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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी, राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल के साथ 130 कैंडिडेट का किया इंटरव्यू!

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की जोड़ी एक बार फिर पार्टी को खड़ा करने की कोशिश में हैं. इसी कोशिश में उन सेक्रेटरी को बदलना चाह रहे हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी लगातार कमजोर हुई है. रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मंगलवार को पार्टी के सेक्रेटरी के साथ बैठक करेंगे और उनके प्रदर्शन का रिव्यू करके उन्हें उन्हें फीडबैक देंगे. 130 नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं राहुल-प्रियंका इंडियन एक्सप्रेस में छपी समाचार के अनुसार अबतक राहुल और प्रियंका गांधी 130 से अधिक उम्मीदवारों का इंटरव्यू कर चुके हैं. इंटरव्यू में उनसे कई सवाल पूछे गए हैं, जिनमें से एक सवाल यह भी है कि आप पार्टी में राज्य को कैसे खड़ा करेंगे. जिन राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा है, वहां की स्थिति सुधारने के लिए पार्टी के नेता ये मशक्कत कर रहे हैं. इसके अलावा चुनावी राज्यों में भी पार्टी अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए सेक्रेटरी की भूमिका को तराशना चाह रही है. पार्टी में है कुल 54 सेक्रेटरी कांग्रेस की वेबसाइट के अनुसार कुल 54 सेक्रेटरी अभी कार्य कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार राहुल और प्रियंका इनमें से 50 प्रतिशत सेक्रेटरी को बदलने का मन बना चुके हैं. इसकी वजह यह है कि 7 सितंबर को राहुल और प्रियंका ने जो इंटरव्यू लिया था उसमें तमाम दस्तावेज और प्रदर्शन के आंकड़ों पर बात हुई है.रिपोर्ट के अनुसार जिन उम्मीदवारों का इंटरव्यू हुआ उनसे पहले एक मिनट में अपना इंट्रोडक्शन देने के लिए कहा गया. उसके बाद, राहुल जी, प्रियंका जी और वेणुगोपाल जी ने हमसे पार्टी में हमारी परफॉर्मेंस के बारे में सवाल पूछे. उन्होंने हमसे पूछा कि हमने अपने रोल में क्या किया, हमने चीजें उस तरह से क्यों कीं, हमने पार्टी में कैसे कंट्रीब्यूट किया और हमसे कहां कमी रही. इंटरव्यू के लिए आए एक अन्य नेता ने बताया कि कैंडिडेट्स से कुछ काल्पनिक स्थितियों पर भी जवाब देने के लिए कहा गया था, जिसमें यह भी शामिल था कि वे उस राज्य में पार्टी को कैसे फिर से खड़ा करेंगे जहां पार्टी ने खराब परफॉर्म किया था या जहां चुनाव होने वाले थे. ड्यूटी कैसे करेंगे, जैसे सवाल भी पूछे गए एक नेता ने बताया कि हमसे यह सवाल भी पूछा गया कि अगर हमें किसी खास राज्य का सेक्रेटरी बनाया जाता है तो हम अपनी ड्यूटी कैसे करेंगे. हमें अपने पुराने प्रदर्शनों से जुड़े सवाल भी पूछे गए. इसके अलावा संगठन सृजन अभियान के बारे में भी सवाल पूछे गए, जो कांग्रेस द्वारा पूरे देश में किया जा रहा ऑर्गेनाइजेशनल बदलाव है. ये भी पढ़ें: असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-बराबरी के लिए नहीं, देश के मुसलमानों को टारगेट करने के लिए बीजेपी कर रही UCC की बात The post कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी, राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल के साथ 130 कैंडिडेट का किया इंटरव्यू! appeared first on Naya Vichar.

