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Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

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दुष्कर्म पीड़िता को कोर्ट में गवाही नहीं देने की धमकी, DGP से मांगी सुरक्षा

गुमलाः जिले में दुष्कर्म के एक मामले की पीड़िता को न्यायालय में गवाही नहीं देने और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बदनाम करने की धमकी देने का मामला सामने आया है. पीड़िता ने अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर डीजीपी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन भेजा है. 2019 में 10वीं की छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप पीड़िता ने आवेदन में बताया है कि वर्ष 2019 में जब वह 10वीं कक्षा की छात्रा थी, उस समय सिसई प्रखंड के सहिजाना निवासी कार्तिक उरांव ने उसके साथ दुष्कर्म किया था. इस मामले की सुनवाई न्यायालय में चल रही है और पीड़िता की गवाही भी हो रही है. ये भी पढ़ें- संजय सेठ के बयान पर JMM का जवाब, कहा- न्यायालय में लंबित मामले पर निष्कर्ष उचित नहीं गवाही देने पर बदनाम करने की धमकी पीड़िता का आरोप है कि आरोपित लगातार उस पर न्यायालय में गवाही नहीं देने का दबाव बना रहा है. गवाही देने पर इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बदनाम करने की धमकी दी जा रही है. इसके अलावा उसकी ससुराल जाकर भी उसे बदनाम करने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है. पीड़िता ने आरोपित से खतरा बताते हुए डीजीपी से सुरक्षा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है. The post दुष्कर्म पीड़िता को कोर्ट में गवाही नहीं देने की धमकी, DGP से मांगी सुरक्षा appeared first on Naya Vichar.

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नीतीश की विरासत पर घमासान: उपेंद्र कुशवाहा के दावे पर JDU का पलटवार, कहा- ‘चादर जितनी हो…’

Nitish legacy controversy: “चादर जितनी हो, पाँव उतने ही फैलाने चाहिए.” लेकिन कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव पकाते रहें और कभी पूरे न होने वाले दिवास्वप्न देखते रहें. बिना किसी का नाम लिए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के इस ट्वीट ने बिहार का सियासी तापमान बढ़ा दिया है. उमेश सिंह कुशवाहा के इस ट्वीट को रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के हालिया बयान से जोड़कर देखा जा रहा है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार ने बिहार की नेतृत्व से एक तरह से फुर्सत ले ली है. उन्होंने आगे दावा किया था कि जनता चाहती है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) नीतीश कुमार की नेतृत्वक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाले. नीतीश की विरासत पर उपेंद्र कुशवाहा का दावा कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था, “नीतीश जी के फुर्सत लेने के बाद बिहार और देशभर में लोगों का एक बड़ा वर्ग इस बात को लेकर चिंतित है कि उनकी विरासत को अब आगे कैसे बढ़ाया जाएगा. कई लोग उस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लेने का दावा करेंगे. हम भी उस पर दावा करते हैं. कितना सफल होंगे, यह नहीं जानते, लेकिन बिहार में एक बड़ा वर्ग यह चाहता है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा को यह दायित्व अपने हाथ में लेना चाहिए. दूसरे लोग भी प्रयास करेंगे और इसमें कोई बुराई भी नहीं है.” ‘कौन हैं उपेंद्र कुशवाहा?’ JDU का तंज उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान के बाद से बिहार में सियासी हलचल तेज है. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “चादर जितनी हो, पाँव उतने ही फैलाने चाहिए.” उन्होंने आगे लिखा कि कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव पकाते रहें और कभी पूरे न होने वाले दिवास्वप्न देखते रहें. ऐसे महानुभावों को हमारी विनम्र सलाह है कि जदयू की चिंता छोड़कर पहले अपने कुनबे की चिंता करें. क्योंकि आपका कुनबा तो पंचर वाहन की तरह समय-समय पर अपना संतुलन खोता रहता है. विरासत पर उपेंद्र ने दी सफाई हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को अपना पक्ष स्पष्ट किया. पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि विरासत का मतलब किसी प्रशासनी पद या नेतृत्वक उत्तराधिकार से नहीं, बल्कि विचारों और मूल्यों को आगे बढ़ाने से है. उन्होंने कहा कि जिस तरह रालोमो नेता दीपक प्रकाश उनके पुत्र हैं, उसी तरह निशांत कुमार भी उनके बेटे के समान हैं. दोनों में कोई भेदभाव नहीं है और दोनों ही बिहार तथा देश के भविष्य हैं. The post नीतीश की विरासत पर घमासान: उपेंद्र कुशवाहा के दावे पर JDU का पलटवार, कहा- ‘चादर जितनी हो…’ appeared first on Naya Vichar.

