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Author name: Vinod Jha

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UP विधानसभा 2027: 45 सीटों पर चंद्रशेखर की पहली चुनावी चाल, SC-OBC-मुस्लिम कार्ड से बढ़ाई सियासी हलचल

UP Politics: प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संगठन विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने प्रदेश की 45 विधानसभा सीटों के लिए प्रभारियों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में सामाजिक संतुलन पर विशेष जोर दिया गया है. सामाजिक समीकरण पर खास फोकस जारी सूची के अनुसार, पार्टी ने 18 अनुसूचित जाति (SC), 17 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 9 मुस्लिम समुदाय से आने वाले नेताओं को विधानसभा प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है. एक अन्य प्रभारी सामान्य वर्ग से है. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि पार्टी सामाजिक प्रतिनिधित्व को चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है. 2027 की तैयारी में जुटी ASP चंद्रशेखर आजाद लगातार प्रदेशभर में संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं. विधानसभा स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति को बूथ और संगठन के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है. पार्टी का लक्ष्य 2027 के चुनाव से पहले हर विधानसभा क्षेत्र में अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराना है. सियासी संदेश भी स्पष्ट नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि पहली सूची के जरिए आजाद समाज पार्टी ने दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोट बैंक को साधने का संदेश देने की कोशिश की है. आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से और भी विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की घोषणा की जा सकती है. चुनावी मुकाबला होगा दिलचस्प उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं. ऐसे में आजाद समाज पार्टी की यह पहल प्रदेश की सियासत में नई चर्चा का विषय बन गई है. यह भी पढ़ें: योगी जी पहले इतिहास पढ़ लें, आप नेता संजय सिंह का दावा- श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिन्ना के साथ चलाते थे प्रशासन The post UP विधानसभा 2027: 45 सीटों पर चंद्रशेखर की पहली चुनावी चाल, SC-OBC-मुस्लिम कार्ड से बढ़ाई सियासी हलचल appeared first on Naya Vichar.

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ऑनलाइन मोड में शुरू होंगे 1 साल के PG प्रोग्राम, UGC का नोटिस जारी

UGC Notice: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने छात्रों के लिए एक अहम फैसला लिया है. UGC ने 28 जुलाई 2026 को जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि अब योग्य हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन (HEIs) ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) और ऑनलाइन मोड के जरिए भी एक साल का पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू कर सकेंगे. यह व्यवस्था नेशनल एजुकेशन पॅालिसि (NEP) 2020 के तहत लागू की गई है. इससे उन छात्रों को फायदा मिलेगा जिन्होंने चार वर्षीय ऑनर्स बैचलर डिग्री पूरी की है और आगे की पढ़ाई कम समय में पूरी करना चाहते हैं. किन छात्रों को मिलेगा इसका लाभ? UGC के अनुसार यह एक साल का पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम सिर्फ उन्हीं छात्रों के लिए होगा जिन्होंने नियमित रूप से चार वर्षीय बैचलर डिग्री विद ऑनर्स पूरी की है. अब हर छात्र इस कोर्स में दाखिला नहीं ले सकेगा. प्रवेश के लिए संबंधित कोर्स की एलिजिबिलिटी भी पूरी करनी होगी. ये भी पढ़ें: NEP 2020 विकसित हिंदुस्तान@2047 की मजबूत आधारशिला, IIIT रांची में आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन कौन से संस्थान शुरू कर सकेंगे यह कोर्स? UGC ने साफ किया है कि केवल वही उच्च शिक्षण संस्थान इस एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम को शुरू कर सकेंगे, जिन्हें पहले से ODL या ऑनलाइन मोड में दो वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स चलाने की मंजूरी मिली हुई है. इसके अलावा संस्थान को UGC के सभी नियमों, रेगुलेशन और संबंधित रेगुलेटरी बॅाडीज के नियमों का पालन करना होगा. Rules to be Followed: इन नियमों का करना होगा पालन सर्कुलर के मुताबिक एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम (PG Program) पूरी तरह NEP 2020 और UGC के नियमों के मुताबिक होना चाहिए. संस्थान को निर्धारित क्रेडिट सिस्टम, पाठ्यक्रम, स्टडी मेटेरियल, इवैलुएशन प्रोसेस और अन्य एकेडमिक स्टैंडर्ड का पालन करना होगा. MBA, MCA जैसे कोर्स के लिए अलग एलिजिबिटि UGC ने यह भी स्पष्ट किया है कि MBA, MCA, PGDM और ऐसे अन्य प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश के लिए संबंधित इंस्टीट्यूट द्वारा तय एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया लागू रहेंगी. एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम की सुविधा मिलने के बावजूद इन कोर्सों में दाखिले के नियम पहले की तरह ही रहेंगे. छात्रों को आवेदन से पहले संबंधित विश्वविद्यालय और कोर्स की एलिजिबिटि देख लेनी होगी. ये भी पढ़ें: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह साल: सीयूएसबी कुलपति बोले- उच्च शिक्षा को मिली नई दिशा The post ऑनलाइन मोड में शुरू होंगे 1 साल के PG प्रोग्राम, UGC का नोटिस जारी appeared first on Naya Vichar.