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गुरुग्राम हिट एंड रन केस: आरोपी कार चालक राजस्थान से गिरफ्तार, हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

Gurugram Golf Course Accident Case : गोल्फ कोर्स रोड पर एक स्त्री बाइक सवार को तेज रफ्तार कार से टक्कर मारने के मामले में गुरुग्राम पुलिस को सफलता मिली है. पुलिस ने आरोपी कार चालक कल्याण बैंसला को घटना के दो दिन बाद मंगलवार को राजस्थान के राजगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है. क्या है पूरा मामला? घटना रविवार की है, जब दिल्ली की रहने वाली फैशन डिजाइनर शिवानी चौहान उर्फ सिया अपनी ‘अप्रिलिया आरएस 457’ स्पोर्ट्स बाइक से अन्य बाइक सवारों के साथ जा रही थीं. आरोप है कि तेज रफ्तार सियाज कार चला रहे कल्याण बैंसला ने सिया की बाइक को साइड से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह सड़क पर काफी दूर तक घिसटती चली गईं. दुर्घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ दिख रहा है कि कार चालक ने पहले पीड़िता को रुकने का इशारा किया और फिर गाड़ी उसकी ओर मोड़ दी. घटना के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया. हत्या के प्रयास का मामला दर्ज मामले में संज्ञान लेते हुए गुरुग्राम के सेक्टर-56 थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पीड़िता के बयानों और सोशल मीडिया पर सामने आए सबूतों के आधार पर पुलिस ने हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) को भी केस में जोड़ दिया है. इसके अलावा धारा 281 (लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 125 (चोट पहुंचाना) के तहत कार्रवाई की जा रही है. पीड़िता ने जानबूझकर टक्कर मारने का लगाया आरोप पीड़िता सिया चौहान ने कहा कि कार सवार लोग नशे में लग रहे थे और स्त्री बाइक सवार होने के कारण उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि टक्कर मारने के बाद चालक ने यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि वह जीवित हैं या नहीं. आरोपी कल्याण बैंसला ने दुर्घटना को हादसा करार दिया खुद को जिम संचालक बताने वाले आरोपी कल्याण बैंसला ने दुर्घटना को एक हादसा करार दिया है. बैंसला का दावा है कि U-टर्न के पास कार से उसका नियंत्रण खो गया था. उसने जानबूझकर टक्कर मारने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि वह अपनी बहन और रिश्तेदारों के साथ यात्रा कर रहा था. हादसे के बाद बाइक चालकों के समूह द्वारा हमले के डर से वह मौके से भाग निकला था. फिलहाल पुलिस आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है. ये भी पढ़ें: गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले में नया मोड़, पीड़िता बोली – यह हादसा नहीं साजिश थी, कार ने जानबूझकर मारी टक्कर The post गुरुग्राम हिट एंड रन केस: आरोपी कार चालक राजस्थान से गिरफ्तार, हत्या के प्रयास का मामला दर्ज appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी का दावा – 2000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज, कहा- अमेरिकी दबाव में झुकी सरकार

UPI Transaction Limit: केंद्र प्रशासन ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर किसी भी तरह का शुल्क न लगाने का निर्देश जारी किया है. 14 सितंबर को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, 2000 रुपये तक के डिजिटल भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई फीस नहीं ली जाएगी. हालांकि, इस कदम ने 2,000 से अधिक के मर्चेंट लेन-देन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का रास्ता साफ कर दिया है, जिस पर अब नेतृत्वक घमासान शुरू हो गया है. जनता की जेब पर पड़ेगा सीधा असर : राहुल गांधी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रशासन के इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मोदी प्रशासन ने चुपचाप UPI पर फीस वसूलने का रास्ता खोल दिया है. राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट किया और अलग-अलग आरोप लगाए. अब 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है. भले ही ये ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का सिर्फ 5% हों, लेकिन UPI ​​के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग 65% हिस्सा इन्हीं का होता है. राहुल ने अपने पोस्ट में लिखा- प्रशासन का कहना है कि ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदारों पर लगाई जाने वाली फीस आखिर कहां से आएगी? इसे कीमतों में जोड़ा जाएगा, यानी यह सीधे ग्राहक की जेब से ही जाएगी. अमेरिकी दबाव का आरोप : अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से हिंदुस्तान की जीरो-MDR नीति का विरोध कर रही थीं. राहुल गांधी ने दावा है कि प्रशासन ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए यह नीतिगत बदलाव किया है. प्रशासन का पक्ष: आत्मनिर्भर मॉडल और साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (धारा-10A) में संशोधन के बाद यह अधिसूचना जारी की गई है. संसद के मानसून सत्र (13 अगस्त, 2026) में यह संशोधन विधेयक पारित हुआ था. अब हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की समिति MDR की दरों का निर्धारण करेगी. सुरक्षा और अपग्रेड: प्रशासन का कहना है कि ट्रांजैक्शन की संख्या में भारी उछाल को देखते हुए प्रणाली को साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है. सब्सिडी पर निर्भरता खत्म: डिजिटल भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक सिर्फ प्रशासनी सब्सिडी पर चलाना व्यावहारिक नहीं है. प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और बाज़ार को मजबूत बनाने के लिए एक आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल जरूरी है. UPI का अभूतपूर्व विकास 25 अगस्त, 2016 को लॉन्च हुए UPI का कुल लेन-देन मूल्य वित्त वर्ष 2016-17 के 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. एक दशक में इसमें 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है. वर्तमान में UPI वैश्विक स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ रहा है और उज्बेकिस्तान, सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और यूनान समेत 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है. ये भी पढ़ें: फ्री में नहीं होगा UPI से पैसों का लेन देन! प्रशासन ने ऑनलाइन पेमेंट को लेकर दूर किया कंफ्यूजन, जानें नया नियम The post राहुल गांधी का दावा – 2000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज, कहा- अमेरिकी दबाव में झुकी प्रशासन appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC CGL समेत 4 भर्ती परीक्षा मामले में हाईकोर्ट का आदेश, 18 सितंबर को अगली सुनवाई

