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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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युद्ध का सबसे खामोश हथियार: क्या Russia यौन हिंसा को बना रहा है युद्ध की रणनीति?

कल्पना कीजिए. कोई सैनिक युद्ध में हार जाए तो… वह कैदी बन सकता है.  उससे पूछताछ हो सकती है. उसे जेल में रखा जा सकता है. लेकिन अगर युद्ध के दौरान उसके शरीर को ही प्रताड़ना का हथियार बना दिया जाए, तो यह केवल हिंसा नहीं रह जाती, बल्कि इंसान की गरिमा पर हमला बन जाती है. Russia-Ukraine War को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं. इस दौरान मिसाइल, ड्रोन, टैंक और बमों की चर्चा सबसे ज्यादा हुई. लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं की हालिया रिपोर्ट एक ऐसे पहलू की ओर इशारा करती है, जिसकी चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, रूसी हिरासत केंद्रों में कई यूक्रेनी युद्धबंदियों और नागरिकों के साथ यौन हिंसा और यौन यातना (Sexual Torture) के गंभीर आरोप सामने आए हैं. रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और उन्हें नेतृत्वक रूप से प्रेरित बताता है. युद्ध में गोलियां शरीर को घायल करती हैं, लेकिन यौन हिंसा का उद्देश्य अक्सर शरीर से ज्यादा मन को तोड़ना होता है. युद्ध का नया चेहरा या पुरानी रणनीति? युद्ध के दौरान स्त्रीओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. बोस्निया, रवांडा, कांगो और इराक जैसे कई संघर्षों में यह देखा गया है कि स्त्रीओं के साथ बलात्कार को समुदाय को डराने और अपमानित करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया. लेकिन यूक्रेन युद्ध में सामने आ रही तस्वीर एक अलग सवाल खड़ा करती है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जिन 310 मामलों की जांच चल रही है, उनमें 280 पीड़ित पुरुष, 26 स्त्रीएं और 4 लड़कियां हैं. यानी इस बार सबसे अधिक निशाने पर पुरुष युद्धबंदी बताए जा रहे हैं. यह आंकड़ा बताता है कि आधुनिक युद्ध में यौन हिंसा केवल स्त्रीओं तक सीमित नहीं रह गई है. इसका इस्तेमाल किसी भी बंदी को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया जा सकता है. रिपोर्ट में क्या कहा गया है? अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कई पूर्व यूक्रेनी युद्धबंदियों, यूक्रेनी अभियोजकों और संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं से बातचीत के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के अनुसार, कई पूर्व कैदियों ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ यौन यातना की गई. इन आरोपों में शामिल हैं- बलात्कार या बलात्कार का प्रयास निजी अंगों पर हमला और गंभीर चोट पहुंचाना बिजली का झटका देना निर्वस्त्र कर घंटों खड़ा रखना यौन अपमान के जरिए मानसिक प्रताड़ना कुछ पूर्व कैदियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें धमकी दी गई कि वे भविष्य में संतान पैदा नहीं कर सकेंगे. इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से हर मामले में पुष्टि करना संभव नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने भी कई मामलों की जांच जारी होने की बात कही है. आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? युद्ध में किसी सैनिक को मार देना आसान है. लेकिन कई बार उद्देश्य केवल दुश्मन को हराना नहीं होता. उसे मानसिक रूप से इस तरह तोड़ देना होता है कि वह अपने समाज में लौटने के बाद भी सामान्य जीवन न जी सके. यौन यातना का सबसे बड़ा उद्देश्य यही माना जाता है. यह पीड़ित को केवल शारीरिक दर्द नहीं देती, बल्कि शर्म, भय, अपराधबोध और सामाजिक अलगाव की भावना भी पैदा करती है. युद्ध के बाद भी यह घाव वर्षों तक बना रहता है. युद्ध खत्म हो सकता है, लेकिन यातना की याद अक्सर युद्ध से भी लंबी चलती है. नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Qatar : जब रेगिस्तान से निकला पेट्रोल और गैस से भी बड़ा खजाना… कहानी Qatar, Al-Jazeera और Sheikh Hamad की नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Pacific : चीन के खिलाफ, हिंदुस्तान के लिए क्यों हैं Australia और New Zealand खास नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप नहीं, चीन के लिए जाल ‌बिछा रहे हैं नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : क्या कर रहे हो पाकिस्तान : पहले बसंत मनाए, फिर ‘बाबरी मस्जिद चौक’ का नाम ‘जैन मंदिर चौक’ कर दिए… नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : अमेरिका-ईरान में फिर बमबारी… दूसरा ‘रूस-यूक्रेन’ बनाने पर आमादा क्यों है अमेरिका? पुरुष पीड़ितों पर कम चर्चा क्यों होती है? जब भी युद्ध में यौन हिंसा की बात होती है, तो सबसे पहले स्त्रीओं की तस्वीर सामने आती है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों के साथ होने वाली यौन हिंसा पर अक्सर बहुत कम चर्चा होती है. इसके पीछे कई कारण हैं. पहला, सामाजिक शर्म. दूसरा, पुरुषों द्वारा शिकायत दर्ज कराने में झिझक. तीसरा, यह धारणा कि पुरुष ऐसे अपराधों के शिकार नहीं हो सकते. इसी वजह से कई मामले कभी सामने ही नहीं आते. यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र क्या कहता है? संयुक्त राष्ट्र की जांच टीमों ने कई पूर्व युद्धबंदियों और नागरिकों से बातचीत की है. उनके अनुसार, जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें अधिकांश पीड़ितों ने हिरासत के दौरान यौन हिंसा का आरोप लगाया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई मामलों में पीड़ितों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं. हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है. इसलिए सभी मामलों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है. रूस का पक्ष भी समझना जरूरी इन सभी आरोपों पर रूस ने लगातार इनकार किया है. मॉस्को का कहना है कि ये आरोप नेतृत्वक रूप से प्रेरित हैं और इनके पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं. रूस ने यह भी कहा है कि उसके खिलाफ लगाए गए कई आरोप युद्ध प्रचार (Propaganda) का हिस्सा हैं. दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र ने कई बार कहा है कि उसे रूसी नियंत्रण वाले कुछ इलाकों तक जांच के लिए पूरी पहुंच नहीं मिली. यही वजह है कि स्वतंत्र जांच कई मामलों में चुनौती बनी हुई है. किसी भी युद्ध में एक पक्ष के आरोप और दूसरे पक्ष के इनकार के बीच सच्चाई तक पहुंचना आसान नहीं होता. इसलिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. असली संख्या शायद कहीं ज्यादा हो यूक्रेनी अभियोजकों का कहना है कि उनके पास सैकड़ों मामलों की जांच चल रही है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. कारण साफ है.