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क्या भारत में गाली देने पर हो सकती है जेल? नोएडा में दर्ज केस के बहाने समझिए पूरा कानून

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में 25 वर्षीय एक युवती के खिलाफ नोएडा पुलिस ने FIR दर्ज की है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर इस सवाल को लेकर चर्चा की जा रही है कि क्या हिंदुस्तान में किसी को गाली देने या किसी नेता के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने पर जेल हो सकती है? कई यूजर इसको लेकर कानून के बारे में भी जानना चाह रहे हैं. पहले समझिए नोएडा में क्यों दर्ज हुआ केस? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के आरोप में नोएडा पुलिस ने एक युवती के खिलाफ जीरो FIR दर्ज किया है. यानी कानून सिर्फ शब्द नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि वे किस संदर्भ में बोले गए, उनका उद्देश्य क्या था और उनका असर क्या पड़ा. यदि कोई मामला अदालत तक पहुंचता है, तो न्यायालय कई पहलुओं पर विचार करता है. जैसे बयान किस परिस्थिति में दिया गया? उसका उद्देश्य क्या था? क्या उससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को वास्तविक नुकसान पहुंचा? क्या उससे सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना थी? क्या बयान संविधान द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है? इन सभी तथ्यों के आधार पर ही तय होता है कि मामला आपराधिक अपराध बनता है या नहीं. कुल मिलाकर ऐसे मामलों में कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि कथित बयान का संदर्भ क्या था, उसका उद्देश्य क्या था, उससे सार्वजनिक व्यवस्था या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा और संबंधित कानून की सभी आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं या नहीं. अंतिम निर्णय हमेशा अदालत ही करती है. इसलिए, अश्लीलता और गाली से संंबंधित सवाल का जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में नहीं दिया जा सकता. क्योंकि हिंदुस्तानीय कानून हर अपमानजनक शब्द को अपराध नहीं मानता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह टिप्पणी किस परिस्थिति में की गई, उसका उद्देश्य क्या था और उससे क्या परिणाम निकल सकते थे. The post क्या हिंदुस्तान में गाली देने पर हो सकती है जेल? नोएडा में दर्ज केस के बहाने समझिए पूरा कानून appeared first on Naya Vichar.

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स्पेन की सीमा पर माइग्रेंट सुनामी! 18 मौत के बाद सेना तैनात, यूरोप में मचा हड़कंप