Jharkhand JPSC JSSC CGL High Court Hearing: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने से जुड़े मामले में राज्य प्रशासन को दो दिन का समय दिया है. अदालत ने फिलहाल अपने अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है. अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर (शुक्रवार) सुबह 10:30 बजे होगी. क्या हुआ कोर्ट में? मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा. प्रशासन ने अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा था ताकि वह विस्तृत जवाब दाखिल कर सके. हालांकि, हाईकोर्ट ने लंबी मोहलत देने से इनकार करते हुए केवल दो दिन का समय दिया. राज्य प्रशासन आज ही अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे. ये भी पढ़ें- पहले नई सड़क पर लाखों खर्च, फिर पाइपलाइन के लिए खोद डाली! लोहरदगा में विकास का ये कैसा स्पोर्ट्स? अंतरिम आदेश फिलहाल जारी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में पहले से पारित अंतरिम आदेश यथावत रहेगा. यानी JPSC और JSSC CGL समेत चारों भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने के फैसले पर अंतिम निर्णय अगली सुनवाई के बाद ही होगा. हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी इस मामले पर राज्यभर के हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं. JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द किए जाने के बाद उम्मीदवार लंबे समय से न्यायिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं. ये भी पढ़ें- जिस रास्ते से कुछ देर पहले गुजरे थाना प्रभारी, वहीं अचानक गिरा सूखा पेड़; ग्रामीणों ने जेसीबी से हटाया The post JPSC-JSSC CGL समेत 4 भर्ती परीक्षा मामले में हाईकोर्ट का आदेश, 18 सितंबर को अगली सुनवाई appeared first on Naya Vichar.

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नेपाल में बाढ़ के बाद हाहाकार: शिविरों में बीमार पड़ रहे बच्चे, पीने के पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