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The Traitors Season 2: ट्रेटर बन धोखे और माइंड गेम का खेल खेलेंगे ये 21 कंटेस्टेंट, कंफर्म लिस्ट आउट

The Traitors Season 2 Contestants: प्राइम वीडियो का पॉपुलर रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स’ अब अपने दूसरे सीजन के साथ वापसी करने जा रहा है. पहले सीजन को दर्शकों का शानदार प्यार मिला था. अब मेकर्स ने ‘द ट्रेटर्स सीजन 2’ के 21 कंफर्म कंटेस्टेंट्स के नाम भी बता दिए हैं. एक बार फिर इस शो को करण जौहर होस्ट करेंगे. इस बार भी शो में भरोसा, चालाकी, झूठ और बड़े-बड़े ट्विस्ट देखने को मिलेंगे. The Traitors Season 2 Contestant List: कौन-कौन होगा शो का हिस्सा? इस बार शो में फिल्म, टीवी, सोशल मीडिया, म्यूजिक, स्पोर्ट्स और फूड इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े चेहरे नजर आएंगे. कंटेस्टेंट्स की पूरी लिस्ट इस तरह है: रिया चक्रवर्ती क्रिस्टल डिसूजा रणवीर बरार मल्लिका शेरावत शाहनील गिल अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान) मुनव्वर फारूकी रिदा थराना तान्या पुरी शालिनी पासी साउंडस मौफाकिर हरमन सिंघा अंश चोपड़ा कुल्लू करण सिंह मैजिक इक्का पारुल गुलाटी श्वेता तिवारी प्रिश साहिल सलाथिया दलीप ताहिल The Traitors Season 2 Game: आखिर शो में होता क्या है? ‘द ट्रेटर्स’ एक ऐसा रियलिटी शो है, जिसमें 20 से ज्यादा कंटेस्टेंट एक साथ स्पोर्ट्स शुरू करते हैं. इनमें से कुछ लोगों को चुपके से ‘ट्रेटर’ यानी गद्दार चुना जाता है. इन ट्रेटर्स का काम होता है कि वे बिना अपनी पहचान बताए बाकी खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स से बाहर करें. वहीं, बाकी कंटेस्टेंट्स को मिलकर यह पता लगाना होता है कि ट्रेटर कौन है. अगर वे सही समय पर ट्रेटर को नहीं पकड़ पाए, तो वे गेम हार सकते हैं. यही वजह है कि इस शो में हर एपिसोड के साथ सस्पेंस और धोखा बढ़ता जाता है. The Traitors Season 2 Release Date: कब और कहां देखें? ‘द ट्रेटर्स सीजन 2’ का प्रीमियर 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर होगा. नए एपिसोड हर गुरुवार रात 12 बजे स्ट्रीम किए जाएंगे. The Traitors Season 1 Winners: पहले सीजन का विनर कौन था? ‘द ट्रेटर्स’ के पहले सीजन ने अपने सस्पेंस और गेम प्लान की वजह से काफी सुर्खियां बटोरी थीं. शो की विनर उर्फी जावेद और निकिता लूथर बनी थीं. दोनों ने मिलकर आखिरी ट्रेटर हर्ष गुजराल को पहचान लिया था और 70.5 लाख रुपये की प्राइज मनी अपने नाम की थी. यह भी पढ़ें– इंटेंस आंखें, स्टनिंग चेहरा… कियारा आडवाणी के बर्थडे पर मेकर्स ने शेयर किया ‘Toxic’ का नया पोस्टर The post The Traitors Season 2: ट्रेटर बन धोखे और माइंड गेम का स्पोर्ट्स स्पोर्ट्सेंगे ये 21 कंटेस्टेंट, कंफर्म लिस्ट आउट appeared first on Naya Vichar.