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कब लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? नोट करें तिथि और समय, जानें भारत में दिखाई देगा या नहीं

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा. यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाएगा. ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का करीब 93 फीसदी हिस्सा छाया में रहेगा, जिससे उसका कुछ हिस्सा तांबे या लाल रंग का दिखाई दे सकता है.  चंद्र ग्रहण 2026 का समय हिंदुस्तानीय समय के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण की मुख्य अवस्थाएं सुबह के समय होंगी: आंशिक चंद्र ग्रहण शुरू: सुबह 8:04 बजे आंशिक ग्रहण समाप्त: सुबह 11:21 बजे आंशिक ग्रहण की अवधि: करीब 3 घंटे 18 मिनट क्या हिंदुस्तान में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण? 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण हिंदुस्तान में नजर नहीं आएगा. ग्रहण के समय हिंदुस्तान में सुबह होगी, इसलिए चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं देगा. क्या हिंदुस्तान में लगेगा चंद्र ग्रहण का सूतक काल? चंद्र ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. ऐसे में लोगों को सूतक से जुड़े नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं होगी. इस दिन अन्य दिनों की तरह पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे. यह भी पढ़ें: राखी बांधने से पहले भाई को ऐसे लगाएं तिलक, जानें सही विधि और धार्मिक महत्व कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण? चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा: पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में दक्षिणी अमेरिका अफ्रीका यूरोप क्यों लाल दिखाई देता है चंद्रमा? चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है, तब पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली लाल और नारंगी रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है. इसी वजह से ग्रहण के दौरान चंद्रमा का कुछ हिस्सा तांबे या लाल रंग का दिखाई दे सकता है. यह भी पढ़ें; पुत्रदा एकादशी पर जरूर करें इन 5 विष्णु मंत्रों का जाप, मन को मिलेगी शांति The post कब लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? नोट करें तिथि और समय, जानें हिंदुस्तान में दिखाई देगा या नहीं appeared first on Naya Vichar.

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2026 का शक्तिशाली अल-नीनो बढ़ा सकता है मौसम का खतरा, बारिश से गर्मी तक भारत पर क्या होगा असर?