Nepal Flood: नेपाल में बीते 26 अगस्त को आई भीषण भोटेकोशी बाढ़ के बाद अब 3,600 से अधिक विस्थापितों पर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है. बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में पानी की भारी किल्लत हो गई है. साफ-सफाई की स्थिति भी ठीक नहीं है. जिस वजह से शिशु और बुजुर्ग लगातार बीमार पड़ रहे हैं. द काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, नुवाकोट के पिपलाटार स्थित चंद्रज्योति सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए अस्थाई शिविर में रह रहे कई शिशु वायरल बुखार, उल्टी, सर्दी और दस्त की चपेट में हैं. विस्थापित परिवारों का कहना है कि स्वास्थ्य कैंपों में केवल पैरासिटामोल देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है, जिससे मरीजों की हालत में सुधार नहीं हो रहा है. अस्पतालों से टूटा संपर्क बाढ़ में सड़कें और पुल बह जाने के कारण आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. त्रिशूली अस्पताल के निदेशक डॉ राजेंद्र लामा ने बताया कि मुख्य पुल बहने के कारण महज 5 मिनट की दूरी पर रहने वाले मरीज भी अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है. ये भी पढ़ें: बाढ़ के बाद नेपाल में बेकाबू हुई महंगाई: मटन 1700 रुपये प्रति किलो, एक अंडे की कीमत 25 रुपये; गैस के लिए मारामारी पानी के नमूनों में मिला हानिकारक ई-कोलाई द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, बाढ़ से क्षेत्र की 55 पेयजल परियोजनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे करीब 64 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. विदुर नगरपालिका में करीब 30 हजार लोगों को पानी सप्लाई करने वाली मुख्य पाइपलाइन बह चुकी है. नगर पालिका की जांच में पानी के 15 में से 5 नमूनों में ‘ई-कोलाई’ (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया है, जिससे हैजा और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, प्रशासन का दावा है कि स्रोतों में क्लोरीन डालकर पानी को साफ किया जा रहा है. हजारों शिशु प्रभावित, मानसिक आघात का खतरा राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद के अनुसार, शिविरों में 1,233 शिशु रह रहे हैं, जिनमें से 102 शिशु ऐसे हैं जिनके माता-पिता या रिश्तेदार लापता हैं. वहीं यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा से करीब 17,000 शिशु प्रभावित हुए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी बड़ी महामारी के संकेत नहीं हैं. हालांकि, चिकित्सकों का मानना है कि वायरल बीमारियों के साथ-साथ गंभीर बीमारियों (डायबिटीज, बीपी) के मरीजों की दवाएं छूटने और अपनों को खोने के कारण लोगों में बढ़ा मानसिक तनाव आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकता है. ये भी पढ़ें: Nepal Cyber Crime Action: बाढ़ पीड़ितों को ऑनलाइन गाली देना पड़ेगा भारी, 1 लाख तक जुर्माना और 5 साल जेल की सजा The post नेपाल में बाढ़ के बाद हाहाकार: शिविरों में बीमार पड़ रहे शिशु, पीने के पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया appeared first on Naya Vichar.

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Ganesh Chaturthi: अंबानी के घर बप्पा के दर्शन करने पहुंचे सचिन तेंदुलकर, अर्जुन की सादगी और सारा का लुक हुआ वायरल

Ganesh Chaturthi: मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्सव हो और सितारों की मौजूदगी न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है. इस बार क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी पूरे परिवार के साथ बप्पा की भक्ति में रंगे नजर आए. सचिन तेंदुलकर पत्नी अंजलि, बेटे अर्जुन, बहू सानिया और बेटी सारा तेंदुलकर के साथ मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया पहुंचे. साड़ी में दिखीं सारा-अंजलि-सानिया गणेश चतुर्थी के मौके पर तेंदुलकर परिवार का पारंपरिक अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है. सचिन और अर्जुन कुर्ता-पायजामा में नजर आए. सचिन ने नारंगी रंग का कुर्ता पहना था, जबकि अर्जुन हरे रंग के कुर्ते में दिखे. वहीं अंजलि तेंदुलकर, सानिया तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने साड़ी पहनी थी. खास तौर पर तीनों का पारंपरिक लुक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना. सारा हरे रंग की साड़ी में बेहद खूबसूरत नजर आईं. ये भी पढ़ें: अर्जुन तेंदुलकर के संस्कारों ने जीता दिल, गेंद लगने के बाद खुद जाकर पूछा शिशु का हाल मुंबई इंडियंस से जुड़ा है तेंदुलकर परिवार सचिन तेंदुलकर और अंबानी परिवार के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं. दोनों परिवार एक-दूसरे के पारिवारिक समारोहों में शामिल होते रहे हैं. सचिन तेंदुलकर का अंबानी परिवार से रिश्ता सिर्फ पारिवारिक मेल-जोल तक सीमित नहीं है. क्रिकेट की दुनिया में भी दोनों का पुराना जुड़ाव है. सचिन लंबे समय तक मुंबई इंडियंस के लिए स्पोर्ट्स चुके हैं और बाद में टीम के आइकन व मेंटॉर की भूमिका से जुड़े. अर्जुन तेंदुलकर ने भी मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल डेब्यू किया था. हालांकि, बाद में वह लखनऊ सुपर जायंट्स से जुड़े. क्यों खास है तेंदुलकर परिवार की तस्वीर? गणेश चतुर्थी के दौरान मुंबई में बॉलीवुड और क्रिकेट जगत के सितारे अक्सर अंबानी परिवार के गणेश उत्सव में शामिल होते हैं. लेकिन इस बार तेंदुलकर परिवार की एक साथ मौजूदगी ने इसे खास बना दिया. सचिन के साथ अंजलि, अर्जुन, सानिया और सारा का पारंपरिक अंदाज इस पूरे आयोजन की तस्वीरों का प्रमुख आकर्षण रहा. ये भी पढ़ें: IND vs AFG: वैभव सूर्यवंशी IN, संजू सैमसन OUT? दूसरे टी20 में दो बदलाव के साथ उतरेगी टीम इंडिया! The post Ganesh Chaturthi: अंबानी के घर बप्पा के दर्शन करने पहुंचे सचिन तेंदुलकर, अर्जुन की सादगी और सारा का लुक हुआ वायरल appeared first on Naya Vichar.