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125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर

ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Greaves Electric Mobility) ने हिंदुस्तान में नया Ampere Magnus Neo इलेक्ट्रिक स्कूटर कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 90,999 रुपये है. कंपनी ने इस स्कूटर को रोजमर्रा के इस्तेमाल को ज्यादा आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए कई छोटे-छोटे लेकिन काम के अपडेट दिए हैं. अगर आप इस बाइक को खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले इसके बारे में पूरी जानकारी जान लेना जरूरी है. नीचे हमने इसकी बैटरी, रेंज, चार्ज होने में कितना समय लगता है जैसी चीजों के बारे में बताया है. आइए देखते हैं. Ampere Magnus Neo के फीचर्स Ampere Magnus Neo में 3.5 इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है. इसमें आप राइडिंग से जुड़ी जरूरी डिटेल्स एक ही नजर में देख सकते हैं. स्कूटर में LED हेडलाइट, LED टेललाइट और LED टर्न इंडिकेटर्स के साथ पूरी तरह LED लाइटिंग सेटअप मिलता है. इसके अलावा, फोन चार्ज करने के लिए USB चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है. वहीं, सीट के नीचे 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस मिलता है. बैटरी, रेंज और चार्जिंग इस स्कूटर में 2.3 kWh की LFP बैटरी दी गई है. कंपनी का दावा है कि यह इलेक्ट्रिक स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 125 km तक की IDC रेंज दे सकता है. हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल में Eco मोड पर इससे करीब 85 से 90 km की रेंज मिलने की उम्मीद है. इसकी टॉप स्पीड 65 km/h है. वहीं, इसकी बैटरी 0 से 80% तक चार्ज होने में करीब 5 घंटे का समय लेती है. कंपनी इस बाइक के साथ 5 साल या 75,000 किलोमीटर (जो पहले पूरा हो) तक की वारंटी भी दे रही है. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान में लॉन्च से पहले जानिए Honda ADV 160 की 5 खूबियां, क्यों है यह स्कूटर सबसे अलग? सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम मैकेनिकल सेटअप की बात करें तो Ampere Magnus Neo में ड्यूल-फ्रेम चेसिस दिया गया है. बेहतर राइडिंग के लिए इसके फ्रंट में टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे मोनोशॉक सस्पेंशन मिलता है. वहीं, ब्रेकिंग की जिम्मेदारी आगे और पीछे दोनों पहियों पर दिए गए ड्रम ब्रेक संभालते हैं. कम सीट हाइट और हल्के वजन का फायदा कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 10-इंच का रियर व्हील दिया है. इसकी वजह से सीट की ऊंचाई घटकर 777 mm रह गई है, जो पहले के मॉडल के मुकाबले 25 mm कम है. इतना ही नहीं, स्कूटर का वजन भी 5 किलो कम होकर सिर्फ 104 kg रह गया है. कम वजन और नई डिजाइन की बदौलत अब यह स्कूटर ट्रैफिक में निकालना और तंग गलियों या कम जगह पर मोड़ना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. ये भी पढ़ें: 10 से 14 साल के बच्चों के लिए लॉन्च हुई TVS Apache RR 200 Mini, दौड़ती है 110 km/h की स्पीड से The post 125 km की रेंज, 22 लीटर का स्टोरेज स्पेस… डेली यूज के लिए परफेक्ट है ये फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर appeared first on Naya Vichar.