यूरोप और अफ्रीका की सीमा पर स्थित स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) में बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहुंचने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं.टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सीमा पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रवासियों के बीच हुई झड़प कम से कम 18 प्रवासियों की मौत हो गई. कई लोग समुद्र के रास्ते तैरकर और कई ऊंची बाड़ पार कर स्पेन पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. इस दौरान अफरा-तफरी मच गई और राहत एजेंसियों पर भी भारी दबाव पड़ गया. स्पेन के अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में हजारों प्रवासी मोरक्को से सीमा पार कर पहुंचे. कई प्रवासी समुद्र तैरकर और बॉर्डर फेंस पार कर स्पेन में दाखिल हुए. हालात बिगड़ने पर स्पेन प्रशासन ने सेना और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया. सीमा पार करने के दौरान कई लोगों की मौत की भी समाचार सामने आई है. मेलिला बॉर्डर पर भी प्रवासियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया. सेउटा के मेयर ने हालात को गंभीर बताते हुए आपातकाल जैसे कदम उठाने की मांग की. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने का फैसला किया है. स्पेन का कहना है कि मानव तस्कर नए कानूनी नियमों का फायदा उठाकर प्रवासियों को सीमा पार करा रहे हैं. मोरक्को और स्पेन के बीच स्यूटा और मेलिला को लेकर पहले से ही नेतृत्वक और कूटनीतिक विवाद चलता रहा है. इस घटनाक्रम ने यूरोप में अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. सेना संभालेगी सुरक्षा की कमान हालात पर काबू पाने के लिए स्पेन ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को सेउटा भेजा है. प्रशासन का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के संसाधन जवाब देने की स्थिति में नहीं थे. वहीं, स्पेन और मोरक्को दोनों देशों के अधिकारी सीमा पर नियंत्रण और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. सेउटा संकट केवल स्पेन की नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की सेउटा संकट केवल स्पेन की समस्या नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के लिए चुनौती बन सकता है. साल 2021 के बाद यह सेउटा में सबसे गंभीर प्रवासी संकटों में से एक माना जा रहा है, जिस पर यूरोपीय देशों की नजर बनी हुई है. यह भी पढ़ें- पाकिस्तान : बलूचिस्तान के कोयला खदान में विस्फोट, 32 की मौत; 5-5 लाख मुआवजे की घोषणा The post स्पेन की सीमा पर माइग्रेंट सुनामी! 18 मौत के बाद सेना तैनात, यूरोप में मचा हड़कंप appeared first on Naya Vichar.

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आधुनिक रेल अवसंरचना विकास के लिए समस्तीपुर मंडल प्रयासरत, 04 अगस्त 2026 को ककरघट्टी यार्ड में होगी फुट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग

फुट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग कार्य से बढ़ेगी सुरक्षा और परिचालन क्षमता नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर–   पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं विश्वस्तरीय रेल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा रेलवे अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 04 अगस्त 2026 को ककरघट्टी यार्ड में फुट ओवरब्रिज गर्डर लॉन्चिंग की जाएगी।जिसके लिए 11:20 बजे से 15:15 बजे तक (03 घंटे 55 मिनट) ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक लिया जाएगा। रेल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ये ब्लॉक यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिए जा रहे हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने के बाद प्लेटफॉर्मों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम होगा, भीड़भाड़ में कमी आएगी, परिचालन क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों के समयपालन में सुधार होगा तथा भविष्य में अधिक ट्रेनों के संचालन का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह कार्य समस्तीपुर मंडल के रेल नेटवर्क को और अधिक आधुनिक एवं सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 04 अगस्त 2026 को ककरघट्टी यार्ड में होगी फूट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग दिनांक 04 अगस्त 2026 (मंगलवार) को ककरघट्टी यार्ड की लाइन संख्या 01, 02, 03 एवं 04 पर फुट ओवर ब्रिज गर्डर लॉन्चिंग के लिए 11:20 बजे से 15:15 बजे तक (03 घंटे 55 मिनट) ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक लिया जाएगा। यह ब्लॉक ट्रेन संख्या 13212 के गुजरने के बाद प्रभावी होगा। इस दौरान निम्नलिखित ट्रेनों के परिचालन में अस्थायी परिवर्तन रहेगा— पुनर्निर्धारित (Rescheduled) ट्रेनें 13225 जयनगर–आरा एक्सप्रेस : जयनगर से 120 मिनट विलंब से प्रस्थान करेगी। 13226 आरा–जयनगर एक्सप्रेस : आरा से 120 मिनट विलंब से प्रस्थान करेगी। 63377 लहेरियासराय– सहरसा मेमू पैसेंजर : लहेरियासराय से 90 मिनट विलंब से प्रस्थान करेगी। नियंत्रित (Regulated) ट्रेनें 15553 भागलपुर–जयनगर एक्सप्रेस : समस्तीपुर जंक्शन–दरभंगा जंक्शन के मध्य 45 मिनट नियंत्रित कर चलाई जाएगी। 11062 जयनगर–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस : जयनगर–तारसराय रेलखंड के मध्य 50 मिनट नियंत्रित कर चलाई जाएगी। यात्रियों को होंगे ये महत्वपूर्ण लाभ इन विकास कार्यों के पूर्ण होने के बाद— * रेलवे संरक्षा मानकों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। * रेल परिचालन अधिक सुचारु एवं समयबद्ध होगा। * भविष्य में अधिक ट्रेनों के सुरक्षित संचालन एवं बेहतर परिचालन क्षमता विकसित होगी। * आधुनिक रेल अवसंरचना के माध्यम से यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा। समस्तीपुर मंडल रेल प्रशासन यात्रियों से अनुरोध करता है कि उपर्युक्त अवधि में यात्रा करने से पूर्व अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति रेलवे के अधिकृत माध्यमों तथा 139 से अवश्य प्राप्त कर लें। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं भविष्य में और अधिक बेहतर रेल सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिए जा रहे इन अस्थायी परिचालन परिवर्तनों में सहयोग प्रदान करें।

