात्रों ने स्पष्ट किया है कि पत्रकार और कानूनविद वार्ता में किसी प्रकार की बातचीत नहीं करेंगे. वे केवल छात्रों के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए उपस्थित रहेंगे. सभी विषयों पर अपनी बात रखने का अधिकार केवल छात्र प्रतिनिधियों के पास रहेगा. मीडिया उपकरण लेकर प्रवेश नहीं करेंगे पत्रकार आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. निर्देशों के अनुसार, पत्रकार प्रतिनिधि बैठक स्थल के अंदर किसी भी प्रकार का माइक, कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस या साउंड सिस्टम लेकर प्रवेश नहीं करेंगे. छात्रों का कहना है कि पत्रकारों की मौजूदगी केवल अभिभावक के रूप में रहेगी. उनका उद्देश्य वार्ता को प्रभावित करना नहीं, बल्कि छात्रों को नैतिक और बौद्धिक सहयोग देना है. प्रशासन ने पांच सदस्यीय टीम को दिया वार्ता का प्रस्ताव बुधवार को प्रशासन की ओर से सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कुमार रजत आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे. उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को प्रशासन का संदेश देते हुए कहा कि राज्य प्रशासन छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है. प्रशासन चाहती है कि छात्रों की मांगों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर समाधान का रास्ता निकाला जाए. प्रशासन के इस प्रस्ताव का छात्रों ने स्वागत किया और बातचीत के लिए अपनी सहमति भी जताई. हालांकि उन्होंने वार्ता को लेकर अपनी कुछ शर्तें भी सामने रखीं. बंद कमरे में नहीं होगी बातचीत छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे बंद कमरे में प्रशासन से बातचीत नहीं करेंगे. उनका कहना है कि आंदोलन लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए वार्ता पूरी तरह सार्वजनिक और पारदर्शी होनी चाहिए. आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि प्रशासन के साथ होने वाली बैठक मीडिया की मौजूदगी में आयोजित की जाए, ताकि राज्य की जनता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी पूरी प्रक्रिया को देख सकें. उनका मानना है कि खुली वार्ता से किसी भी तरह की गलतफहमी या विवाद की संभावना नहीं रहेगी. इसे भी पढ़ेंं: JPSC Student Protest: छात्रों के आंदोलन पर जयराम महतो का ऐलान, बोले- जरूरत पड़ी तो खुद अनशन पर बैठूंगा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से होगी वार्ता छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी वार्ता छात्र प्रतिनिधियों के नेतृत्व में शांतिपूर्ण, अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी. उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन के समक्ष रखना है. अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है. यदि वार्ता के प्रारूप और प्रतिनिधिमंडल को लेकर दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है. फिलहाल आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर कायम हैं और पारदर्शी वार्ता की मांग को लेकर एकजुट दिखाई दे रहे हैं. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: सीएम हाउस से छात्रों को आया संदेश, पांच लोगों के प्रतिनिधि से बात करेगी प्रशासन The post JPSC Student Protest: प्रशासन से वार्ता के लिए छात्रों ने बनाई 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की टीम, सार्वजनिक बातचीत पर अड़े appeared first on Naya Vichar.

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‘हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए’: अभिजीत दीपके के घर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठा युवक

प्रदर्शन कर रहे युवकों की पहचान अहमदाबाद के रहने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या के रूप में हुई है. दोनों युवक वालुज एमआईडीसी स्थित अभिजीत दीपके के आवास पर पहुंचे थे, जहां CJP की कोर टीम आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक कर रही थी. ‘एक और केजरीवाल नहीं चाहिए’ आप (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल का जिक्र करते हुए ब्रह्मभट्ट ने कहा, “हमें देश में एक और केजरीवाल नहीं चाहिए. मैं अब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ रहा हूं.” उनका इशारा 2011 के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के बाद उपजे नेतृत्वक घटनाक्रम की ओर था. ये भी पढ़ें: पढ़ाई के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर अभिजीत दीपके का जवाब- स्कॉलरशिप से विदेश गया, एजुकेशन लोन के दस्तावेज दिखाऊंगा “आंदोलन पूरे देश का, रिश्तेदार तय नहीं कर सकते रणनीति” भूख हड़ताल पर बैठे मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन में रात-दिन एक करने वाले स्वयंसेवकों को दरकिनार किया जा रहा है. ब्रह्मभट्ट ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “जब आंदोलन शुरू हुआ था, तब इसका कोई एक चेहरा नहीं था. मैंने और देश भर के कई युवाओं ने जंतर-मंतर पर अपना योगदान दिया. मैं यहां कोर टीम से मिलने और सुझाव देने आया था, लेकिन मुझे बैठक में शामिल होना तो दूर, मिलने तक नहीं दिया गया.” उन्होंने कहा कि संगठन में आंतरिक लोकतंत्र होना चाहिए. दीपके के कुछ रिश्तेदार और करीबी दोस्त बंद कमरे में बैठकर इस राष्ट्रीय आंदोलन का भविष्य तय नहीं कर सकते. ये भी पढ़ें: झारखंड छात्र आंदोलन के समर्थन में उतरे CJP चीफ अभिजीत दीपके, बोले- जरूरत पड़ी तो आऊंगा रांची The post ‘हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए’: अभिजीत दीपके के घर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठा युवक appeared first on Naya Vichar.

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