प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ते समुद्री तापमान ने दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. UK Met Office के मुताबिक, 2026 में बन रहा अल-नीनो अब तक के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक और संभवतः 19वीं सदी के बाद सबसे बड़ा हो सकता है. कितना मजबूत हो सकता है अल-नीनो? अल-नीनो में प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान पर पड़ सकता है. UK Met Office के मुताबिक, मौजूदा अनुमान में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3°C से ज्यादा बढ़ सकता है. Met Office के प्रोफेसर एडम स्कैफ ने कहा कि उन्होंने अपने मौसम मॉडल में इससे पहले अल-नीनो का इतना मजबूत संकेत नहीं देखा. NOAA का क्या अनुमान है? अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के 13 अगस्त के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान बहुत मजबूत अल-नीनो बनने की 90% से ज्यादा संभावना है. NOAA के अनुसार, इस अवधि में 69% संभावना है कि यह 1950 के बाद दर्ज सबसे मजबूत अल-नीनो में शामिल हो सकता है. ये भी पढ़ें: चीन के बाद दक्षिण कोरिया की आर्कटिक रूट पर एंट्री, क्या बदल जाएगा एशिया-यूरोप का समुद्री व्यापार? हिंदुस्तान में मानसून पर क्या असर पड़ेगा? हिंदुस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है. IMD के मुताबिक, अल-नीनो अक्सर कमजोर मानसून से जुड़ा रहा है, लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. समुद्र और वातावरण की दूसरी स्थितियां भी मानसून को प्रभावित करती हैं. उदाहरण के लिए, 1997 में मजबूत अल-नीनो के बावजूद हिंदुस्तान में मानसून लगभग सामान्य रहा था. इसलिए मजबूत अल-नीनो का मतलब यह नहीं है कि हिंदुस्तान में सूखा पड़ेगा, लेकिन बारिश कम होने या उसके समय और जगह में बदलाव का खतरा बढ़ सकता है. खेती पर बढ़ सकता है असर FAO के मुताबिक, अल-नीनो बारिश और तापमान में बदलाव करके खेती पर असर डाल सकता है. जून 2026 की FAO रिपोर्ट के अनुसार, अल-नीनो हिंदुस्तान के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश को कमजोर कर सकता है. इससे बारिश पर निर्भर चावल और मक्का जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है. अगर बारिश कम होती है या सही समय पर नहीं होती, तो किसानों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. ये भी पढ़ें: जनगणना 2027 के डाटा एंट्री कार्य का प्रशिक्षण, 30 अगस्त तक पूरा करना होगा काम क्या महंगा हो सकता है खाना? अल-नीनो से खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने का खतरा है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीजें निश्चित रूप से महंगी होंगी. FAO ने हिंदुस्तान और थाईलैंड में गन्ने की पैदावार पर संभावित असर को वैश्विक चीनी आपूर्ति के लिए खतरा बताया है. वहीं, मजबूत अल-नीनो से दक्षिण-पूर्व एशिया की कॉफी और पश्चिम अफ्रीका के कोको उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. वहीं, अगर कई देशों में फसल कम होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. गर्मी भी बढ़ सकती है अल-नीनो वैश्विक तापमान को भी बढ़ा सकता है. UK Met Office के मुताबिक, मौजूदा अल-नीनो के कारण 2027 में दुनिया के औसत तापमान का नया रिकॉर्ड बन सकता है. FAO के अनुसार, पहले से बढ़ रही गर्मी के बीच मजबूत अल-नीनो से लू, सूखा और बारिश में बदलाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. The post 2026 का शक्तिशाली अल-नीनो बढ़ा सकता है मौसम का खतरा, बारिश से गर्मी तक हिंदुस्तान पर क्या होगा असर? appeared first on Naya Vichar.