समस्तीपुर

समाज का दर्पण है प्रेमचंद का साहित्य : अनंत,  प्रेमचंद जयंती पर साहित्यिक विचार गोष्ठी आयोजित

नया विचार न्यूज़ सरायरंजन : प्रखंड के आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय सरायरंजन शुक्रवार को महान साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।मुख्य अतिथि अनंत कुमार राय ने कहा, “प्रेमचंद का साहित्य समाज का दर्पण है। उनकी रचनाएँ आज भी हमें सत्य, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाती हैं। नई पीढ़ी को उनके विचारों से अवश्य जुड़ना चाहिए।”अध्यक्षीय संबोधन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक रवींद्र कुमार ठाकुरने कहा, “प्रेमचंद ने अपनी लेखनी से शोषित और वंचित वर्ग को आवाज़ दी। उनका साहित्य केवल कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।”विशिष्ट अतिथि प्रो. अवधेश कुमार झा ने अपने विचार रखते हुए कहा, “प्रेमचंद ने हिंदुस्तानीय संस्कृति, नैतिकता और संवेदनशीलता को साहित्य में जीवंत रूप दिया। उनका जीवन और कृतित्व हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हमें उनके मूल्यों को अपने आचरण में उतारना चाहिए।”अति विशिष्ट अतिथि पद से बोलते हुए साहित्यकार कुमोद प्रसाद गिरि ने कहा, “ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। प्रेमचंद का साहित्य समाज में समानता, करुणा और मानवीय चेतना का संदेश देता है। हमें उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।”कार्यक्रम के अंत में प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। मौके पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार साहू रामचंद्र साहू रामदयाल राय रवींद्रनाथ झा,रंजीत कुमार, मदन कुमार भगत, राकेश कुमार, शरत कुमार, सोनाली कुमारी सिन्हा सहित सभी शिक्षक –शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व MCD पार्षद ताहिर हुसैन समेत सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषियों को हिंदुस्तानीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए यह सजा दी. कोर्ट ने दोषियों को दंगा करने, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, अपहरण और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के लिए भी अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई. इसके अलावा अदालत ने ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में हुई अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में आया है. अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव एक नाले से बरामद किया गया था.मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था. 13 जुलाई को दोषी ठहराए गए थे ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपी अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी करार दिया था. इसके बाद 27 जुलाई को अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. अभियोजन पक्ष ने मांगी थी फांसी की सजा सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी. विशेष लोक अभियोजक (SPP) मधुकर पांडे ने दलील दी थी कि यह बेहद गंभीर और निर्मम अपराध है, जिसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखा जा सकता है. अभियोजन ने कहा था कि हत्या जानबूझकर की गई थी और इसमें धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया. दलील दी गई कि अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान थे, जिनमें से कई चोटें जानलेवा थीं. अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा था कि इस हत्या को केवल एक अलग घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी. अभियोजन ने दोषियों के व्यवहार को देखते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी. बचाव पक्ष ने की सजा में नरमी की अपील वहीं, ताहिर हुसैन के वकील राजीव मोहन ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती और सजा तय करते समय अपराध से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस मामले में 11 आरोपियों में से छह को अदालत ने बरी कर दिया है. वकील ने कहा कि ताहिर हुसैन को सामान्य इरादे और अन्य अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. Also Read:निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है मामला The post अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 5 लाख का जुर्माना appeared first on Naya Vichar.

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युद्ध का सबसे खामोश हथियार: क्या Russia यौन हिंसा को बना रहा है युद्ध की रणनीति?