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CWG 2026 Live Day 9: प्रीति पवार का दमदार पंच, जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को हराकर फाइनल में पहुंचीं

स्कॉटलैंड में CWG 2026 का नौवां दिन हिंदुस्तान के लिए रोमांचक होगा. नीरज चोपड़ा गोल्ड जीतने के दावेदार हैं, वहीं 10 हिंदुस्तानीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में उतरेंगे. वेटलिफ्टर लवप्रीत और डिस्कस थ्रोअर सीमा ने पदक जीतकर टीम का उत्साह बढ़ाया है. The post CWG 2026 Live Day 9: प्रीति पवार का दमदार पंच, जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को हराकर फाइनल में पहुंचीं appeared first on Naya Vichar.

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सावन 2026: अगस्त में कब हैं सोम और भौम प्रदोष व्रत? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. यह व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. भक्त यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. वर्ष 2026 का अगस्त महीना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान पवित्र सावन मास रहेगा. सावन में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का पुण्य और फल कई गुना अधिक माना जाता है. अगस्त 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां और शुभ मुहूर्त पहला प्रदोष व्रत: सोम प्रदोष (10 अगस्त 2026) सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 9 अगस्त 2026, रात 9:30 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 10 अगस्त 2026, शाम 6:24 बजे सोम प्रदोष व्रत महत्व: सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि तथा मनचाहा वरदान प्राप्त होता है. दूसरा प्रदोष व्रत: भौम प्रदोष (25 अगस्त 2026) सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 24 अगस्त 2026, रात 7:50 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 25 अगस्त 2026, रात 9:29 बजे भौम प्रदोष का महत्व: मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ हनुमान जी और मंगल ग्रह की आराधना का भी विशेष महत्व माना गया है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से मंगल दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. यह भी पढ़ें: श्रावणी मेला 2026: देवघर के आसमान में ड्रोन शो ने बिखेरा शिवमय नजारा, पहले दिन 74,987 श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण The post सावन 2026: अगस्त में कब हैं सोम और भौम प्रदोष व्रत? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व appeared first on Naya Vichar.

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BMC नेताओं को क्यों झटकेदार लगी Mahindra Scorpio-N? आखिर Toyota Innova Crysta में ऐसा क्या है जो सफर को बना देता है ज्यादा आरामदायक