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औरंगाबाद-बिहटा रेल लाइन प्रोजेक्ट को लेकर अपडेट, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू, यहां बनेगा नया टर्मिनल

New Rail Line Bihar: बिहार में लगातार कई सारे रेल प्रोजेक्ट्स पर काम किए जा रहे हैं. अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन से औरंगाबाद शहर तक रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिसकी लंबाई लगभग 12 किलोमीटर है. इस प्रोजेक्ट पर जमीन स्तर पर काम शुरू हो गया है. जानकारी के मुताबिक, जिला भू-अर्जन कार्यालय ने लगभग 85.9118 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 11 मौजों से होकर गुजरेगी रेललाइन बताया जा रहा है कि इस रेल परियोजना के लिए सदर प्रखंड के 11 मौजों में जमीन ली जा रही है. इनमें जम्होर, जगदीशपुर, जोकहरी, भरथौली, सुशनार, खैराबिंद, मोरौली, कठौतिया, रामपुर, परसा और कर्मा भगवान शामिल हैं. गौर करने वाली बात यह भी है कि इस पूरी परियोजना के तहत श्री सीमेंट के उत्तर परसा गांव के पास प्रस्तावित टर्मिनल बनाया जाएगा. इससे रेल लाइन शहर के काफी करीब तक पहुंचेगी और यहां से यात्रियों को रेल सेवा मिलने की उम्मीद है. शहरों के बीच मजबूत होगी कनेक्टिविटी परियोजना से औरंगाबाद की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है. व्यापार, नौकरी, शिक्षा और दूसरे शहरों की आवाजाही आसान हो सकती है. लेकिन इस विकास की कीमत जमीन देने वाले किसानों को भी चुकानी होगी. लेकिन कहीं ना कहीं इससे किसानों की मुश्किल बड़ गई है. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें मिली जानकारी के अनुसार, यह रेल लाइन कई जगहों पर खेत के बीचोबीच गुजरेगी. ऐसी स्थिति में कुछ भूखंड दो हिस्सों में बंट सकता है और किसानों का कहना है कि अगर रेलवे लाइन बिछती है तो अंक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाना और खेती करने में परेशानी हो सकती है. कई जगहों के लिए किसान विरोध कर रहे और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. इतना ही नहीं, अंडरपास बनाए जाने की भी मांग की गई है. प्रशासन के सामने विकास और समाधान दोनों की चुनौती इन सब के बीच प्रशासन अब किसानों और अधिकारियों के बीच बातचीत कर रास्ता निकालने में जुटा है. बताया जा रहा है कि रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने का आदेश जिला भू-अर्जन पदाधिकारी की ओर से दिया गया है. यह परियोजना औरंगाबाद-बिहटा रेल परियोजना का हिस्सा है. Also Read: बिहार के यात्रियों को राहत, सिर्फ एक कार्ड से बस से मेट्रो तक करेंगे सफर, दूसरे राज्यों में भी मिलेगी सुविधा The post औरंगाबाद-बिहटा रेल लाइन प्रोजेक्ट को लेकर अपडेट, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू, यहां बनेगा नया टर्मिनल appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL, 2nd Test Day 1 Live: भारत का तीसरा विकेट गिरा, पंत और देवदत्त क्रीज पर

हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त 2026 से शुरू होगा. पहले टेस्ट में जीत दर्ज कर टीम इंडिया सीरीज में 1-0 से आगे है. अब हिंदुस्तानीय टीम सीरीज अपने नाम करना चाहेगी. The post IND vs SL, 2nd Test Day 1 Live: हिंदुस्तान का तीसरा विकेट गिरा, पंत और देवदत्त क्रीज पर appeared first on Naya Vichar.

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इंटरनेशनल फ्लाइट यात्रियों के लिए अपडेट, 1 सितंबर से बोर्डिंग पास पर नहीं लगेगा इमिग्रेशन स्टैंप

अगर आप इंटरनेशनल फ्लाइट से विदेश जाने वाले हैं, तो 1 सितंबर 2026 से एयरपोर्ट पर एक जरूरी बदलाव देखने को मिलेगा. अब इंटरनेशनल डिपार्चर के समय इमिग्रेशन काउंटर पर आपके बोर्डिंग पास पर फिजिकल स्टैंप नहीं लगाया जाएगा. यानी स्मार्टफोन में मौजूद डिजिटल बोर्डिंग पास दिखाकर भी इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी. हालांकि, अगर कोई यात्री पेपर बोर्डिंग पास लेकर चलता है, तो वह उसे रख सकता है. बस इमिग्रेशन ऑफिसर उस पर इंक स्टैंप नहीं लगाएंगे. इस बदलाव का मकसद एयरपोर्ट पर यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाना और इमिग्रेशन काउंटर पर लगने वाली भीड़ को कम करना है. 1 सितंबर से क्या बदल जाएगा? यह बदलाव देश के सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से विदेश जाने वाले यात्रियों पर लागू होगा. दिल्ली फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की ओर से एयरपोर्ट ऑपरेटर्स, एयरलाइंस और सिक्योरिटी पर्सनल को इस बदलाव के लिए तैयारी करने का निर्देश दिया गया है. नए नियम के बाद यात्री: स्मार्टफोन पर डिजिटल बोर्डिंग पास दिखा सकेंगे. पेपर बोर्डिंग पास रखना चाहें तो रख सकते हैं. इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर रबर स्टैंप नहीं लगेगा. फाइनल बोर्डिंग गेट तक बोर्डिंग पास का बारकोड सही हालत में रखना जरूरी रहेगा. यानी अगर आप फ्लाइट के दिन डिजिटल बोर्डिंग पास इस्तेमाल करते हैं, तो आपको सिर्फ इसे स्मार्टफोन में तैयार रखना होगा. आखिर बोर्डिंग पास पर स्टैंप क्यों हटाया गया? यह फैसला ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन यानी बीओआई की समीक्षा के बाद लिया गया है. समीक्षा में पाया गया कि फिजिकल बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगाने से कई बार यात्रियों की प्रक्रिया धीमी होती थी. इंक स्टैंप गलत जगह लगने या फैलने से बोर्डिंग पास पर मौजूद बारकोड भी खराब या धुंधला हो सकता था. इससे फाइनल बोर्डिंग गेट पर बारकोड स्कैन करने में परेशानी आ सकती थी. नए नियम से इस तरह की दिक्कतों को कम करने की कोशिश की जा रही है. साथ ही इमिग्रेशन क्यू में यात्रियों की आवाजाही भी तेज होने की उम्मीद है. ये भी पढ़ें: शिशु का Aadhaar अपडेट करना भूल गए? 30 सितंबर तक फ्री है Biometric Update, ऐसे उठाएं फायदा क्या एयरपोर्ट पर हर जगह स्टैंप लगना बंद हो गया? यह बदलाव खास तौर पर इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास की स्टैंपिंग से जुड़ा है. एविएशन सिक्योरिटी में इससे मिलता-जुलता बदलाव पहले ही हो चुका है. सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स यानी सीआईएसएफ ने कई साल पहले सिक्योरिटी चेक पॉइंट पर फिजिकल बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगाने की प्रक्रिया बंद कर दी थी. अब एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अपने ग्राउंड स्टाफ और बॉर्डर क्लियरेंस एजेंट्स को नए नियम के हिसाब से तैयार कर रहे हैं, ताकि 1 सितंबर से व्यवस्था में किसी तरह की परेशानी न हो. आगे पासपोर्ट स्टैंप को लेकर भी हो सकता है बदलाव? प्रशासन बॉर्डर क्लियरेंस को और डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम कर रही है. मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स अलग से एक पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है. इसका मकसद आगे चलकर इंडियन पासपोर्ट होल्डर्स के लिए फिजिकल एंट्री और एग्जिट पासपोर्ट स्टैंप की जरूरत भी खत्म करना है. अगर यह व्यवस्था आगे बढ़ती है, तो इंटरनेशनल ट्रैवल में कई कागजी प्रक्रियाएं धीरे-धीरे डिजिटल हो सकती हैं. फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बदलाव यही है कि 1 सितंबर से इंटरनेशनल डिपार्चर पर इमिग्रेशन काउंटर में बोर्डिंग पास पर फिजिकल स्टैंप नहीं लगेगा. ये भी पढ़ें: FSSAI ने 150 से ज्यादा नोटिस भेजे, Nestle से Coca-Cola तक कई कंपनियां रडार पर, Amazon का वेयरहाउस लाइसेंस भी रद्द The post इंटरनेशनल फ्लाइट यात्रियों के लिए अपडेट, 1 सितंबर से बोर्डिंग पास पर नहीं लगेगा इमिग्रेशन स्टैंप appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी के Smash the Patriarchy नारे के बीच क्यों ट्रेंड कर रहीं शाहबानो? जानिए पूरा मामला