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गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले में नया मोड़, पीड़िता बोली – यह हादसा नहीं साजिश थी, कार ने जानबूझकर मारी टक्कर

गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर बाइक सवार स्त्री को कार से टक्कर मारने के मामले में नया मोड़ आ गया है. घायल स्त्री शिवानी चौहान उर्फ सिया ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कार चालक कल्याण बैंसला पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक सिया का कहना है कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि उसे जानबूझकर रोकने और टक्कर मारने की कोशिश थी. अगर हादसा था तो मौके पर क्यों नहीं रुके? सिया ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में सवाल उठाया कि अगर आरोपी वास्तव में दुर्घटना को लेकर परेशान था, तो टक्कर के बाद वह घटनास्थल पर क्यों नहीं रुका. उन्होंने आरोप लगाया कि कार ने उनकी स्पोर्ट्स बाइक को टक्कर मारी और चालक बिना रुके मौके से फरार हो गया. सिया ने कहा कि इस घटना में उनकी जान भी जा सकती थी. CCTV फुटेज में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कथित तौर पर कार चालक पहले सिया को रुकने का इशारा करता दिखाई देता है. इसके बाद कार उनकी बाइक की ओर मुड़ती है और उसे साइड से टक्कर मारती नजर आती है. पीछे चल रहे एक अन्य बाइक सवार के कैमरे में भी घटना रिकॉर्ड हुई, जिसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है. पुलिस ने संज्ञान लेकर दर्ज किया केस गुरुग्राम पुलिस ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सेक्टर-56 थाने में केस दर्ज किया. शुरुआती तौर पर आरोपी के खिलाफ हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125 के तहत कार्रवाई की गई. पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे गिरफ्तार करने के लिए तीन विशेष टीमें गठित की गई हैं. जांच के बाद हत्या की कोशिश की धारा जुड़ी गुरुग्राम पुलिस ने बताया कि गहन जांच और CCTV फुटेज के विस्तृत विश्लेषण के बाद मामले में BNS की धारा 109 भी जोड़ी गई है. यह धारा हत्या की कोशिश से संबंधित है और इसके तहत 10 साल तक की जेल का प्रावधान है. पुलिस अब वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है. सिया ने कहा- स्त्रीएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं सिया ने वीडियो में कहा कि दिल्ली और गुरुग्राम की सड़कों पर स्त्रीएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं. उन्होंने कहा कि कार से टक्कर मारने के बाद आरोपी ने एक पल के लिए भी गाड़ी नहीं रोकी और यह जानने की कोशिश नहीं की कि वह सुरक्षित हैं या नहीं. उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. ये भी पढ़ें: VIDEO : गुरुग्राम में स्त्री बाइक सवार का कार ने किया पीछा, फिर मारी टक्कर, Viral वीडियो में दिखा पूरा मामला The post गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले में नया मोड़, पीड़िता बोली – यह हादसा नहीं साजिश थी, कार ने जानबूझकर मारी टक्कर appeared first on Naya Vichar.

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Govinda and Sunita Ahuja: दिन में अकेले ढोल बजाया, रात में गोविंदा के आते ही गायब हुईं सुनीता, क्या आहूजा परिवार में बढ़ा तनाव?