महिंद्रा Scorpio-N हिंदुस्तानीय बाजार की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में गिनी जाती है. दमदार रोड प्रेजेंस, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और शानदार ऑफ-रोड क्षमता इसकी सबसे बड़ी पहचान है. लेकिन हाल ही में मुंबई महानगरपालिका (BMC) में इसे लेकर एक अलग ही बहस शुरू हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने शिकायत की कि Scorpio-N की पिछली सीट पर सफर के दौरान ज्यादा झटके महसूस होते हैं, जिससे कमर दर्द की परेशानी हो रही है. इसके बाद Toyota Innova Crysta को विकल्प के तौर पर लेने का प्रस्ताव चर्चा में आ गया. सवाल यह है कि जब दोनों गाड़ियां मजबूत लैडर-फ्रेम प्लैटफॉर्म पर बनी हैं, तब आखिर आराम के मामले में इतना बड़ा फर्क क्यों महसूस होता है? इसके पीछे वाहन इंजीनियरिंग और डिजाइन से जुड़े कई अहम कारण हैं. ऊंचा डिजाइन बनाता है Scorpio-N को ज्यादा हिलने वाला वाहन Scorpio-N एक पारंपरिक एसयूवी है, जिसे खराब रास्तों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और ऑफ-रोड ड्राइविंग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसी वजह से इसका ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा है और पूरी बॉडी जमीन से काफी ऊंची रहती है. जब कोई ऊंची एसयूवी गड्ढों, स्पीड ब्रेकर या तेज मोड़ से गुजरती है, तो उसका सेंटर ऑफ ग्रैविटी भी ऊपर होने के कारण गाड़ी में साइड-टू-साइड मूवमेंट ज्यादा महसूस होता है. पीछे बैठने वाले यात्रियों को सिर और शरीर में ज्यादा झटके महसूस हो सकते हैं. यही वजह है कि लंबे सफर में कुछ लोगों को यह अनुभव कम आरामदायक लग सकता है. इसके मुकाबले Toyota Innova Crysta एक एमपीवी है, जिसकी बॉडी जमीन के ज्यादा करीब रहती है. इसका सेंटर ऑफ ग्रैविटी नीचे होने से गाड़ी कम डोलती है और पीछे बैठे यात्रियों को ज्यादा स्थिर अनुभव मिलता है. सस्पेंशन ट्यूनिंग भी दोनों गाड़ियों के अनुभव को बदल देती है किसी भी वाहन की राइड क्वालिटी केवल उसके प्लैटफॉर्म पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सस्पेंशन ट्यूनिंग भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है. Mahindra ने Scorpio-N के सस्पेंशन को इस तरह तैयार किया है कि यह खराब रास्तों और ऑफ-रोड परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करे. मजबूत सेटअप होने की वजह से छोटे गड्ढों और सड़क की हल्की अनियमितताओं का असर केबिन के अंदर थोड़ा ज्यादा महसूस हो सकता है. दूसरी ओर Toyota Innova Crysta का पूरा फोकस आरामदायक सफर पर रखा गया है. इसका सस्पेंशन शहर की सड़कों, स्पीड ब्रेकर और गड्ढों के झटकों को काफी हद तक सोख लेता है. यही कारण है कि टैक्सी ऑपरेटर, कॉर्पोरेट फ्लीट और लंबी दूरी तक पीछे बैठकर सफर करने वाले लोग अक्सर Innova Crysta को प्राथमिकता देते हैं. पीछे की सीट का डिजाइन भी आराम में निभाता है बड़ी भूमिका सिर्फ सस्पेंशन ही नहीं, सीट का डिजाइन भी सफर को आरामदायक या थकाऊ बना सकता है. Scorpio-N की दूसरी पंक्ति में सामान्य बेंच सीट मिलती है. ऊंची एसयूवी होने की वजह से बैठने की पोजिशन अलग होती है और लंबे समय तक यात्रा करने पर कुछ लोगों को कमर या पीठ पर दबाव महसूस हो सकता है. वहीं Innova Crysta अपने आरामदायक कैप्टन सीट विकल्प के लिए जानी जाती है. इनमें अलग-अलग आर्मरेस्ट, बेहतर अंडर-थाई सपोर्ट और पीछे झुकने की सुविधा मिलती है. इससे शरीर को बेहतर सहारा मिलता है और लंबे सफर में थकान कम महसूस होती है. इसके अलावा गाड़ी की ऊंचाई कम होने से अंदर बैठना और बाहर निकलना भी आसान होता है, जो बुजुर्ग यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधा देता है. क्या Scorpio-N खराब एसयूवी है? जवाब बिल्कुल नहीं BMC में उठे इस विवाद का मतलब यह नहीं है कि Scorpio-N किसी तरह से खराब वाहन है. दोनों गाड़ियों का उद्देश्य अलग-अलग है. अगर आपकी प्राथमिकता ऑफ-रोड ड्राइविंग, मजबूत रोड प्रेजेंस, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और एडवेंचर है, तो Scorpio-N बेहतरीन विकल्प मानी जाती है. लेकिन अगर आपकी रोजाना की यात्रा शहर में होती है, अक्सर पीछे बैठकर सफर करते हैं और सबसे ज्यादा महत्व आरामदायक राइड को देते हैं, तो Innova Crysta जैसी एमपीवी ज्यादा उपयुक्त साबित हो सकती है. इसलिए वाहन चुनते समय केवल कीमत या फीचर्स नहीं, बल्कि अपनी जरूरत और उपयोग का तरीका भी जरूर ध्यान में रखना चाहिए. ये भी पढ़ें: जुलाई में लॉन्च हुई ये 8 नई कारें, किसी में 526Km की रेंज तो किसी में नया टर्बो इंजन, देखें पूरी लिस्ट The post BMC नेताओं को क्यों झटकेदार लगी Mahindra Scorpio-N? आखिर Toyota Innova Crysta में ऐसा क्या है जो सफर को बना देता है ज्यादा आरामदायक appeared first on Naya Vichar.