कल्पना कीजिए. कोई सैनिक युद्ध में हार जाए तो… वह कैदी बन सकता है.  उससे पूछताछ हो सकती है. उसे जेल में रखा जा सकता है. लेकिन अगर युद्ध के दौरान उसके शरीर को ही प्रताड़ना का हथियार बना दिया जाए, तो यह केवल हिंसा नहीं रह जाती, बल्कि इंसान की गरिमा पर हमला बन जाती है. Russia-Ukraine War को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं. इस दौरान मिसाइल, ड्रोन, टैंक और बमों की चर्चा सबसे ज्यादा हुई. लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं की हालिया रिपोर्ट एक ऐसे पहलू की ओर इशारा करती है, जिसकी चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, रूसी हिरासत केंद्रों में कई यूक्रेनी युद्धबंदियों और नागरिकों के साथ यौन हिंसा और यौन यातना (Sexual Torture) के गंभीर आरोप सामने आए हैं. रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और उन्हें नेतृत्वक रूप से प्रेरित बताता है. युद्ध में गोलियां शरीर को घायल करती हैं, लेकिन यौन हिंसा का उद्देश्य अक्सर शरीर से ज्यादा मन को तोड़ना होता है. युद्ध का नया चेहरा या पुरानी रणनीति? युद्ध के दौरान स्त्रीओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. बोस्निया, रवांडा, कांगो और इराक जैसे कई संघर्षों में यह देखा गया है कि स्त्रीओं के साथ बलात्कार को समुदाय को डराने और अपमानित करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया. लेकिन यूक्रेन युद्ध में सामने आ रही तस्वीर एक अलग सवाल खड़ा करती है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जिन 310 मामलों की जांच चल रही है, उनमें 280 पीड़ित पुरुष, 26 स्त्रीएं और 4 लड़कियां हैं. यानी इस बार सबसे अधिक निशाने पर पुरुष युद्धबंदी बताए जा रहे हैं. यह आंकड़ा बताता है कि आधुनिक युद्ध में यौन हिंसा केवल स्त्रीओं तक सीमित नहीं रह गई है. इसका इस्तेमाल किसी भी बंदी को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया जा सकता है. रिपोर्ट में क्या कहा गया है? अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कई पूर्व यूक्रेनी युद्धबंदियों, यूक्रेनी अभियोजकों और संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं से बातचीत के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के अनुसार, कई पूर्व कैदियों ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ यौन यातना की गई. इन आरोपों में शामिल हैं- बलात्कार या बलात्कार का प्रयास निजी अंगों पर हमला और गंभीर चोट पहुंचाना बिजली का झटका देना निर्वस्त्र कर घंटों खड़ा रखना यौन अपमान के जरिए मानसिक प्रताड़ना कुछ पूर्व कैदियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें धमकी दी गई कि वे भविष्य में संतान पैदा नहीं कर सकेंगे. इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से हर मामले में पुष्टि करना संभव नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने भी कई मामलों की जांच जारी होने की बात कही है. आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? युद्ध में किसी सैनिक को मार देना आसान है. लेकिन कई बार उद्देश्य केवल दुश्मन को हराना नहीं होता. उसे मानसिक रूप से इस तरह तोड़ देना होता है कि वह अपने समाज में लौटने के बाद भी सामान्य जीवन न जी सके. यौन यातना का सबसे बड़ा उद्देश्य यही माना जाता है. यह पीड़ित को केवल शारीरिक दर्द नहीं देती, बल्कि शर्म, भय, अपराधबोध और सामाजिक अलगाव की भावना भी पैदा करती है. युद्ध के बाद भी यह घाव वर्षों तक बना रहता है. युद्ध खत्म हो सकता है, लेकिन यातना की याद अक्सर युद्ध से भी लंबी चलती है. नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Qatar : जब रेगिस्तान से निकला पेट्रोल और गैस से भी बड़ा खजाना… कहानी Qatar, Al-Jazeera और Sheikh Hamad की नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Pacific : चीन के खिलाफ, हिंदुस्तान के लिए क्यों हैं Australia और New Zealand खास नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप नहीं, चीन के लिए जाल ‌बिछा रहे हैं नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : क्या कर रहे हो पाकिस्तान : पहले बसंत मनाए, फिर ‘बाबरी मस्जिद चौक’ का नाम ‘जैन मंदिर चौक’ कर दिए… नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : अमेरिका-ईरान में फिर बमबारी… दूसरा ‘रूस-यूक्रेन’ बनाने पर आमादा क्यों है अमेरिका? पुरुष पीड़ितों पर कम चर्चा क्यों होती है? जब भी युद्ध में यौन हिंसा की बात होती है, तो सबसे पहले स्त्रीओं की तस्वीर सामने आती है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों के साथ होने वाली यौन हिंसा पर अक्सर बहुत कम चर्चा होती है. इसके पीछे कई कारण हैं. पहला, सामाजिक शर्म. दूसरा, पुरुषों द्वारा शिकायत दर्ज कराने में झिझक. तीसरा, यह धारणा कि पुरुष ऐसे अपराधों के शिकार नहीं हो सकते. इसी वजह से कई मामले कभी सामने ही नहीं आते. यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र क्या कहता है? संयुक्त राष्ट्र की जांच टीमों ने कई पूर्व युद्धबंदियों और नागरिकों से बातचीत की है. उनके अनुसार, जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें अधिकांश पीड़ितों ने हिरासत के दौरान यौन हिंसा का आरोप लगाया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई मामलों में पीड़ितों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं. हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है. इसलिए सभी मामलों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है. रूस का पक्ष भी समझना जरूरी इन सभी आरोपों पर रूस ने लगातार इनकार किया है. मॉस्को का कहना है कि ये आरोप नेतृत्वक रूप से प्रेरित हैं और इनके पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं. रूस ने यह भी कहा है कि उसके खिलाफ लगाए गए कई आरोप युद्ध प्रचार (Propaganda) का हिस्सा हैं. दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र ने कई बार कहा है कि उसे रूसी नियंत्रण वाले कुछ इलाकों तक जांच के लिए पूरी पहुंच नहीं मिली. यही वजह है कि स्वतंत्र जांच कई मामलों में चुनौती बनी हुई है. किसी भी युद्ध में एक पक्ष के आरोप और दूसरे पक्ष के इनकार के बीच सच्चाई तक पहुंचना आसान नहीं होता. इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. असली संख्या शायद कहीं ज्यादा हो यूक्रेनी अभियोजकों का कहना है कि उनके पास सैकड़ों मामलों की जांच चल रही है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. कारण साफ है.