Smash the Patriarchy का अर्थ है पितृसत्ता को तोड़ो या नष्ट करो. पुणे में राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम में लड़कियों का आह्वान किया है कि वे अपने हक के लिए लड़ें और पितृसत्ता को नष्ट कर दें, जो उनके अस्तित्व को नकारती है. राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि देश में स्त्रीओं को कंट्रोल किया जा रहा है, जबकि वे समाज की आधार हैं. आज स्थिति यह है कि 60% स्त्रीएं घर से अकेले बाहर नहीं जा सकती. 45% स्त्रीएं शादी/घर की जिम्मेदारी के चलते पढ़ाई-करियर छोड़ देती है और उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि मात्र 8% स्त्रीओं के पास ही जमीन का मालिकाना हक है. Smash the Patriarchy के साथ ही ट्रेंड कर रहा है शाहबानो राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी प्रशासन पर यह आरोप लगाया है कि वे लड़कियों को दबाना चाहते हैं और उनकी सोच पित्तृसत्तामक समाज को बढ़ावा देती है. राहुल गांधी ने स्त्रीओं को समाज की आधारशिला बताते हुए बहुत ही आक्रामक अंदाज में उनका आह्वान किया है कि वे अपनी अहमियत को समझें और कोई भी रिश्ता कितना भी महत्वपूर्ण हो, उनकी आइडेंटिटी से ऊपर नहीं हैं. राहुल गांधी के इस आह्वान के साथ ही एक ओर जहां उन्हें जेन जी लड़कियों का समर्थन मिल रहा है, वहीं कांग्रेस के पुराने फैसलों की वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर शाहबानो के मुद्दे को लेकर ट्रोल किया जा रहा है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर शाहबानो ट्रेंड भी कर रही हैं. कौन है शाहबानो? शाह बानो बेगम मध्य प्रदेश की एक मुस्लिम स्त्री थी. जिन्हें उनके पति ने शादी के 43 वर्ष बाद लगभग 62 वर्ष की उम्र में तलाक दिया था. उस वक्त शाहबानों के पांच शिशु थे और उन्होंने तलाकशुदा स्त्रीओं के गुजारा भत्ता (एलिमनी) के अधिकार के लिए ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई लड़ी थी. सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के पक्ष में फैसला दिया और उसके पति को गुजारा भत्ता देने को कहा था, लेकिन उस वक्त की राजीव गांधी की प्रशासन ने संसद से एक ऐसा कानून पास किया, जिसने कोर्ट के फैसले को कमजोर कर दिया और मुस्लिम स्त्रीओं को गुजारा भत्ता के अधिकार से वंचित कर दिया था. उस कानून के अनुसार मुस्लिम स्त्रीएं महज तलाक के बाद महज 90 दिन तक यानी इद्दत की अवधि तक ही गुजारा भत्ता की हकदार हैं. ट्रिपल तलाक और बुर्के को लेकर भी ट्रोल हो रहे हैं राहुल गांधी Smash the Patriarchy के आह्वान के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें इस बात के लिए ट्रोल किया जा रहा है कि जिन लोगों ने शाहबानो का साथ नहीं दिया, जो लोग ट्रिपल तलाक और बुर्के के पक्ष में खड़े नजर आते हैं, वे किस तरह स्त्री अधिकारों की बात कर रहे हैं. दरअसल संसद में कांग्रेस और राहुल गांधी का रुख ट्रिपल तलाक के पक्ष में रहा है. साथ ही वे बुर्के का भी समर्थन करते नजर आएं हैं. छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी राहुल गांधी मनुस्मृति की तो निंदा करते हैं, लेकिन इस्लाम में स्त्री अधिकारों के हनन पर एक शब्द नहीं कहते हैं. इसी वजह से उनकी आलोचना हो रही है. एक व्यक्ति ने लिखा है कि सुप्रिया श्रीनेत को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलता है, लेकिन पवन खेड़ा को मिल जाता है. एक व्यक्ति ने लिखा है कि मेनका गांधी, शाहबानो और सुकन्या देवी याद है ना राहुल गांधी. ये सभी भी स्त्रीएं थीं, स्ट्रेंथ ऑफ इंडिया. इनके लिए आप कुछ नहीं कह रहे हैं. प्रियंका गांधी भी कर रही हैं ट्रेंड राहुल गांधी के Smash the Patriarchy अभियान के बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी भी ट्रेंड कर रही है. यूजर्स यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ज्यादा क्षमताओं के बावजूद प्रियंका गांधी को कांग्रेस की कमान क्यों नहीं सौंपी गई है. राहुल गांधी नारी अधिकारों का हनन अपने घर में खुद कर रहे हैं और बात Smash the Patriarchy की कर रहे हैं. ये भी पढ़ें :‘Real-Life Batman’ बने राहुल गांधी, ‘साइलेंट गार्जियन’ वाले पोस्टर का क्या है मतलब? The post राहुल गांधी के Smash the Patriarchy नारे के बीच क्यों ट्रेंड कर रहीं शाहबानो? जानिए पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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महाराष्ट्र खाई दुर्घटना: मां ने घुटनों पर बैठकर लगाई गुहार, फिर भी नहीं माना कुणाल; खत्म हुआ पूरा परिवार, नया Video आया सामने