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रांची के मधुकम 50-60 साल से रहने वालों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अतिक्रमण हटाने का आदेश लिया वापस

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रांची के रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र में 50-60 वर्षों से घर बनाकर रह रहे गैर आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले जारी अतिक्रमण हटाने के आदेश को वापस ले लिया. साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह राशि मामले से प्रभावित 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपये के रूप में दी जाएगी. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता महादेव उरांव ने न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया और शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया. कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में माना और इस पर कड़ी नाराजगी जताई. एकल पीठ के आदेश पर दायर की थी अवमानना याचिका महादेव उरांव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के उस आदेश का अनुपालन कराने की मांग की थी, जिसमें हेहल के अंचलाधिकारी को मधुकम की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसी आदेश के आधार पर प्रशासन ने खादगड़ा शिवदुर्गा मंदिर रोड के समीप मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी. सुनवाई में सामने आया करोड़ों रुपये के लेनदेन का तथ्य सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता ने संबंधित लोगों से एक करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन की जानकारी अदालत से छुपाई थी. इतना ही नहीं, जिन 12 परिवारों पर कार्रवाई का सीधा असर पड़ रहा था, उन्हें मूल रिट याचिका में प्रतिवादी भी नहीं बनाया गया था. अदालत ने माना कि यदि यह तथ्य पहले सामने होते, तो मामले की सुनवाई का स्वरूप अलग हो सकता था. प्रभावित परिवारों को राहत, बेदखली पर लगी रोक हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन 12 परिवारों को तत्काल राहत मिली है, जो पिछले कई दशकों से मधुकम क्षेत्र में रह रहे हैं. अदालत ने अतिक्रमण हटाने के पूर्व आदेश को वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और सभी पक्षों को सुनने के सिद्धांत के आधार पर ही आगे बढ़नी चाहिए. पीड़ितों ने बताया था खरीदकर बनाया था घर मामले में प्रभावित परिवारों का कहना था कि वे 50-60 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं. उनके अनुसार उन्होंने संबंधित भूमि मालिक को प्रति डिसमिल 5.25 लाख रुपये की दर से भुगतान कर जमीन खरीदी थी और उसके बाद मकान बनाकर रह रहे हैं. उनका आरोप था कि भुगतान के बावजूद उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही थी, जिसका उन्होंने विरोध किया था. इसे भी पढ़ें: रांची में सपनों के आशियाने पर चला प्रशासन का बुलडोजर, इलाके में अफरा-तफरी अदालत की सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय के सामने तथ्य छुपाना और झूठा शपथ पत्र दाखिल करना गंभीर मामला है. अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर दूसरे पक्ष के अधिकारों का हनन नहीं कर सकता. इसी कारण याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसे 12 प्रभावित परिवारों के बीच समान रूप से वितरित करने का निर्देश दिया गया. इस फैसले को मधुकम मामले में प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है. इसे भी पढ़ें: Bulldozer Action: रांची के रातू में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण ध्वस्त, झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ एक्शन The post रांची के मधुकम 50-60 साल से रहने वालों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अतिक्रमण हटाने का आदेश लिया वापस appeared first on Naya Vichar.

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भरत तिवारी केस: STF जवान की गिरफ्तारी पर माता-पिता बोले- सामने आएगा एनकाउंटर का सच, दोषियों को फांसी हो; CM सम्राट पर जताया भरोसा