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The Traitors Season 2: ट्रेटर बन धोखे और माइंड गेम का खेल खेलेंगे ये 21 कंटेस्टेंट, कंफर्म लिस्ट आउट

The Traitors Season 2 Contestants: प्राइम वीडियो का पॉपुलर रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स’ अब अपने दूसरे सीजन के साथ वापसी करने जा रहा है. पहले सीजन को दर्शकों का शानदार प्यार मिला था. अब मेकर्स ने ‘द ट्रेटर्स सीजन 2’ के 21 कंफर्म कंटेस्टेंट्स के नाम भी बता दिए हैं. एक बार फिर इस शो को करण जौहर होस्ट करेंगे. इस बार भी शो में भरोसा, चालाकी, झूठ और बड़े-बड़े ट्विस्ट देखने को मिलेंगे. The Traitors Season 2 Contestant List: कौन-कौन होगा शो का हिस्सा? इस बार शो में फिल्म, टीवी, सोशल मीडिया, म्यूजिक, स्पोर्ट्स और फूड इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े चेहरे नजर आएंगे. कंटेस्टेंट्स की पूरी लिस्ट इस तरह है: रिया चक्रवर्ती क्रिस्टल डिसूजा रणवीर बरार मल्लिका शेरावत शाहनील गिल अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान) मुनव्वर फारूकी रिदा थराना तान्या पुरी शालिनी पासी साउंडस मौफाकिर हरमन सिंघा अंश चोपड़ा कुल्लू करण सिंह मैजिक इक्का पारुल गुलाटी श्वेता तिवारी प्रिश साहिल सलाथिया दलीप ताहिल The Traitors Season 2 Game: आखिर शो में होता क्या है? ‘द ट्रेटर्स’ एक ऐसा रियलिटी शो है, जिसमें 20 से ज्यादा कंटेस्टेंट एक साथ स्पोर्ट्स शुरू करते हैं. इनमें से कुछ लोगों को चुपके से ‘ट्रेटर’ यानी गद्दार चुना जाता है. इन ट्रेटर्स का काम होता है कि वे बिना अपनी पहचान बताए बाकी खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स से बाहर करें. वहीं, बाकी कंटेस्टेंट्स को मिलकर यह पता लगाना होता है कि ट्रेटर कौन है. अगर वे सही समय पर ट्रेटर को नहीं पकड़ पाए, तो वे गेम हार सकते हैं. यही वजह है कि इस शो में हर एपिसोड के साथ सस्पेंस और धोखा बढ़ता जाता है. The Traitors Season 2 Release Date: कब और कहां देखें? ‘द ट्रेटर्स सीजन 2’ का प्रीमियर 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर होगा. नए एपिसोड हर गुरुवार रात 12 बजे स्ट्रीम किए जाएंगे. The Traitors Season 1 Winners: पहले सीजन का विनर कौन था? ‘द ट्रेटर्स’ के पहले सीजन ने अपने सस्पेंस और गेम प्लान की वजह से काफी सुर्खियां बटोरी थीं. शो की विनर उर्फी जावेद और निकिता लूथर बनी थीं. दोनों ने मिलकर आखिरी ट्रेटर हर्ष गुजराल को पहचान लिया था और 70.5 लाख रुपये की प्राइज मनी अपने नाम की थी. यह भी पढ़ें– इंटेंस आंखें, स्टनिंग चेहरा… कियारा आडवाणी के बर्थडे पर मेकर्स ने शेयर किया ‘Toxic’ का नया पोस्टर The post The Traitors Season 2: ट्रेटर बन धोखे और माइंड गेम का स्पोर्ट्स स्पोर्ट्सेंगे ये 21 कंटेस्टेंट, कंफर्म लिस्ट आउट appeared first on Naya Vichar.