Maharashtra Hill Tragedy: छत्रपति संभाजीनगर के तिसगांव में हुई दर्दनाक घटना से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है. इसमें 18 वर्षीय कुणाल चांदवड़े को सुरक्षित वापस लाने के लिए उसकी मां और आसपास मौजूद लोग लगातार समझाते नजर आ रहे हैं. वीडियो में एक समय कुणाल की मां घुटनों के बल बैठकर उसकी ओर झुकती दिखाई देती हैं और उसे वापस आने के लिए मनाने की कोशिश करती हैं. इसके बावजूद स्थिति नहीं संभली और आखिरकार कुणाल, उसके पिता और उसकी मां की जान चली गई. करीब तीन घंटे तक बेटे को समझाती रही मां घटना शुक्रवार की है. कुणाल सुबह करीब 10 बजे खवड्या डोंगर पहुंचा था. वह पहाड़ी के किनारे के पास ही रुका रहा. उसके माता-पिता, ग्रामीणों, पुलिसकर्मियों और फायर ब्रिगेड के जवानों ने उसे सुरक्षित स्थान पर लौटने के लिए काफी देर तक समझाने की कोशिश की. करीब तीन घंटे तक यह कोशिश चलती रही. खड़ी चट्टान के नीचे फायर ब्रिगेड की टीम ने सुरक्षा के लिए नेट भी लगाया था. इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं. अब तीन मिनट का एक नया वीडिया सामने आया, जिसमें कुणाल की मां पहाड़ी के निचले हिस्से में उसके नजदीक खड़ी होकर लगातार उससे बात करती नजर आती हैं. कुणाल भी उनकी बातों का जवाब देता है. आसपास मौजूद दूसरे लोग भी उसे किनारे से पीछे हटने के लिए समझाते रहते हैं. वीडियो में एक पुलिसकर्मी भी मौके पर दिखाई देता है. हेलमेट की ओर इशारा कर मां ने की बात बातचीत के दौरान कुणाल की मां एक जगह बैठ जाती हैं और जमीन पर पड़े हेलमेट की तरफ इशारा करती हैं. कुणाल भी उसी हेलमेट की ओर इशारा करते हुए अपनी मां से बातचीत करता दिखाई देता है. वहां मौजूद कई लोग नजर आते हैं, जो कुणाल से बात कर रहे हैं और उसे पीछे आने के लिए कह रहे हैं. मां लगातार बेटे को समझाती रहती हैं. मां घुटनों के बल बैठकर बेटे से करती दिखीं गुहार वीडियो का सबसे भावुक हिस्सा तब सामने आता है, जब कुणाल की मां घुटनों के बल बैठकर उसकी ओर झुकती हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि वह बेटे से पीछे हटने और सुरक्षित जगह आने की गुहार कर रही हैं. आसपास खड़े लोग उन्हें उठने के लिए कहते हैं और खुद भी कुणाल को समझाने का प्रयास जारी रखते हैं. कुछ लोग कुणाल की तरफ आगे बढ़ते हैं, लेकिन जब वह किनारे की ओर और आगे जाता है तो वे पीछे हट जाते हैं. इस दौरान उसकी मां उसे पुकारती हुई दोबारा आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन वहां मौजूद लोग उन्हें पीछे खींच लेते हैं. देखें वीडियो- पिता ने भी बेटे को बचाने की कोशिश की घटना के दौरान कुणाल के पिता मुरलीधर भी मौके पर पहुंच चुके थे. जब वह कुणाल को बचाने के लिए उसकी तरफ बढ़े, तब स्थिति बेहद गंभीर हो गई. कुणाल ने आखिरकार छलांग लगा दी और उसे बचाने की कोशिश कर रहे उसके पिता भी उसके साथ नीचे गिर गए. इस हादसे में कुणाल और उसके पिता मुरलीधर दोनों की मौत हो गई. शिशु और पति को खाई में गिरता देख मां ने भी छलांग लगा दी और कुछ देर बाद कुणाल की मां संगीता की भी मौत हो गई. ये भी पढ़ें:- ओडिशा: बाढ़ में 5 दिन पेड़ से लटके रहे सुंनंदा, कैसे बची जान? समझें शरीर का ‘सर्वाइवल मोड’ सरपंच ने भी iPhone देने की बात कही थी स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुणाल अपने माता-पिता से iPhone खरीदने को लेकर नाराज और परेशान था. बताया गया कि उसके माता-पिता ने उसे iPhone खरीदकर देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वह खवड्या डोंगर पहुंच गया. उसे समझाने की कोशिश करने वालों में तिसगांव के सरपंच संजय जाधव भी शामिल थे. जाधव ने बाद में बताया कि उन्होंने कुणाल से बार-बार कहा कि वह अपनी मां के बारे में सोचे और ऐसा कदम न उठाए. उसे बातचीत में व्यस्त रखने की कोशिश भी की गई. जाधव ने कुणाल से यहां तक कहा कि वह उसे iPhone देने के लिए तैयार हैं, ताकि उसका ध्यान दूसरी तरफ लगाया जा सके और उसे सुरक्षित जगह वापस लाया जा सके. फायर ब्रिगेड ने नीचे लगाया था सुरक्षा नेट कुणाल के लंबे समय तक पहाड़ी के किनारे रहने के दौरान प्रशासन और बचाव दल भी लगातार सक्रिय रहे. फायर ब्रिगेड की टीम ने खड़ी चट्टान के नीचे सुरक्षा नेट लगाया था, ताकि किसी भी तरह से उसकी जान बचाई जा सके. पुलिस और ग्रामीण भी मौके पर मौजूद थे और अलग-अलग तरीके से उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे. इसके बावजूद करीब तीन घंटे तक चले प्रयासों के बाद भी उसे सुरक्षित वापस नहीं लाया जा सका. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे घटना के बाद पुलिस ने मुश्किल और दुर्गम इलाके से तीनों शवों को बाहर निकाला. इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस अब मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर रही है. जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा और तीनों की मौत की परिस्थितियां क्या थीं. ये भी पढ़ें:- रेलवे की चादर ओढ़े 3 लोग वायरल, 4 साल में 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम गायब होने का दावा The post महाराष्ट्र खाई दुर्घटना: मां ने घुटनों पर बैठकर लगाई गुहार, फिर भी नहीं माना कुणाल; खत्म हुआ पूरा परिवार, नया Video आया सामने appeared first on Naya Vichar.