Bharat Tiwari Encounter Case STF Jawan Arrested : भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी कथित पुलिस मुठभेड़ मामले में बड़ा मोड़ आ गया है. घटना के करीब डेढ़ महीने बाद बिहार एसटीएफ (STF) के जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है. STF जवान के गिरफ्तारी के बाद मृतक भरत तिवारी के माता-पिता का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने इसे न्याय की दिशा में पहली बड़ी कार्रवाई बताया है. परिजनों ने साफ कहा कि अब सच सामने आने की उम्मीद जगी है और दोषियों को सजा जरूर मिलेगी. परिजनों ने जताई खुशी, कहा अब खुलेगा राज भरत तिवारी के माता-पिता ने अक्षय कुमार की गिरफ्तारी पर संतोष जताते हुए कहा कि यह न्याय की शुरुआत है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जो भरोसा दिलाया था, वह अब सच होता दिख रहा है. परिवार का कहना है कि जिस जवान ने पहली गोली चलाई थी, उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है. अब पूछताछ में उसी के जरिए उस दिन की पूरी सच्चाई सामने आएगी. परिजनों ने उम्मीद जताई कि आगे अन्य अधिकारियों की भी गिरफ्तारी होगी और सभी दोषियों को सजा मिलेगी. मां की मांग, सभी आरोपियों को मिले कड़ी सजा भरत तिवारी की मां ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनके बेटे की हत्या में शामिल सभी लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की. मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने मरने से पहले कुछ अधिकारियों का नाम लिया था, इसलिए उन सभी की निष्पक्ष जांच जरूरी है. क्या है पूरा मामला 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी को गोली लगी थी. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया था, जबकि परिवार लगातार इसे फर्जी एनकाउंटर करार दे रहा है. परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई. गिरफ्तारी से पहले क्या हुआ? भरत तिवारी की मौत के बाद परिवार लगातार आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था. मामले में प्राथमिकी भी दर्ज हुई औक तब तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और एसटीएफ जवान अक्षय कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए. मामले में पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी हुई. कथित एनकाउंटर पर उठे थे सवाल घटना के बाद से ही लगातार इस कथित पुलिस एनकाउंटर पर सवाल लोग उठा रहे हैं और भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं. वहीं, इस घटना के बाद प्रशासन ने रिटायर्ज जस्टिस विनोद कुमार के नेतृत्व में न्यायिक आयोग का गठन किया गया था. इसमें जांच की प्रक्रिया चल रही है और लोगों की बारी-बारी से गवाही कराई जा रही है. इस घटना में जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार को पटना सचिवालय अटैच कर दिया गया है. वहीं तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को पुलिस मुख्यालय क्लोज कर दिया गया है. वहीं इस मामले में एसटीएफ के जवान की गिरफ्तारी इस मामले में बड़ी अहम मानी जा रही. वायरल वीडियो बना अहम सबूत इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब घटना से जुड़ा एक सोशल मीडिया लाइव वीडियो सामने आया. वीडियो में भरत तिवारी को पुलिस के सामने हथियार छोड़ते और हाथ उठाकर सरेंडर करते देखा गया. परिवार का दावा है कि इसके बावजूद उस पर कई गोलियां चलाई गईं. इस वीडियो को जांच में अहम साक्ष्य माना जा रहा है. मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिजनों ने सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया था. सीएम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि स्वर्गीय भरत तिवारी जी के परिवार को न्याय मिलेगा. उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर उनकी बात सुनी और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया था. STF जवान पर पहला फायर करने का आरोप जांच के दौरान एसटीएफ जवान अक्षय कुमार पर पहली गोली चलाने का आरोप सामने आया. घटना के बाद से वह फरार चल रहा था, जिसे पुलिस और एसटीएफ की टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से गिरफ्तार किया. भोजपुर एसपी ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है. कई अधिकारियों पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार इस मामले में दर्ज एफआईआर में सिर्फ अक्षय कुमार ही नहीं, बल्कि कई पुलिस अधिकारी भी नामजद हैं. इनमें तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ और शाहपुर थानाध्यक्ष शामिल हैं. अब जवान की गिरफ्तारी के बाद यह जांच और गहरी हो गई है कि सरेंडर के बाद गोली चलाने का आदेश किसने दिया था. आगे और खुल सकते हैं राज सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार जवान से पूछताछ के बाद कई और अहम खुलासे हो सकते हैं. जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर रही हैं. इस कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में और भी लोगों पर कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, परिजनों को न्याय की उम्मीद है और पूरे प्रदेश की नजर इस मामले की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. Also Read : भरत तिवारी की मां आज से भूख हड़ताल पर बैठेंगी? रिटायर्ड जज ने जांच को लेकर दी नई जानकारी The post भरत तिवारी केस: STF जवान की गिरफ्तारी पर माता-पिता बोले- सामने आएगा एनकाउंटर का सच, दोषियों को फांसी हो; CM सम्राट पर जताया भरोसा appeared first on Naya Vichar.