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125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर

ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Greaves Electric Mobility) ने हिंदुस्तान में नया Ampere Magnus Neo इलेक्ट्रिक स्कूटर कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 90,999 रुपये है. कंपनी ने इस स्कूटर को रोजमर्रा के इस्तेमाल को ज्यादा आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए कई छोटे-छोटे लेकिन काम के अपडेट दिए हैं. अगर आप इस बाइक को खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले इसके बारे में पूरी जानकारी जान लेना जरूरी है. नीचे हमने इसकी बैटरी, रेंज, चार्ज होने में कितना समय लगता है जैसी चीजों के बारे में बताया है. आइए देखते हैं. Ampere Magnus Neo के फीचर्स Ampere Magnus Neo में 3.5 इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है. इसमें आप राइडिंग से जुड़ी जरूरी डिटेल्स एक ही नजर में देख सकते हैं. स्कूटर में LED हेडलाइट, LED टेललाइट और LED टर्न इंडिकेटर्स के साथ पूरी तरह LED लाइटिंग सेटअप मिलता है. इसके अलावा, फोन चार्ज करने के लिए USB चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है. वहीं, सीट के नीचे 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस मिलता है. बैटरी, रेंज और चार्जिंग इस स्कूटर में 2.3 kWh की LFP बैटरी दी गई है. कंपनी का दावा है कि यह इलेक्ट्रिक स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 125 km तक की IDC रेंज दे सकता है. हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल में Eco मोड पर इससे करीब 85 से 90 km की रेंज मिलने की उम्मीद है. इसकी टॉप स्पीड 65 km/h है. वहीं, इसकी बैटरी 0 से 80% तक चार्ज होने में करीब 5 घंटे का समय लेती है. कंपनी इस बाइक के साथ 5 साल या 75,000 किलोमीटर (जो पहले पूरा हो) तक की वारंटी भी दे रही है. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान में लॉन्च से पहले जानिए Honda ADV 160 की 5 खूबियां, क्यों है यह स्कूटर सबसे अलग? सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम मैकेनिकल सेटअप की बात करें तो Ampere Magnus Neo में ड्यूल-फ्रेम चेसिस दिया गया है. बेहतर राइडिंग के लिए इसके फ्रंट में टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे मोनोशॉक सस्पेंशन मिलता है. वहीं, ब्रेकिंग की जिम्मेदारी आगे और पीछे दोनों पहियों पर दिए गए ड्रम ब्रेक संभालते हैं. कम सीट हाइट और हल्के वजन का फायदा कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 10-इंच का रियर व्हील दिया है. इसकी वजह से सीट की ऊंचाई घटकर 777 mm रह गई है, जो पहले के मॉडल के मुकाबले 25 mm कम है. इतना ही नहीं, स्कूटर का वजन भी 5 किलो कम होकर सिर्फ 104 kg रह गया है. कम वजन और नई डिजाइन की बदौलत अब यह स्कूटर ट्रैफिक में निकालना और तंग गलियों या कम जगह पर मोड़ना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. ये भी पढ़ें: 10 से 14 साल के बच्चों के लिए लॉन्च हुई TVS Apache RR 200 Mini, दौड़ती है 110 km/h की स्पीड से The post 125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर appeared first on Naya Vichar.

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