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Mahabharat की एक्ट्रेस Asha Singh का निधन, 3 महीने से चल रहा था इलाज, मुंबई में ली आखिरी सांस

टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की वरिष्ठ अभिनेत्री Asha Singh का निधन हो गया है. उन्होंने 22 अगस्त को मुंबई में आखिरी सांस ली. Asha Singh पिछले करीब तीन महीनों से lung infection से जूझ रही थीं और उनका इलाज चल रहा था. उनके निधन की समाचार से टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है. Asha Singh को दर्शक सबसे ज्यादा बीआर चोपड़ा के चर्चित सीरियल ‘Mahabharat’ की कृपी के किरदार के लिए याद करते हैं. उन्होंने शो में कृपाचार्य की बहन और अश्वत्थामा की मां कृपी का किरदार निभाया था. उनका किरदार कहानी में भले ही बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन Asha Singh ने अपनी सहज अदाकारी से उसे खास बना दिया था.” कृपी के किरदार से मिली पहचान बीआर चोपड़ा का ‘Mahabharat’ हिंदुस्तानीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय धारावाहिकों में से एक रहा है. सीरियल के तमाम किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं. Asha Singh भी इसी शो का हिस्सा थीं. कृपी के किरदार में वह अश्वत्थामा की मां के रूप में नजर आई थीं. कहानी में उनकी मौजूदगी सीमित थी, लेकिन उनकी अदाकारी ने किरदार को अपनी पहचान दी. यही वजह है कि आज भी ‘Mahabharat’ के पुराने दर्शकों के बीच Asha Singh को कृपी के नाम से याद किया जाता है. Asha Singh के ‘Mahabharat’ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है. एक बार सीरियल के सेट पर निर्देशक Ravi Chopra से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया था कि कृपी के किरदार के लिए Asha Singh को ही क्यों चुना गया? Ravi Chopra ने उस वक्त कहा था, “मुझे उसकी आंखों में करुणा दिखती है, दया दिखती है, विनम्रता भी दिखती है, तो वह मुझे Kripi के रोल के लिए परफेक्ट लगी. तीन महीने से बीमारी से जूझ रही थीं रिपोर्ट के मुताबिक, Asha Singh पिछले तीन महीने से lung infection से जूझ रही थीं. उनका इलाज चल रहा था, लेकिन 22 अगस्त को मुंबई में उनका निधन हो गया. Asha Singh के निधन से टीवी इंडस्ट्री ने एक अनुभवी अभिनेत्री को खो दिया है. उन्होंने अपने लंबे करियर में कई भूमिकाएं निभाईं, लेकिन ‘Mahabharat’ की कृपी उनके सबसे यादगार किरदारों में शामिल रही. उनका काम और उनके निभाए किरदार लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बने रहेंगे. ये पढ़ें- Kareena Kapoor Pregnancy Rumours: ‘हट ना…’ प्रेगनेंसी वीडियो पर करीना ने बताई ‘बेबी बंप’ की असली वजह The post Mahabharat की एक्ट्रेस Asha Singh का निधन, 3 महीने से चल रहा था इलाज, मुंबई में ली आखिरी सांस appeared first on Naya Vichar.

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