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शहजाद पूनावाला ने BJP से तोड़ा नाता, X बायो अपडेट कर दी जानकारी

क्या शहजाद पूनावाला ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है? यह सवाल उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को देखकर उठ रहा है. हालांकि, अभी तक उनकी ओर से या पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बायो अपडेट किया है, जिसमें अब BJP का जिक्र कहीं नजर नहीं  आ रहा है. हालांकि, उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइफ लॉन्ग फॉलोअर्स बताया है. पूनावाला ने क्यों छोड़ी बीजेपी? पूनावाला ने गुरुवार (30 जुलाई) को अपना X बायो अपडेट किया, लेकिन इस्तीफे की वजह साफ नहीं बताई. CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पूनावाला ने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है. शहजाद पूनावाला ने 2017 में कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद बीजेपी का दामन थामा था. कांग्रेस में रहते हुए पार्टी के अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया को लेकर उनका विवाद हुआ था. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी का नेशनल स्पोकपर्सन बनाया गया. राहुल गांधी पर निशाना साधते रहे हैं शहजाद पूनावाला शहजाद पूनावाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के समर्थक नेताओं में गिने जाते रहे हैं. वह टीवी डिबेट और अन्य मंचों पर अपने आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं. सोशल मीडिया पर भी वह लगातार कांग्रेस और उसके नेताओं, खासकर राहुल गांधी पर निशाना साधते रहे हैं. पूनावाला ने सोशल मीडिया पर दिए थे संकेत पूनावाला के X अकाउंट पर हाल के कुछ पोस्ट से संकेत मिल रहे थे कि वह सक्रिय नेतृत्व से दूरी बनाने का मन बना रहे हैं. उन्होंने बिना किसी कैप्शन के अपने पुराने इंटरव्यू के कुछ वीडियो क्लिप शेयर किए थे. इन इंटरव्यू में उन्होंने नेतृत्व छोड़ने की संभावना को लेकर बात की थी. इसके बाद उनके बीजेपी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं. The post शहजाद पूनावाला ने BJP से तोड़ा नाता, X बायो अपडेट कर दी जानकारी appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान : बलूचिस्तान के कोयला खदान में विस्फोट, 32 की मौत; 5-5 लाख मुआवजे की घोषणा

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक कोयला खदान में विस्फोट होने से 32 लोगों के मारे जाने की सूचना है.पीटीआई न्यूज के अनुसार खदान में 10 लोगों के फंसे होने की सूचना है, जिसकी वजह से मृतकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है. अधिकारियों का मानना है कि फंसे हुए खनिकों की जान को खतरा है और बचावकर्मी उन तक पहुंचने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं. मीथेन गैस के कारण हुआ विस्फोट प्रशासनी खान निरीक्षक गनी बलोच ने कहा कि बृहस्पतिवार को हुआ विस्फोट संभवत: मीथेन गैस के कारण हुआ. यह घटना बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके में हुई. अधिकारियों और प्रांतीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक बयान में बताया कि विस्फोट के कुछ घंटे बाद सात लोगों के शव को निकाला गया. बाद में आपातकालीन दलों को 25 अन्य शव मिले. बयान में कहा गया कि तलाश और बचाव अभियान जारी है तथा बचाव दल फंसे हुए बाकी खनिकों का पता लगाने और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बलोच ने कहा कि बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक फंसे हुए हर खनिक का पता नहीं लग जाता. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है. बलोच ने बताया कि मीथेन गैस में विस्फोट के बाद किसी के जीवित मिलने की संभावना कम हो जाती है क्योंकि ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो जाता है. बचावकर्मी भी खदान के अंदर बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं. पांच-पांच लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने शवों को उनके परिवारों को सौंपना शुरू कर दिया है. बलूचिस्तान के खदान एवं खनिज मंत्री शोएब नोशेरवानी ने कहा कि बचाव दल बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं. नोशेरवानी ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि प्रांतीय प्रशासन विस्फोट में मारे गए प्रत्येक खनिक के परिवार को पांच-पांच लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देगी. ये भी पढ़ें :जल्द खत्म हो सकता है गाजा युद्ध: ट्रंप का दावा- हमास हथियार छोड़ेगा, धीरे-धीरे हटेगी इजरायली सेना The post पाकिस्तान : बलूचिस्तान के कोयला खदान में विस्फोट, 32 की मौत; 5-5 लाख मुआवजे की घोषणा appeared first on Naya Vichar.

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