गणेश चतुर्थी के मौके पर बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा के घर बप्पा का आगमन बड़ी धूमधाम से हुआ, लेकिन इसके साथ ही आहूजा परिवार के अंदरूनी रिश्तों को लेकर भी कयासबाजी तेज हो गई है. दिन में सुनीता आहूजा का कड़ा रुख और रात में गोविंदा के लौटने के बाद फैमिली फोटो से उनका गायब रहना अब चर्चा का विषय बन गया है. दिन में सुनीता का तीखा अंदाज ‘उन्हें दर्शन के लिए आना ही पड़ेगा’ दिन के समय सुनीता आहूजा अकेले ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए बप्पा को घर लेकर आई थीं. उस वक्त गोविंदा अमेरिका में थे. मीडिया से बात करते हुए सुनीता के बयानों में एक अलग ही तल्खी देखने को मिली. उन्होंने कहा कि आमतौर पर गोविंदा या उनका बेटा बप्पा को लाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने खुद जिम्मेदारी ली. जब गोविंदा के ना होने पर सवाल पूछा गया तो सुनीता ने साफ लहजे में कहा, “गोविंदा जी अमेरिका में हैं, वह रात को वापस आएंगे. थके होंगे तो आज नहीं कल दर्शन करेंगे, लेकिन यह उनका घर है, इसलिए उन्हें दर्शन के लिए आना ही पड़ेगा.” View on Instagram देर रात अमेरिका से लौटे गोविंदा, बच्चों संग की पूजा सुनीता के इस बयान के बाद देर रात गोविंदा अमेरिका से सीधे अपने घर पहुंचे. थकान के बावजूद वह बप्पा के दर्शन करने रुके. सामने आई तस्वीरों और वीडियो में गोविंदा अपनी बेटी टीना आहूजा और बेटे यशवर्धन के साथ आरती करते और पोज देते नजर आए. गोविंदा और सुनीता आहूजा का परिवार फैमिली फोटो से सुनीता गायब उड़े कई तरह के सवाल असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब देर रात की आरती और तस्वीरों से सुनीता आहूजा पूरी तरह नदारद दिखीं. जो पत्नी दिनभर बप्पा के स्वागत में आगे-आगे थी, वह पति गोविंदा के अमेरिका से लौटते ही पूजा के मुख्य फ्रेम से गायब हो गई. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या गोविंदा के देर से आने की वजह से सुनीता नाराज थीं, या फिर फैमिली के बीच अंदरखाने कुछ खटपट चल रही है? भले ही गोविंदा ने बच्चों के साथ मिलकर बप्पा का आशीर्वाद ले लिया हो, लेकिन सुनीता की इस दूरी ने गणेश चतुर्थी के जश्न के बीच अनगिनत कयासों को हवा दे दी है. ये भी पढ़ें: ‘हवा में लिखी बातों को साफ करना है’ सुनीता अहूजा के ‘अफेयर’ वाले दावों पर गोविंदा ने तोड़ी चुप्पी ये भी पढ़ें: ‘बर्बाद हो जाए गोविंदा…’ आखिर कौन थी वो औरत, जो रोज मांगती थी सुपरस्टार के डाउनफॉल की दुआ? The post Govinda and Sunita Ahuja: दिन में अकेले ढोल बजाया, रात में गोविंदा के आते ही गायब हुईं सुनीता, क्या आहूजा परिवार में बढ़ा तनाव? appeared first on Naya Vichar.

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Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान, जानें क्या करें और क्या न करें

Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व हर साल 17 सितंबर को धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा की आराधना की जाती है, जिन्हें देवताओं का शिल्पकार माना जाता है. इस दिन कारखानों, दुकानों, गैरेज और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और वाहनों की भी पूजा का खास महत्व है. पूजा के दिन कुछ कामों को शुभ माना जाता है, तो कुछ चीजों से बचने की सलाह दी जाती है. कहते हैं कि सही विधि और नियमों का पालन कर पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करें और क्या नहीं. विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करें? कार्यस्थल और औजारों की सफाई करें: पूजा से पहले दुकान, फैक्ट्री, गैरेज और औजारों व मशीनों की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. औजारों और मशीनों की पूजा करें: अपने काम से जुड़ी वस्तुओं, औजारों, मशीनों, वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पूजा करें. इन पर रोली या सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं और फूल व अक्षत अर्पित करें. मंत्र का जाप करें: पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और ‘ॐ विश्वकर्मणे नमः’ मंत्र का जाप करें. कारीगरों और मजदूरों का सम्मान करें: इस दिन अपने कर्मचारियों, कारीगरों, मिस्त्रियों और मजदूरों का सम्मान करें. उन्हें प्रसाद या अपनी क्षमता के अनुसार उपहार भी दे सकते हैं. दान-पुण्य करें: कन्या संक्रांति के अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य जरूरी सामान का दान करना शुभ माना जाता है. ये भी पढ़ें: Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी आज, यहां जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या न करें? औजारों और मशीनों का इस्तेमाल न करें: धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दिन औजारों और मशीनों को विश्राम दिया जाता है. इसलिए इनके इस्तेमाल से बचने की परंपरा है. औजारों का अपमान न करें: औजारों पर पैर लगाना, उन्हें इधर-उधर फेंकना या गंदा छोड़ना उचित नहीं माना जाता है. तामसिक चीजों का सेवन न करें: पूजा के दिन तामसिक चीजों जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और शराब समेत अन्य चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना जाता है. पुराने वाहन या मशीन बेचने से बचें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काम से जुड़ी वस्तुओं और वाहनों की बिक्री करने से बचना शुभ माना जाता है. कर्मचारियों से विवाद न करें: इस दिन अपने सहयोगियों, कारीगरों और मजदूरों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करना शुभ माना जाता है. इसलिए बेवजह विवाद से बचें. ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: चंद्रमा ने उड़ाया गणेश जी का मजाक, क्रोधित होकर दिया यह श्राप, जानें गणेश चतुर्थी से संबंधित ये पौराणिक कथा The post Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान, जानें क्या करें और क्या न करें appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल सरकार ने 252 मदरसों को बंद करने के लिए भेजा नोटिस, क्या भारत में गैर कानूनी है मदरसा चलाना? जानें नियम

अक्सर ये सवाल सोशल मीडिया और दुसरे माध्यम से उठता रहता है. मदरसों के संचालन को लेकर कई और भी सवाल है जिसका जवाब खोजा जाता है. अक्सर होने वाले सवालों में, क्या हर मदरसे का रजिस्ट्रेशन जरूरी है? क्या बिना मान्यता वाला मदरसा चल सकता है? और क्या प्रशासन ऐसे संस्थानों को बंद कर सकती है? जैसे सवाल शामिल है. इस लेख में हम इन्ही सवालों के जवाब जानेंगे. मदरसों के संचालन को लेकर किए जाने वाले सवालों का जवाब पूरे देश में एक जैसा नहीं है, क्योंकि मदरसा शिक्षा मुख्य रूप से राज्य के कानूनों और वहां की शिक्षा व्यवस्था के तहत आती है. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था है, जबकि दूसरे राज्यों में अलग नियम लागू हैं. पहले समझिए, रजिस्ट्रेशन और मान्यता में क्या अंतर है? सबसे जरूरी बात यह है कि मदरसे का रजिस्ट्रेशन और शैक्षणिक मान्यता एक ही चीज नहीं हैं. दोनों की अपनी अलग कानूनी भूमिका है. किसी मदरसे को चलाने वाली संस्था का कानूनी रूप से अस्तित्व होना (Legally recognized) और उसे शैक्षणिक मान्यता मिलना (government approved) दो अलग प्रक्रियाएं हैं. रजिस्ट्रेशन का मतलब है कि संस्था किसी लागू कानून के तहत कानूनी रूप से गठित है. यह सोसाइटी, ट्रस्ट या कानून में उपलब्ध किसी दूसरे वैध ढांचे के जरिए हो सकता है. लेकिन सिर्फ रजिस्ट्रेशन करा लेने से किसी संस्था को अपने आप मदरसे के रूप में शैक्षणिक मान्यता नहीं मिल जाती. दूसरी तरफ, मान्यता का संबंध शिक्षा व्यवस्था से है. इसमें संबंधित राज्य प्रशासन, मदरसा बोर्ड या सक्षम प्राधिकरण यह देख सकता है कि संस्था तय शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों को पूरा करती है या नहीं. यही वजह है कि कोई मदरसा गैर कानूनी या कानूनी, इस स्थिति समझने के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उसका रजिस्ट्रेशन हुआ है या नहीं. यह भी देखना जरूरी है कि उसे शैक्षणिक मान्यता मिली है या नहीं. उत्तर प्रदेश में क्या है मदरसों के लिए नियम ? उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा की व्यवस्था उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004 के तहत चलती है. राज्य में मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए बोर्ड से जुड़ी व्यवस्था और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया लागू है. इस कानून को लेकर 2024 में बड़ा कानूनी विवाद हुआ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में पूरे कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया और मदरसा एक्ट को संवैधानिक माना. अदालत ने माना कि राज्य प्रशासन मदरसों में शिक्षा के मानक, पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था को नियंत्रित कर सकती है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर रोक लगाई. मदरसा बोर्ड की कामिल और फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्रियां देने की व्यवस्था को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कानून(UGC) के साथ टकराव के कारण असंवैधानिक माना गया. ये भी पढ़ें: BRICS गाला डिनर में इसलिए परोसा गया वेज खाना, राहुल गांधी के 80% हिंदुस्तानीय नॉन-वेजिटेरियन वाले दावे की क्या है सच्चाई? क्या बिना मान्यता वाला मदरसा चल सकता है? यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है. जनवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि सिर्फ मान्यता नहीं होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद नहीं किया जा सकता, अगर उसे बंद करने के लिए लागू कानून में स्पष्ट आधार मौजूद नहीं है. लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है कि बिना मान्यता वाला मदरसा चल रहा हो, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे मान्यता प्राप्त मदरसे जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी. ऐसे संस्थान को प्रशासनी अनुदान, बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होने या छात्रों की योग्यता को प्रशासनी शिक्षा व्यवस्था में मान्यता दिलाने में दिक्कत हो सकती है. यानी चलाने का अधिकार और प्रशासनी शैक्षणिक लाभ पाने का अधिकार अलग-अलग बातें हैं. क्या प्रशासन मदरसों की पढ़ाई नियंत्रित कर सकती है? हां, लेकिन नियंत्रण की सीमा, कानून और संविधान से तय होती है. संविधान का अनुच्छेद 30 धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार देता है. लेकिन यह अधिकार पूरी तरह नियमन (Regulation) से बाहर नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि राज्य प्रशासन शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उचित नियम बना सकती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना हो सकता है कि छात्रों को जरूरी शैक्षणिक स्तर की शिक्षा मिले. इसलिए मदरसे का धार्मिक चरित्र बनाए रखने का अधिकार और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की राज्य की जिम्मेदारी, दोनों को साथ देखा जाता है. क्या मदरसों को लेकर हर राज्य में एक ही नियम है? नहीं, यह इस पूरे मुद्दे की सबसे महत्वपूर्ण बात है. उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड की अलग व्यवस्था है. वहीं उत्तराखंड ने 2025 में अपने पुराने मदरसा बोर्ड को खत्म कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था बनाई. इसके तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नया नियामक ढांचा तैयार किया गया है। पश्चिम बंगाल में भी मदरसों के रजिस्ट्रेशन, निरीक्षण और नियमन को लेकर व्यवस्था मजबूत करने पर प्रशासन की नजर है.इसी के तहत पश्चिम बंगाल प्रशासन ने राज्य के 252 मदरसों को बंद करने और करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा है. मदरसों के लिए प्रशासनी मदद और मान्यता क्यों जरूरी है? मदरसे का कानूनी अस्तित्व और प्रशासनी सहायता अलग-अलग विषय हैं. अगर कोई संस्था प्रशासनी अनुदान, बोर्ड की परीक्षा, प्रमाणपत्र या किसी प्रशासनी योजना का लाभ लेना चाहती है तो उसे संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना पड़ता है. केंद्र की SPMM जैसी योजनाओं में भी पात्रता के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं. इसलिए किसी मदरसे के लिए केवल संस्था के रूप में पंजीकृत होना पर्याप्त नहीं माना जाता. हर मदरसे का रजिस्ट्रेशन और मान्यता क्यों जरूरी है? सीधा जवाब है कि रजिस्ट्रेशन और मान्यता की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि मदरसा किस राज्य में है, किस कानून के तहत चल रहा है और वह कौन-कौन से प्रशासनी या शैक्षणिक लाभ चाहता है. कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि मदरसा चलाने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासन, परीक्षा और प्रशासनी सहायता से जुड़े नियमों का पालन राज्य कानून के अनुसार करना

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